BMC Election Results 2026: मुंबई पर पहली बार BJP का कब्जा, ठाकरे भाइयों को बड़ा झटका
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, January 17, 2026
Updated On: Saturday, January 17, 2026
BMC Results: मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है. पहली बार BJP ने BMC पर कब्जा किया, महायुति गठबंधन ने बहुमत हासिल किया. शिंदे गुट भाजपा का मजबूत सहयोगी बनकर उभरा, जबकि ठाकरे भाइयों को झटका लगा. AIMIM ने अल्पसंख्यक इलाकों में जबरदस्त बढ़त दर्ज की. कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन सीटें कम मिलीं. ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ के असर से BJP की जीत मजबूत साबित हुई.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Saturday, January 17, 2026
BMC Results: मुंबई की राजनीति में तीन दशक बाद ऐसा बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर पहली बार भाजपा (BJP) का कब्जा हुआ है. महायुति गठबंधन ने 227 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया, और अब भाजपा मेयर बनाने की स्थिति में है. यह नतीजा सिर्फ पार्टी के लिए ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के लिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है. भाजपा की जीत से यह साफ हो गया है कि मुंबई के मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया और ठाकरे भाइयों की राजनीतिक पकड़ पर सवाल खड़े किए हैं.
महायुति ने पार किया बहुमत का आंकड़ा
BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत थी, जिसे महायुति ने हासिल कर लिया. भाजपा ने अकेले 89 सीटें जीतीं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं. इस तरह, गठबंधन को मामूली बढ़त मिली है, लेकिन बड़े फैसलों के लिए भाजपा को शिंदे गुट का समर्थन लेना होगा. चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि महायुति की यह जीत सिर्फ संख्यात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है.
भाजपा को मिलेगा मुंबई का मेयर
भाजपा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने साफ कर दिया है कि मुंबई का मेयर भाजपा का होगा. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा मुंबईकरों के जीवन में बदलाव अहम है. हालांकि, शिंदे गुट अहम पदों, खासकर स्टैंडिंग कमेटी की मांग कर सकता है. यह गठबंधन आगामी समय में महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा और शिंदे गुट की साझेदारी को मजबूती देगा.
ठाकरे भाइयों के लिए बड़ा झटका
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS ने मिलकर 71 सीटें हासिल कीं. उद्धव गुट ने 65 और MNS ने 6 सीटें जीतीं. मुंबई के पारंपरिक मराठी इलाकों जैसे दादर, परेल, लालबाग, वरली और शिवड़ी में ठाकरे परिवार की पकड़ बनी रही, लेकिन ठाणे और नवी मुंबई जैसे नए इलाकों में यह गठबंधन असर नहीं दिखा सका. वरली में शिंदे गुट के उम्मीदवार ने जीत हासिल कर ठाकरे गुट के लिए झटका दिया.
शिंदे बने भाजपा के मजबूत सहयोगी
चुनाव नतीजों के बाद एकनाथ शिंदे भाजपा के लिए मजबूत सहयोगी बनकर उभरे हैं. उनकी शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर साबित कर दिया कि सत्ता की चाबी उनके हाथ में है. इससे ठाकरे गुट की राजनीतिक अहमियत कम हुई है और अजित पवार जैसे नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भविष्य में बड़े निर्णयों में शिंदे गुट का समर्थन भाजपा के लिए निर्णायक रहेगा.
ओवैसी की पार्टी की जबरदस्त बढ़त
इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का रहा. पार्टी ने अपनी सीटें 2 से बढ़ाकर 8 कर लीं. कई अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में AIMIM ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया. माना जा रहा है कि ओवैसी के लगातार बयान और सक्रिय प्रचार का असर अल्पसंख्यक वोटों पर पड़ा. उनकी बढ़त ने यह संकेत दिया कि मुंबई की राजनीति में अब AIMIM भी एक प्रभावशाली खिलाड़ी बन चुकी है.
कांग्रेस ने लड़ा अकेले
इस बार कांग्रेस ने महा विकास अघाड़ी से अलग होकर चुनाव लड़ा. पार्टी को सिर्फ 24 सीटें मिलीं, जो 2017 की तुलना में कम हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उन्होंने गठबंधन से दूर रहकर उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोटों को बचाया. हालांकि AIMIM की बढ़त ने कांग्रेस को भी नुकसान पहुंचाया. यह परिणाम बताता है कि अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कांग्रेस के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आया.
‘ट्रिपल इंजन सरकार’ का असर
विश्लेषकों के मुताबिक, मतदाताओं ने केंद्र, राज्य और शहर में एक ही पार्टी की सरकार के पक्ष में मतदान किया. भाजपा के हिंदुत्व और विकास के एजेंडे ने ठाकरे गुट की मराठी अस्मिता की राजनीति पर भारी प्रभाव डाला. अलग-अलग समुदायों से समर्थन मिलने के कारण भाजपा की यह जीत और मजबूत हुई. इसका मतलब यह है कि अब मुंबई में भाजपा का प्रभाव सिर्फ संख्यात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक रूप से भी गहरा है.
निष्कर्ष
इस बार के BMC चुनाव ने महाराष्ट्र की राजनीति की तस्वीर बदल दी है. पहली बार मुंबई पर भाजपा का कब्जा, ठाकरे भाइयों के लिए झटका, शिंदे गुट की साख में मजबूती और ओवैसी की बढ़त- सबने मिलकर मुंबई की राजनीतिक दिशा को नया रूप दे दिया है. आगामी समय में यह गठबंधन और सहयोगी समीकरण राज्य की राजनीति को और भी दिलचस्प बनाने वाले हैं.
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