Russia-Ukraine War: ड्रोन हमले से चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र का सुरक्षा कवच क्षतिग्रस्त, रेडिएशन फैलने का खतरा मंडराया

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Saturday, December 6, 2025

Last Updated On: Saturday, December 6, 2025

Russia-Ukraine War: ड्रोन हमले से चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र का सुरक्षा कवच क्षतिग्रस्त, रेडिएशन फैलने का खतरा
Russia-Ukraine War: ड्रोन हमले से चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र का सुरक्षा कवच क्षतिग्रस्त, रेडिएशन फैलने का खतरा

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने पिछले सप्ताह यूक्रेन स्थित चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र का निरीक्षण किया. निरीक्षण में संयंत्र का सुरक्षा कवच क्षतिग्रस्त होने का पता चला है. इससे यूरोपियन देशों में रेडियोधर्मी पदार्थ फैलने का खतरा मंडराने लगा है. चेर्नोबिल परमाणु केंद्र दुनिया का सबसे संवेदनशील परमाणु केंद्र है.

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Saturday, December 6, 2025

Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध से यूक्रेन स्थित चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र (Chornobyl Nuclear Plant) एक बार फिर दुनिया में चिंता का विषय बन गया है. यह संयंत्र दुनिया के सबसे संवेदनशील परमाणु स्थलों में से एक है. बताया जा रहा है कि इस संयंत्र से रेडियोधर्मी पदार्थ (Radioactive Substances) फैलने का खतरा हमेशा मंडराता रहता है. इसे रोकने के लिए 2019 में स्टील का सुरक्षा कवच बनाया गया था. वह सुरक्षा कवच रूसी हमले से क्षतिग्रस्त बताया जा रहा है.

इस संयंत्र के निरीक्षण के बाद संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की परमाणु निगरानी एजेंसी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (International Atomic Energy Agency, IAEA) ने पुष्टि की है कि 1986 की भीषण परमाणु आपदा (Nuclear Disaster) के बाद रेडियोधर्मी पदार्थों को रोकने के लिए बनाया गया सुरक्षा कवच को ड्रोन हमले से नुकसान पहुंचा है. इससे वह अपना मुख्य सुरक्षा कार्य करने में असमर्थ है.

आईएईए के मुताबिक यह नुकसान फरवरी 2025 में हुए एक ड्रोन हमले से हुआ है. उस हमले से 2019 में तैयार किए गए, विशाल स्टील सुरक्षा ढांचे को गंभीर क्षति पहुंची है. इस सुरक्षा कवच को रिएक्टर नंबर-4 के ऊपर रेडियोधर्मी मलबे को सुरक्षित रखने के लिए स्थापित किया गया था. यह वही रिएक्टर है, जहां साल 1986 में भयानक परमाणु दुर्घटना हुई थी। उसके बाद पूरे यूरोप में रेडिएशन फैल गया था।

IAEA की पुष्टि

पांच दिसंबर को देर रात IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी (Rafael Grossi) ने एक आधिकारिक बयान दिया. उन्होंने बताया कि एजेंसी के निरीक्षण मिशन ने पुष्टि की है कि सुरक्षा संरचना ने अपनी मुख्य सुरक्षा क्षमता (विशेष रूप से रेडियोधर्मी पदार्थों को बाहर निकलने से रोकने की क्षमता) को खो दी है. हालांकि उन्होंने यह भी बताया है कि संरचना की भार-वहन करने वाली प्रणाली और निगरानी उपकरण स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त नहीं हुए हैं.

व्यापक सुरक्षा कवच बनाना जरूरी

महानिदेशक ग्रॉसी ने बताया, ‘प्रारंभिक मरम्मत का कार्य तत्काल किया गया है, लेकिन दीर्घकालिक परमाणु सुरक्षा को सुनिश्चित करने और भविष्य में किसी भी तरह की रेडिएशन को रोकने के लिए व्यापक और दीर्घकालिक सुरक्षा तंत्र बनाना आवश्यक है.’

