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Iran Protest Live: उबलता ईरान, 50 शहरों में विद्रोह, खामेनेई के खिलाफ आग, झड़पों में कई लोगों की मौत
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, January 3, 2026
Last Updated On: Saturday, January 3, 2026
Iran Protest Live: ईरान इस समय अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रहा है, जहां जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है. महंगाई, गिरती अर्थव्यवस्था और बेरोज़गारी के खिलाफ ईरान के 50 से ज्यादा शहरों में हिंसक प्रदर्शन जारी हैं. प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों की झड़पों में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है. स्कूल बंद हैं, बाजार ठप हैं और सत्ता पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, January 3, 2026
Iran Protest Live: ईरान इस वक्त अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रहा है. लगातार सातवें दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. तेहरान से लेकर हमदान, मशहद और जाहेदान तक हालात बेकाबू होते जा रहे हैं. महंगाई, बेरोज़गारी और गिरती अर्थव्यवस्था ने आम लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है. हालात ऐसे हैं कि सरकार को देशभर में स्कूल, यूनिवर्सिटी और सरकारी दफ्तर बंद करने पड़े हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों की भीड़ को रोका जा सके.
50 से ज्यादा शहरों तक फैली आग
ईरान में शुरू हुई यह अशांति अब 50 से अधिक शहरों में फैल चुकी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 22 प्रांतों के 46 शहरों में 113 से ज्यादा जगहों पर प्रदर्शन हो चुके हैं. बीते दो दिनों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों में कम से कम 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल और हिरासत में लिए गए हैं. कई इलाकों में सुरक्षाबलों को भीड़ को काबू में लाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए.
अर्थव्यवस्था की बदहाली बनी विद्रोह की जड़
इस पूरे विरोध की जड़ ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था है. ईरानी मुद्रा रियाल लगातार गिर रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर 42 हजार रियाल के पार पहुंच चुका है. देश में महंगाई दर 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे आम लोगों का जीवन बेहद मुश्किल हो गया है. रोजमर्रा की चीजें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं. इसी गुस्से ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया.
खामेनेई के खिलाफ नारे, राजशाही की मांग
इन प्रदर्शनों की खास बात यह है कि लोग खुलकर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं. कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने राजशाही की बहाली की भी मांग की है. हमादान के असदाबाद में तो प्रदर्शनकारियों ने ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के एक बेस पर कब्जे का दावा तक कर दिया, जिससे सरकार की चिंता और बढ़ गई है.
सरकार का कदम: बंदी और सख्ती
स्थिति को काबू में करने के लिए सरकार ने देशभर में बैंक हॉलिडे घोषित कर दिए हैं और शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि यह फैसला सर्दी के मौसम में ऊर्जा बचाने के लिए लिया गया है, लेकिन आम लोग इसे सुरक्षा कारणों से उठाया गया कदम मान रहे हैं. भारी सुरक्षा तैनाती और लगातार गिरफ्तारियां यह साफ संकेत देती हैं कि सरकार हालात को लेकर दबाव में है.
अंतरराष्ट्रीय हलचल और अमेरिकी एंगल
ईरान के हालात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी है. ईरान के क्राउन प्रिंस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके समर्थन से प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ा है. वहीं ईरान ने ट्रंप की टिप्पणियों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में आपत्ति जताई है और चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह आत्मरक्षा में जवाब देगा. कनाडा ने भी अपने नागरिकों के लिए ईरान यात्रा को लेकर सख्त एडवाइजरी जारी की है.
साजिश या जनआक्रोश?
ईरानी अधिकारी इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजरायल की साजिश बता रहे हैं. वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने चेतावनी दी है कि विदेशी दखल पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है. हालांकि सड़कों पर उतरी भीड़ का गुस्सा यह दिखाता है कि यह सिर्फ बाहरी साजिश नहीं, बल्कि जनता के भीतर लंबे समय से जमा असंतोष का नतीजा है.
आगे क्या?
ईरान इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां हर फैसला भविष्य की दिशा तय करेगा. सवाल यह है कि क्या सरकार सख्ती से हालात संभालेगी या जनता की आवाज सुनकर बदलाव का रास्ता चुनेगी. फिलहाल ईरान की सड़कों पर उबाल है, और यह उबाल आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है.
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