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‘2 हिंदू भागी हैं… बदले में 10 मुस्लिम लड़कियां लाओ’ नेता के बयान ने मचा दी सनसनी, डर में सिमटता मुस्लिम समाज
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, November 7, 2025
Last Updated On: Friday, November 7, 2025
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर के धनखरपुर गांव में बीजेपी के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के बयान ने माहौल में आग लगा दी - “दो हिंदू भागी हैं, बदले में दस मुस्लिम लड़कियां लाओ.” बस इतना कहना था कि गांव में डर, गुस्सा और तनाव फैल गया. मुस्लिम परिवारों में खौफ है, बेटियां घर से बाहर निकलने से डर रही हैं. राजनीति ने इंसानियत की सीमाएं लांघ दी हैं. आखिर इस बयान के पीछे का सच क्या है? जानिए पूरी कहानी…
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, November 7, 2025
Hindu Muslim Controversy News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर के छोटे से गांव धनखरपुर में एक बयान ने ऐसा तूफ़ान खड़ा कर दिया है, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है. बीजेपी के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने जनसभा में माइक थामकर कहा – “अगर दो हिंदू लड़कियां मुस्लिमों के साथ गई हैं तो बदले में दस मुस्लिम लड़कियां लाओ, शादी-विवाह का खर्चा हम देंगे, सुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारी होगी.” बस, इतना कहना था कि भीड़ में शोर, सोशल मीडिया पर हंगामा और पूरे इलाके में डर का माहौल फैल गया. 16 अक्टूबर का वो दिन अब इस गांव की पहचान बन चुका है – जहां राजनीति ने समाज के ताने-बाने को झकझोर दिया.
“योगी जी का जमाना है, डरने की ज़रूरत नहीं” – बयान से निकली चिंगारी
राघवेंद्र प्रताप सिंह का भाषण सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक खुली उकसाहट के रूप में देखा जा रहा है. मंच से उन्होंने कहा कि “अब अखिलेश यादव या मुस्लिम तुष्टिकरण का दौर नहीं, योगी जी का जमाना है, डरने की जरूरत नहीं, जो चाहो वो करो, हम तुम्हारे साथ हैं.” उनके ये शब्द सुनकर कुछ लोगों ने तालियां बजाईं, लेकिन बहुतों के दिलों में डर समा गया. यह बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, विपक्षी दलों ने सरकार और भाजपा दोनों को घेर लिया. वीडियो क्लिप कुछ ही घंटों में एक राजनीतिक हथियार बन गया.
“अब हमारी बेटियां घर से निकलने से डरती हैं” – मुस्लिम परिवारों में खौफ
धनखरपुर में आज हवा में बेचैनी है. मुस्लिम परिवारों के बीच डर साफ महसूस किया जा सकता है. स्थानीय निवासी अख्तर हुसैन कहते हैं, “हमारी बेटियां अब स्कूल या बाज़ार जाने से भी डरती हैं, कोई कुछ कर दे तो?” गांव में माहौल इतना तनावपूर्ण है कि महिलाएं घर से बाहर कम निकल रही हैं. “पहले हिंदू-मुस्लिम एक-दूसरे के घर में आते-जाते थे, अब निगाहों में शक बस गया है” – ये शब्द बताते हैं कि कैसे एक राजनीतिक मंच की जुबान ने पूरे गांव के भरोसे को तोड़ दिया.
विपक्ष का हमला: “ये है भाजपा की असली राजनीति”
जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी. कांग्रेस ने एक्स (Twitter) पर लिखा – “यह शर्मनाक बयान भाजपा के पूर्व विधायक ने दिया है. धर्म के नाम पर नफरत फैलाना और बेरोजगार युवाओं को भटकाना ही भाजपा की नई राजनीति बन चुकी है.” वहीं अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “ऐसे नेताओं पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि ये समाज के लिए खतरा हैं.” मायावती समेत कई विपक्षी नेताओं ने महिलाओं की सुरक्षा और बेटियों की गरिमा को लेकर गंभीर चिंता जताई. विपक्ष का साफ कहना है – ऐसे बयानों से प्रदेश में सांप्रदायिक दरार गहरी होती जा रही है.
बीजेपी नेता की सफाई – “गलत मतलब निकाला गया”
जब मामला तूल पकड़ गया, तो राघवेंद्र प्रताप सिंह सामने आए और सफाई देते हुए बोले – “मेरी मंशा गलत नहीं थी. मैं सिर्फ जवाबी कदम की बात कर रहा था, क्योंकि कुछ हिंदू लड़कियां अपनी मर्ज़ी से मुस्लिम लड़कों के साथ गई हैं.” लेकिन सोशल मीडिया और स्थानीय लोग उनकी इस सफाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. लोगों का कहना है – “नेता चाहे कुछ भी कहें, मगर इस बयान ने गांव की शांति छीन ली है.”
गांव में बढ़ी पुलिस चौकसी और तनाव
धनखरपुर में अब पुलिस की गाड़ियां हर वक्त गश्त करती दिखती हैं. प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन गांव में संदेह और तनाव की लकीरें गहरी होती जा रही हैं. कई मुस्लिम परिवार अपनी बेटियों को अब बाहर पढ़ाई या नौकरी पर नहीं भेजना चाहते. कुछ हिंदू परिवार भी कह रहे हैं कि “अब किसी पर भरोसा नहीं बचा.” ऐसा लगता है मानो राजनीतिक जहर ने समाज की नसों में डर और अविश्वास भर दिया हो.
बड़ा सवाल: समाज किस ओर जा रहा है?
धनखरपुर की यह घटना सिर्फ एक गांव या एक बयान की कहानी नहीं है. यह एक चेतावनी है कि कैसे राजनीति के शब्द, नफरत के बीज बनकर इंसानियत की ज़मीन में ज़हर बो देते हैं. जब लड़कियों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और गरिमा धर्म और राजनीति के चक्रव्यूह में फंस जाए, तो समझ लीजिए, समाज खतरे में है. क्या नेताओं को ये एहसास नहीं कि उनके शब्दों से एक पूरी पीढ़ी की सोच बदल सकती है?
वक्त है सोच बदलने का
धनखरपुर आज एक आईना है – जो दिखा रहा है कि नफरत की राजनीति हमें कहां ले आई है. लड़कियों की पहचान उनके धर्म से नहीं, उनके अस्तित्व और अधिकारों से होनी चाहिए. जरूरत है कि समाज, प्रशासन और राजनीति – सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि किसी भी समुदाय की बेटियों को डर में न जीना पड़े. क्योंकि अगर धनखरपुर की बेटियां डर में हैं, तो समझिए पूरा समाज असुरक्षित है.
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