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कौन हैं भारत के 53वें CJI जस्टिस सूर्यकांत, जिनके हाथों में आई देश की सर्वोच्च न्यायपालिका की कमान?
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Monday, November 24, 2025
Last Updated On: Monday, November 24, 2025
भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों शपथ लेकर देश की सर्वोच्च न्यायपालिका की बागडोर संभाल ली. सरल जीवन, मजबूत कानूनी पकड़ और संवैधानिक मामलों में गहरी विशेषज्ञता रखने वाले जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा. कौन हैं वे, कैसा रहा उनका सफर और क्यों माने जाते हैं खास? यहां पढ़ें पूरी जानकारी.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Monday, November 24, 2025
Indias 53rd Chief Justice: भारत की न्यायपालिका के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया, जब जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ग्रहण की. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. लगभग 14 महीने के कार्यकाल के साथ उन्होंने पूर्व CJI भूषण आर. गवई का स्थान लिया है, जिनकी सिफारिश पर ही उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का नेतृत्व सौंपा गया. हरियाणा के हिसार से शुरू हुआ उनका सफर आज सुप्रीम कोर्ट की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुंच चुका है, जहां वे आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक व राष्ट्रीय महत्व के मामलों में निर्णायक भूमिका निभाएंगे. एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर देश की सबसे महत्वपूर्ण कुर्सियों में से एक तक पहुंचने की उनकी कहानी प्रेरणा, संघर्ष और अद्भुत कानूनी दक्षता का अनोखा संगम है.
कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ. बचपन से ही वह पढ़ाई में तेज रहे और परिवार के संस्कारों को हमेशा दिल से अपनाया. उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई. इसके बाद उन्होंने हिसार के सरकारी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से 1981 में स्नातक पूरा किया. 1984 में उन्होंने मेरठी दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक से एलएलबी कर ली.
कानून की पढ़ाई खत्म होते ही उन्होंने हिसार की जिला अदालत में वकालत शुरू कर दी. साल 1985 में वह चंडीगढ़ पहुंचे और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की. यहीं उनकी असली पहचान बनी. लोग उन्हें एक तेज, समझदार और संवैधानिक मामलों में गहरी पकड़ रखने वाले वकील के रूप में जानने लगे.
किस जाति से आते हैं जस्टिस सूर्यकांत?
जस्टिस सूर्यकांत ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. उनके पिता मदन गोपाल शर्मा जातिगत भेदभाव के खिलाफ थे और हमेशा बराबरी की बात करते थे. यही वजह थी कि उन्होंने अपने चारों बेटों के नाम ऋषिकांत, शिवकांत, देवकांत और सूर्यकांत संस्कृतनिष्ठ रखे, ताकि परिवार की पहचान और मूल्य दोनों मजबूत बने रहें.
उनका परिवार शिक्षा से गहराई से जुड़ा रहा. उनके पिता संस्कृत के शिक्षक थे और परदादा भी अध्यापक थे. हालांकि परिवार में काफी लोग पढ़ाई-लिखाई से जुड़े थे, लेकिन सूर्यकांत ने अलग राह चुनी और आगे चलकर देश के शीर्ष न्यायाधीशों में शामिल हुए.
9 फरवरी 2027 तक रहेगा कार्यकाल
हरियाणा के हिसार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 तक देश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम करेंगे. उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर किया. वह हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रहे. इसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में आने का मौका मिला. अपने करियर में उन्होंने कई बड़े मामलों में अहम भूमिका निभाई. इनमें अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला, पेगासस मामले की जांच, राजद्रोह कानून को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश और बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का निर्देश शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट में दिए प्रमुख फैसले
सुप्रीम कोर्ट के जज रहते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने लगभग 80 बड़े फैसले लिखे. इनमें से एक अहम फैसला अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से जुड़ा था. उन्होंने 1967 के उस पुराने फैसले को खारिज कर दिया, जिससे एएमयू को फिर से अल्पसंख्यक दर्जा मिलने का रास्ता साफ हो गया.
इसके अलावा उन्होंने नागरिकता अधिनियम की धारा 6A पर चल रही चुनौती से जुड़े मामले, दिल्ली की आबकारी नीति केस में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने का आदेश और पेगासस स्पाइवेयर जांच से जुड़े अहम सुनवाई में भी बड़ी भूमिका निभाई. पेगासस मामले में बनी पीठ ने साइबर विशेषज्ञों की एक टीम बनाने का आदेश दिया था, ताकि अवैध निगरानी के आरोपों की जांच हो सके. अदालत ने साफ कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राज्य को बिना जवाबदेही के कार्य करने की छूट नहीं दी जा सकती.
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