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डोनबास क्यों रोक रहा रूस-यूक्रेन युद्ध की डील? ट्रंप–जेलेंस्की वार्ता का समझें मतलब
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Monday, December 29, 2025
Last Updated On: Monday, December 29, 2025
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने मार-ए-लागो में मुलाकात के बाद रूस-यूक्रेन युद्ध पर शांति समझौते के संकेत दिए हैं. बैठक के बाद यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी पर सहमति का दावा किया गया है. लेकिन डोनबास के भविष्य पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Monday, December 29, 2025
Donbas Peace Deal: रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच देर रात हुई बैठक से सकारात्मक नतीजे निकालने की उम्मीद बढ़ी है. बैठक के बाद दोनों नेताओं ने ऐसा दावा भी किया है. फ्लोरिडा स्थित ट्रंप के मार-ए-लागो रिसॉर्ट में रविवार (28 दिसंबर) को हुई मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने कहा कि वे शांति समझौते के ‘काफी करीब, शायद बहुत करीब’ पहुंच गए हैं.
हालांकि, पूर्वी यूक्रेन के विवादित डोनबास पर किसका कब्जा रहेगा, यह पहले बना हुआ है. इसलिए शांति समझौते में डोनबास का भविष्य अब भी सबसे बड़ा अनसुलझा मुद्दा बना हुआ है.
मार-ए-लागो में अहम मुलाकात
दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब यूक्रेन युद्ध को करीब चार साल होने वाला है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम के लिए दबाव बढ़ रहा है. बैठक के बाद दोनों नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन किसी ने वार्ता के ठोस ब्योरे तो नहीं दिए. हालांकि यह जरूर साफ किया गया कि सुरक्षा गारंटी और डोनबास के मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ी है.
ट्रंप ने कहा, ‘आने वाले कुछ हफ्तों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि शांति वार्ता सफल होगी या नहीं। उन्होंने यह भी माना कि क्षेत्रीय विवाद से जुड़े कुछ बेहद मुश्किल मुद्दों को अभी सुलझाना बाकी है.’ कुछ बेहद मुश्किल मुद्दों में डोनबास टॉप में है.
डोनबास क्यों है महत्वपूर्ण
डोनबास रूस-यूक्रेन युद्ध का केंद्र है. वर्तमान समय में डोनबास के अधिकांश हिस्सों पर रूसी सेना का कब्जा है. रूस पूरे डोनबास पर कब्जा चाहता है. जबकि यूक्रेन डोनबास छोड़ना नहीं चाहता. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यह यूक्रेन का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र (कोयला, धातु) है. आज नहीं बल्कि सोवियत काल से ही यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र रहा है.
यहां भारी उद्योग, स्टील प्लांट और कई मशीनरी के कारखाने हैं. यही नहीं यहां की सबसे बड़ी आबादी रूसी भाषियों की है. साथ ही यह रूस को क्रीमिया से जोड़ने के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. इस कारण यह क्षेत्र दशकों से संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है. साल 2014 में तो रूस-समर्थित विद्रोहियों ने अलग डोनबास तक की घोषणा कर दी थी.
डोनबास, सबसे बड़ा पेच
शांति वार्ता में सबसे कठिन मुद्दा डोनबास क्षेत्र का भविष्य है. यूक्रेन चाहता है कि मौजूदा युद्ध रेखाओं को ही आधार मानकर समाधान निकाला जाए. ज़ेलेंस्की पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि यूक्रेनी सेना का डोनबास से पूरी तरह पीछे हटना उनके लिए स्वीकार्य नहीं है. यह प्रस्ताव रूस की प्रमुख मांगों में से एक माना जाता है, जिसका मतलब होगा कि यूक्रेन अपने नियंत्रण वाले कुछ इलाके छोड़ दे.
सुरक्षा गारंटी पर सहमति का दावा
यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी को लेकर समझौता हो गया है. उनके मुताबिक, यह गारंटी भविष्य में किसी भी रूसी आक्रमण को रोकने के लिए अहम होगी. वहीं ट्रंप ने इस मुद्दे पर थोड़ा सतर्क बयान दिया. उन्होंने कहा कि सुरक्षा गारंटी पर बातचीत करीब 95 प्रतिशत पूरी हो गई है. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि इस व्यवस्था में यूरोपीय देशों की भूमिका बड़ी होगी और अमेरिका उनके प्रयासों का समर्थन करेगा.
- जेलेंस्की ने यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर समझौते की बात कही.
- डोनबास और रूस द्वारा मांगे गए अन्य क्षेत्र का भविष्य अभी भी अनसुलझा है.
- ट्रंप ने जेलेंस्की बैठक से पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन से फोन पर बात की.
- डोनबास अब भी शांति समझौते के लिए बना हुआ है एक पहेली.
यूरोप की भूमिका क्या होगी?
ट्रंप–ज़ेलेंस्की मुलाकात के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि सुरक्षा गारंटी को लेकर अच्छी प्रगति हुई है. मैक्रों के मुताबिक तथाकथित ‘गठबंधन ऑफ द विलिंग’ से जुड़े देश जनवरी की शुरुआत में पेरिस में बैठक करेंगे. वहां वे अपने ठोस योगदान को अंतिम रूप देंगे. मैक्रों का यह बयान संकेत देता है कि यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था में यूरोपीय देशों की सक्रिय भागीदारी तय मानी जा रही है।
फ्री इकोनॉमिक ज़ोन का प्रस्ताव
समझौते की कोशिश में अमेरिका ने एक नया विचार सामने रखा है. ट्रंप के मुताबिक, यदि यूक्रेन डोनबास के कुछ हिस्सों से पीछे हटता है, तो वहां एक ‘फ्री इकोनॉमिक ज़ोन’ बनाया जा सकता है. हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि यह ज़ोन कैसे काम करेगा. इसका प्रशासन कौन संभालेगा और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी.
ट्रंप और ज़ेलेंस्की दोनों ने माना कि डोनबास पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है. ट्रंप ने कहा, ‘यह अभी सुलझा नहीं है, लेकिन हम इसके बहुत करीब पहुंच गए हैं. यह बहुत मुश्किल मुद्दा है. मार-ए-लागो की इस मुलाकात ने शांति की उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि यूक्रेन युद्ध का अंत आसान नहीं होगा.
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