यूक्रेन (Ukrainian) का आरोप, रूस (Russia) का इंकार

यूक्रेन के अधिकारी ने बताया है कि एक उच्च विस्फोटक वारहेड से लैस ड्रोन ने चेर्नोबिल प्लांट पर हमला किया. यह हमला इसी साल फरवरी में हुआ था। हमले में आग लग गई थी और रिएक्टर नंबर-4 के चारों ओर मौजूद सुरक्षात्मक क्लैडिंग को नुकसान पहुंचा था.

यूक्रेन ने इस हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं रूस की ओर से इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया गया है. मॉस्को ने दावा किया है कि उसने चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र को किसी भी प्रकार से निशाना नहीं बनाया.

रेडिएशन स्तर फिलहाल सामान्य

संयंत्र के नुकसान की खबर आते ही वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और आम लोगों चिंता बढ़ गई थी. लेकिन संयुक्त राष्ट्र और IAEA दोनों ने यह स्पष्ट किया है कि फिलहाल रेडिएशन स्तर सामान्य और पूरी तरह स्थिर है। किसी भी प्रकार के रेडियोधर्मी रिसाव की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है.

IAEA के मुताबिक उनके विशेषज्ञ लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके.

1986 की आपदा का जख्म आज भी ताजा

चेर्नोबिल (Chornobyl) का नाम आज भी दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु त्रासदियों में दर्ज है. 26 अप्रैल 1986 को रिएक्टर नंबर-4 में हुए विस्फोट ने पूरे यूरोप को रेडिएशन से प्रभावित कर दिया था. तत्कालीन सोवियत रूस सरकार (तब यूक्रेन सोवियत रूस का हिस्सा था) को हालात संभालने के लिए हजारों सैनिकों, वैज्ञानिकों और भारी मशीनों को तैनात करना पड़ा था.

इस दुर्घटना के बाद लाखों लोग विस्थापित हुए थे. हजारों लोगों की जान गई थी. पूरे क्षेत्र को दशकों तक के लिए ‘निषिद्ध क्षेत्र’ घोषित कर दिया गया था. प्लांट का आखिरी सक्रिय रिएक्टर वर्ष 2000 में बंद कर दिया गया था. उसके बाद सिर्फ रेडियोधर्मी मलबे को सुरक्षित रखने की चुनौती बची थी.

2019 में बना था नया सुरक्षा कवच

रेडियोधर्मी रिसाव को हमेशा के लिए रोकने पर कार्य शुरू हुआ . वर्ष 2019 में पुराने कंक्रीट सरकोफेगस के ऊपर अत्याधुनिक स्टील आर्च संरचना बनाई गई थी. इसे दुनिया की सबसे बड़ी चलायमान संरचनाओं में गिना जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य रेडियोधर्मी धूल और मलबे को पर्यावरण में फैलने से रोकना था. ताकि भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

युद्ध की मार झेलते ऊर्जा ढांचे

IAEA ने यह निरीक्षण यूक्रेन और रूस के लगभग चार साल लंबे युद्ध के दौरान देशभर में बिजली सबस्टेशनों और ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान के सर्वेक्षण के साथ किया. रिपोर्ट में बताया गया कि बार-बार होने वाले हमले यूक्रेन की ऊर्जा सुरक्षा को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं.
गौरतलब है कि फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के शुरुआती हफ्तों में रूसी सेनाओं ने एक महीने से अधिक समय तक चेर्नोबिल प्लांट और आसपास के इलाके पर कब्जा कर लिया था. उस समय भी संभावित परमाणु जोखिम को लेकर दुनिया भर में डर का माहौल था.

वैश्विक चिंता बरकरार

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में सुरक्षा कवच पूरी तरह से कमजोर हुआ, तो यह पूरे यूरोप के लिए एक बार फिर गंभीर रेडियोधर्मी खतरा बन सकता है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन युद्ध की आग में चेर्नोबिल जैसे संवेदनशील स्थलों का प्रभावित होना पूरी मानवता के लिए सही नहीं होगा.

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गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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