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चीन-ताइवान संकट गहराया: क्या एशिया फिर युद्ध की कगार पर पहुंच गया है?
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Monday, December 29, 2025
Last Updated On: Monday, December 29, 2025
ताइवानी सीमा के बेहद करीब चीन का सैन्य अभ्यास ताइवान के लिए सिर्फ सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव भी है. ताइवान ने भी स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पीछे हटने वाला नहीं है. भविष्य में देखना होगा कि यह अभ्यास एशिया-प्रशांत क्षेत्र में किसी बड़े टकराव की भूमिका तो नहीं निभाएगी.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Monday, December 29, 2025
China-Taiwan Crisis Deepens: ताइवान एक स्वतंत्र देश है. जबकि चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है. ताइवान पर अपना दावा जताने के लिए वह हमेशा कूटनीतिक तरीके अपनाता है. लेकिन इस बार उसने ताइवान के चारों ओर बड़े पैमाने पर मिलिट्री एक्सरसाइज शुरू की है. उसने इन अभ्यासों का नाम ‘जस्टिस मिशन 2025’ रखा है.
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने बताया कि ताइवान जलडमरूमध्य के उत्तर और दक्षिण-पश्चिम हिस्सों में सैनिकों, युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों और तोपखाने को तैनात किया गया है. इन अभ्यासों में जमीन और समुद्र दोनों लक्ष्यों पर लाइव-फायर ड्रिल और नकली हमले किए जा रहे हैं.
चीनी सेना का दावा
चीनी सेना ने बताया है कि ये ड्रिल सिर्फ एक दिवसीय नहीं है. आज के बाद यह मंगलवार (30 दिसंबर) को भी जारी रहेगा. इसमें ताइवान के प्रमुख बंदरगाहों को ब्लॉक और घेरने का अभ्यास शामिल है. चीन ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव ऊंचे स्तर पर है.
ताइवान की प्रतिक्रिया
चीन की इस सैन्य गतिविधियों का जवाब ताइवान ने भी दिया है. ताइवान अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है. ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सैनिकों की तैनाती तेज कर दी है. इसके जवाब में ताइवानी सेना ने भी मिलिट्री एक्सरसाइज शुरू कर दी है. इन अभ्यासों का मकसद यह है कि अगर चीन अचानक किसी सैन्य ड्रिल को वास्तविक हमले में बदलता है, तो ताइवान तुरंत जवाब दे सके.
ताइवानी रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी जारी किया है. इसमें अमेरिकी निर्मित HIMARS रॉकेट सिस्टम सहित कई आधुनिक हथियार दिखाए गए हैं. HIMARS एक अत्यधिक मोबाइल आर्टिलरी सिस्टम है. इसकी मारक क्षमता करीब 300 किलोमीटर तक है. यह संघर्ष की स्थिति में चीन के तटीय इलाकों को निशाना बना सकता है.
ताइवान सीमा के बेहद करीब चीनी सेना
ताइवान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि दर्जनों चीनी सैन्य जहाज और विमान द्वीप के चारों ओर सक्रिय हैं. इनमें से कुछ ने जानबूझकर ताइवान के निकटवर्ती क्षेत्र के बेहद करीब उड़ान भरी और नौसेना का जहाज भी आ गया. ताइवान अपने तट से 24 नॉटिकल मील तक अपना क्षेत्र मानता है.
ताइवान के कोस्ट गार्ड ने भी त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए अपने बड़े जहाज तैनात कर दिए हैं. ताइवान के कोस्ट गार्ड का कहना है कि वह सेना के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि समुद्री मार्गों और मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों पर इन अभ्यासों का असर कम से कम पड़े.
- चीन ने लाइव-फायर ड्रिल में बंदरगाहों की नाकेबंदी का अभ्यास किया.
- ताइवान हाई अलर्ट पर, उसने अमेरिकी हथियारों का प्रदर्शन किया.
- विश्लेषकों ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘अभ्यास और असली हमले की रेखा बहुत धुंधली है.’
- ताइवान सरकार ने चीन के इन अभ्यासों की कड़ी निंदा की.
खतरे में हवाई क्षेत्र भी
ताइवान के विमानन प्राधिकरण ने बताया कि चीन ने ताइपे के पास हवाई क्षेत्र में एक अस्थायी खतरा क्षेत्र घोषित किया है. यह कदम मंगलवार (30 दिसंबर) को होने वाले 10 घंटे लंबे लाइव-फायर अभ्यासों के मद्देनज़र उठाया गया है. प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि वैकल्पिक उड़ान मार्गों की पहचान की जा रही है, ताकि नागरिक उड्डयन प्रभावित न हो.
अमेरिका और हथियार सौदा
यह चीनी सैन्य अभ्यास तब शुरू हुआ है, जब अमेरिका ने हाल ही में ताइवान को 11.1 अरब डॉलर के हथियार बेचने की घोषणा की है. ताइवान के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा हथियार पैकेज है. चीन के रक्षा मंत्रालय ने इस सौदे का कड़ा विरोध किया था. उसने चेतावनी दी थी कि PLA कड़े कदम उठाएगी.
विश्लेषकों का मानना है कि चीन के ये अभ्यास नियमित सैन्य प्रशिक्षण और वास्तविक हमले की तैयारी के बीच की सीमा को तेजी से मिटा रहे हैं. इसका उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगियों को कम से कम चेतावनी देकर रणनीतिक दबाव बनाना है.
चीन की चेतावनी
चीनी ईस्टर्न थिएटर कमांड के प्रवक्ता शी यी ने कहा कि ये अभ्यास ‘ताइवान की स्वतंत्रता चाहने वाली अलगाववादी ताकतों और बाहरी हस्तक्षेप करने वालों के लिए गंभीर चेतावनी हैं. चीनी सेना ने साथ ही कई प्रचार पोस्टर भी जारी किए हैं. पोस्टरों पर तीखे नारे लिखे हैं. मसलन, ‘कोई भी विदेशी दखल जो न्याय की ढाल को छुएगा, वह खत्म हो जाएगा’ आदि.
इन पोस्टरों में ताइवान के प्रमुख बंदरगाहों (कीलुंग और काओशुंग) को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है. सरकारी मीडिया के मुताबिक अभ्यास का मुख्य फोकस इन्हीं रणनीतिक बंदरगाहों को सील करने पर है.
ताइवान ने लोकतंत्र की दुहाई दी
ताइवान सरकार ने चीन के इन अभ्यासों की कड़ी निंदा की है. रक्षा मंत्रालय ने साफ कहा कि सशस्त्र बल लोकतंत्र और स्वतंत्रता के मूल्यों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे. मंत्रालय के बयानों में यह भी कहा गया है कि हमारी सेनाएं पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं.
दिलचस्प बात यह है कि इन सैन्य तनावों का ताइवान के शेयर बाजार पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है. बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है. यह इस बात का संकेत है कि आम लोग अभी घबराहट में नहीं हैं.
ताइवान के आम लोगों ने क्या कहा?
ताइपे में रहने वाले एक शिक्षक लिन वेई-मिंग कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि ये अभ्यास हमें डराने के लिए हैं. ऐसे अभ्यास पहले भी हो चुके हैं. असली मुद्दा यह है कि सरकार किस तरीके से जवाब देती है.
वहीं 56 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर स्टेफ़नी हुआंग ने कहा, ‘चीन का लक्ष्य सिर्फ द्वीप को पाना है, लोगों को नहीं. लेकिन ताइवानी लोग खुद को अलग पहचान के रूप में देखते हैं.’
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