हरियाणा (Haryana) में बदला राजनीतिक समीकरण: प्रमुख जाट नेत्री किरण (Kiran) कांग्रेस से भाजपा में हुई शामिल

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Friday, June 21, 2024

Jat leader Kiran joined BJP from Congress
Jat leader Kiran joined BJP from Congress

साल अक्टूबर में हरियाणा में विधानसभा का चुनाव होना है। ऐसे में बंसी लाल जैसे कद्दावर नेता की राजनीति को आगे बढ़ा रही किरण चौधरी (Kiran Chowdhary) का भाजपा (BJP) में जाना कांग्रेस (Congress) के लिए बाद झटका माना जा रहा है।

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Wednesday, June 26, 2024

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हरियाणा की बदलती राजनीतिक तस्वीर (Political Image): ‘लाल’ परिवारों का नया रुख

हरियाणा में यह लाइन बहुत ही चर्चित है कि हरियाणा के तीन लाल–बंसी लाल, देवी लाल और भजन लाल (Bansi Lal, Devi Lal and Bhajan Lal)। ये तीनों अपने समय के कद्दावर नेता हुआ करते थे। सभी ने अपनी राजनीति कांग्रेस से शुरू की और पार्टी मे रहते ही हरियाणा के मुख्यमंत्री भी बने। लेकिन आज इन तीनों नेताओं की अगली पीढ़ी भाजपा (BJP) में आ गई है। अभी तक पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल की अगली पीढ़ी कांग्रेस (Congress) में थी लेकिन कल ही उनकी बहु किरण चौधरी और पौत्री श्रुति चौधरी भी भाजपा मे शामिल हो गईं हैं।

इसी साल अक्टूबर में हरियाणा में विधानसभा का चुनाव होना है। ऐसे में बंसी लाल जैसे कद्दावर नेता की राजनीति को आगे बढ़ा रही किरण चौधरी का भाजपा में जाना कांग्रेस के लिए बाद झटका माना जा रहा है। हालांकि हाल के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन चुनाव से ऐन पहले किसी कद्दावर नेता का पार्टी छड़ने से नुकसान होना तय माना जाता है। यह नुकसान कितना होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

महेंद्रगढ़ के जाट वोटों पर किरण का प्रभाव

कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद तोशाम से विधायक और पूर्व मंत्री किरण चौधरी और उनकी बेटी एवं पूर्व सांसद श्रुति चौधरी (Shruti Choudhary) कांग्रेस छोड़ने के अगले ही दिन भाजपा में शामिल हो गईं। इन दोनों नेताओं के भाजपा में आने से राज्य में भाजपा की स्थिति मजबूत होना तय माना जा रहा है। महेंद्रगढ़ के जाट वोटरों पर किरण चौधरी की मजबूत पकड़ है। इस सीट से वह अपनी बेटी श्रुति के लिए टिकट मांग रही थीं लेकिन भूपेन्द्र हुड्डा (Bhupendra Hooda) नहीं चाहते थे कि श्रुति को टिकट मिले इसलिए उन्हें टिकट नहीं मिला। कांग्रेस की इस सीट पर हार हुई। कांग्रेस की हार साबित करता है कि क्षेत्र में किरण की पकड़ बरकरार है।

आठ-दस सीटों पर भाजपा को लाभ

हरियाणा की राजनीति के जानकार अनिल भारद्वाज बताते हैं, महेंद्रगढ़ संसदीय सीट के आसपास की करीब 8-10 सीटें पर बंसीलाल परिवार का अच्छा प्रभाव है। इस क्षेत्र के लोग बंसीलाल को बहुत सम्मान करते हैं। यही सम्मान उनके परिवार को यहां मिलता है। इनमें भिवाड़ी, तोशाम, लोहारू, दादरी आदि विधानसभा सीटों पर बंसीलाल के बाद उनकी बहु और पोती श्रुति मजबूत हैं। किरण चौधरी के भाजपा में आने पर पार्टी को इन सीटों पर निश्चित ही लाभ मिलेगा। हां, यह देखना भी होगा कि भाजपा में जाने के बाद वहां किरण और श्रुति को कितना महत्व मिलता है।

जाट वोटों में स्थिति मजबूत करेगी भाजपा

किसान आंदोलन, फिर महिला पहलवानों के आंदोलन के बाद से हरियाणा के जाट भाजपा से छिटक गए हैं। ऐसे भी 2014 में प्रदेश मे भाजपा की सरकार बनने के बाद से पार्टी यहां गैर जाट की राजनीति कर रही है। जाट बहुल राज्य में पार्टी ने 2014 में एक पंजाबी समुदाय से आने वाले मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। दूसरी बार जीतने पर भी 2019 में उन्हें ही प्रदेश का कमान सौंपा गया। कुछ माह पूर्व जब खट्टर को हटाकर नया मुख्यमंत्री बनाया गया तब भी भाजपा ने एक गैर जाट को मुख्यमंत्री बनाया। ऐसे में यहां के जाट भाजपा से दूर होते जा रहे हैं। अब उसी जाट वोट को भाजपा करीब लाना चाह रही है।

लोकसभा से विधानसभा (From Loksabha to Vidhansabha): हरियाणा में बदलते जाट राजनीति के समीकरण

लोकसभा चुनावों में भी जाट वोटों की नाराजगी का खामियाजा भाजपा (BJP) को भुगतना पड़ा। भाजपा लोकसभा चुनाव में दस में से पांच सीटें हार गई है। किरण चौधरी भी जाट समुदाय से आती हैं। इसलिए भाजपा का मानना है कि उनके शामिल होने से जाट मतदाताओं के बीच पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि किसान आंदोलन के बाद महिला पहलवानों के आंदोलन ने हरियाणा के जाटों को भाजपा से बहुत दूर कर दिया है। हाल के दिनों मे वे भाजपा के करीब आ पाएंगे, ऐसा मुश्किल लगता है। इसके लिए मां-बेटी (किरण और श्रुति) दोनों को बहुत मेहनत करना होगा।

गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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