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Shardiya Navratra 2025: देवी के नौ रूप जुड़े हैं नौ रंगों से, जानें इनके अर्थ
Authored By: स्मिता
Published On: Thursday, September 18, 2025
Last Updated On: Saturday, September 20, 2025
Shardiya Navratra 2025: शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा होती है. प्रत्येक रूप के साथ अलग-अलग रंग जुड़े होते हैं. इन रंगों का विशेष प्रतीकात्मक महत्व है.
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Saturday, September 20, 2025
Shardiya Navratra 2025: शारदीय नवरात्र 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रहे हैं. नवरात्र के दौरान भक्तगण देवी दुर्गा से आशीर्वाद लेने के लिए विशिष्ट पूजा-अर्चना करेंगे. इस वर्ष नवरात्र पूजा पूरे दस दिनों तक चलेगी. नौ दिनों के प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के एक अलग रूप को समर्पित होता है. प्रत्येक दिन के साथ विशिष्ट रंग जुड़े होते हैं. इन रंगों का विशेष प्रतीकात्मक महत्व है.
1. पहला दिन, देवी शैलपुत्री (पहाड़ों की देवी): सफेद रंग
- नवरात्र के पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जिन्हें पर्वतों की पुत्री कहा जाता है. वे शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं. भक्त शक्ति और समृद्धिशाली शुरुआत के लिए उनसे आशीर्वाद मांगते हैं.
- उनका सफेद रंग पवित्रता, शांति और नई शुरुआत का प्रतीक है. यदि कोई व्यक्ति किसी कार्य की शुरुआत करना चाहता है, तो शैलपुत्री देवी का सफेद रंग उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.
2. दूसरा दिन: देवी ब्रह्मचारिणी (ध्यान की देवी) : लाल रंग
दूसरे दिन दुर्गा के एक रूप ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. वे तपस्या और संयम का प्रतीक हैं. देवी अपने गहन आध्यात्मिक अनुशासन और अपने कार्यों के प्रति समर्पण के लिए जानी जाती हैं. इनकी पूजा करने से मन में संतुलन और शांति आती है.
लाल रंग ऊर्जा, जोश और साहस का प्रतीक है. यह प्रेम और शक्ति का रंग है.
3. तीसरा दिन: देवी चंद्रघंटा (सौंदर्य और शक्ति की देवी): नीला रंग
तीसरे दिन अर्धचंद्राकार घंटा वाली चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. वह अपनी वीरता और आंतरिक शक्ति के लिए जानी जाती हैं. दुर्गा का यह रूप अपने भक्तों को शक्ति और भय व बाधाओं पर विजय का आशीर्वाद देता है. उनकी पूजा से बुरी शक्तियों से भी सुरक्षा मिलती है.
नीला रंग शांति, ध्यान और आध्यात्मिकता का रंग है. यह शांत और संयमित स्वभाव का प्रतीक है.
4. चौथा दिन: देवी कुष्मांडा (सृजन की देवी): पीला रंग
चौथे दिन ब्रह्मांड की रचयिता देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है. वे रचनात्मकता और जीवन की पोषण शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं. कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और सद्भाव की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि वह अंधकार को दूर करती हैं. वे अपने भक्तों को सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं.
पीला रंग खुशी, सकारात्मकता और समृद्धि का रंग है. यह बुद्धि और रचनात्मकता का प्रतीक है.
5. पांचवां दिन: देवी स्कंदमाता (साहस और शक्ति की देवी): हरा रंग
भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता की पूजा पांचवें दिन की जाती है. वह अपने प्रेम, साहस और सुरक्षा के लिए जानी जाती हैं. भक्त व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में सफलता, समृद्धि और शांति के लिए उनकी पूजा करते हैं. वे उन्हें स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास का आशीर्वाद देती हैं. हरा रंग विकास, समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक है. यह प्रकृति और नवीनीकरण का रंग है.
6. छठा दिन: देवी कात्यायनी (युद्ध की देवी): स्लेटी रंग
छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है. यह दुर्गा के योद्धा स्वरूप का प्रतीक है. वे न्याय और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं.
देवी कात्यायनी की पूजा करने से संदेह और भ्रम दूर होते हैं. वे अपने भक्तों को विजय और सफल होने का आशीर्वाद देती हैं.
स्लेटी रंग संतुलन और तटस्थता का प्रतीक है. यह शांति और दृढ़ संकल्प का रंग है.
7 सांतवां दिन: देवी कालरात्रि (विनाश की देवी): नारंगी रंग
सातवें दिन दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली रूप कालरात्रि की पूजा की जाती है. वे बुरी शक्तियों का नाश करने वाली हैं और परिवर्तन का प्रतीक हैं.
माना जाता है कि वे अंधकार और बुराई का नाश करती हैं. वे अपने भक्तों में निर्भयता, सुरक्षा और आध्यात्मिक जागृति लाती हैं.
नारंगी रंग ऊर्जा, गर्मी और शक्ति का प्रतीक है. यह जीवन शक्ति और उत्साह का प्रतीक है.
8 आठवां दिन: देवी महागौरी (पवित्रता की देवी) : गुलाबी रंग
- देवी दुर्गा के शुद्ध और शांत स्वरूप महागौरी की पूजा आठवें दिन की जाती है. वह करुणा, क्षमा और आंतरिक शांति की प्रतीक हैं.
- भक्त मन, शरीर और आत्मा की पवित्रता प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा करते हैं. उनके आशीर्वाद से आध्यात्मिक ज्ञान और भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता है.
- गुलाबी रंग प्रेम, करुणा और सौम्यता का प्रतीक है. यह पवित्रता और उत्तम स्वास्थ्य का प्रतीक है।
9 नौवें दिन : देवी सिद्धिदात्री (सिद्धि और आध्यात्मिक शक्तियों की देवी) : बैंगनी रंग
नवरात्र के अंतिम दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो सभी इच्छाओं और आध्यात्मिक शक्तियों की पूर्ति का प्रतीक हैं. देवी अपने भक्तों को दिव्य ज्ञान, बुद्धि और सिद्धियां (आध्यात्मिक शक्तियां) प्रदान करती हैं. माना जाता है कि उनकी पूजा आध्यात्मिक और भौतिक दोनों ही कार्यों में सफलता दिलाती है.
बैंगनी रंग आध्यात्मिकता, धन और गरिमा का प्रतीक है. यह शक्ति और शांति के बीच संतुलन का प्रतीक है.
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