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US-Israel Attacks Iran: ईरान में अमेरिकी-इजरायली हमले तेज, 3000 टारगेट तबाह, मिडिल ईस्ट में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, March 7, 2026
Last Updated On: Saturday, March 7, 2026
US-Israel Attacks Iran: अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान में युद्ध लगातार तेज हो रहा है. ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अब तक 3000 से ज्यादा टारगेट तबाह किए जा चुके हैं. ईरान भी मिसाइल हमलों से जवाब दे रहा है. मिडिल ईस्ट में तीसरा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी से तनाव और बढ़ गया है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, March 7, 2026
US-Israel Attacks Iran: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. इस संघर्ष का आठवां दिन भी मिसाइलों, ड्रोन और बमबारी के बीच गुजर रहा है. पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव का माहौल है और हर दिन नए हमलों की खबरें सामने आ रही हैं. अमेरिका और इजरायल जहां लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई में पीछे नहीं हट रहा. इस टकराव ने पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया है और दुनिया भर के देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ में 3000 से ज्यादा टारगेट तबाह
अमेरिका की ओर से चलाए जा रहे सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान में बड़े पैमाने पर हमले किए गए हैं. अमेरिकी सेना के मुताबिक इस ऑपरेशन के पहले हफ्ते में 3000 से ज्यादा सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है. इन हमलों में फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और क्षेत्र में अपने सैनिकों तथा सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. हालांकि ईरान ने इन हमलों को आक्रामक कार्रवाई बताते हुए कहा है कि वह इसका कड़ा जवाब देगा.
मिडिल ईस्ट में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी
तनाव बढ़ने के साथ ही अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका मिडिल ईस्ट में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करने की तैयारी कर रहा है. एयरक्राफ्ट कैरियर समुद्र में चलने वाला एक बड़ा सैन्य बेस होता है, जहां से फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर उड़ान भर सकते हैं. यदि तीसरा कैरियर तैनात होता है तो यह इस क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को और बढ़ा देगा. इससे यह संकेत भी मिलता है कि अमेरिका आने वाले समय में किसी भी बड़े सैन्य कदम के लिए तैयार रहना चाहता है.
ईरान का पलटवार और मिसाइल हमले
ईरान ने भी इस युद्ध में आक्रामक रुख अपनाया हुआ है. इजरायली सेना के अनुसार ईरान की ओर से इजरायल के कई इलाकों की तरफ मिसाइलें दागी गईं. इन हमलों को रोकने के लिए इजरायल का डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गया और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई. इसके साथ ही ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने घोषणा की है कि वह नई पीढ़ी की मिसाइल और ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है. इससे यह साफ है कि यह संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है और दोनों पक्ष लगातार सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं.
जॉर्डन में अमेरिकी डिफेंस सिस्टम पर हमला
इस संघर्ष के दौरान ईरान ने जॉर्डन में तैनात अमेरिका के टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाकर उसे निष्क्रिय कर दिया. यह सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोकने के लिए लगाया जाता है. इस पर हमला होना अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. इसके अलावा अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी अन्य देश द्वारा ईरान को खुफिया जानकारी दी जा रही है तो उस पर भी नजर रखी जा रही है.
लेबनान में इजरायली हमले और बढ़ती तबाही
इस युद्ध का असर अब दूसरे देशों तक भी फैलता नजर आ रहा है. इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाकों में भारी बमबारी की है. बताया गया कि रातभर में कई चरणों में हवाई हमले किए गए, जिनमें हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. इससे साफ हो गया है कि यह संघर्ष अब पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की चुनौती
ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और इजरायल को खुली चुनौती दी है. ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अगर अमेरिका में हिम्मत है तो वह तेल टैंकरों को अपने युद्धपोतों की सुरक्षा में इस रास्ते से निकालकर दिखाए. यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है. यदि यहां तनाव बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. इसी वजह से दुनिया की नजरें अब इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं.
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