भंसाली की फिल्मों की ‘पावर क्वीन’: जब हीरो से ज्यादा दमदार दिखीं ये अभिनेत्री
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, March 6, 2026
Updated On: Friday, March 6, 2026
संजय लीला भंसाली की फिल्मों में कई ऐसे महिला किरदार देखने को मिलते हैं जो कहानी की असली ताकत बनकर उभरते हैं. प्यार, संघर्ष, आत्मसम्मान और साहस से भरी इन महिलाओं ने मुश्किल हालातों का डटकर सामना किया. यही वजह है कि इन दमदार किरदारों के आगे फिल्मों के कई हीरो भी फीके नजर आते हैं.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Friday, March 6, 2026
Bhansali’s Films: इंटरनेशनल विमेंस डे के मौके पर अगर हिंदी सिनेमा में मजबूत महिला किरदारों की बात की जाए, तो फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली का नाम सबसे ऊपर आता है. भंसाली की फिल्मों की खासियत सिर्फ उनके भव्य सेट, शानदार संगीत और खूबसूरत सिनेमैटोग्राफी नहीं है, बल्कि उनकी कहानियों में महिलाओं को दिया गया मजबूत स्थान भी है. उनकी फिल्मों में महिलाएं सिर्फ हीरो की प्रेमिका या सहायक किरदार बनकर नहीं आतीं, बल्कि कहानी की असली ताकत बन जाती हैं. रानियों से लेकर तवायफों तक, भंसाली ने ऐसे महिला किरदार गढ़े हैं जो मुश्किल हालातों में भी आत्मसम्मान, साहस और अपने फैसलों पर अडिग रहने की मिसाल पेश करती हैं. यही वजह है कि उनकी फिल्मों की कई महिलाएं ऐसी हैं जिनके सामने बड़े-बड़े हीरो भी फीके पड़ जाते हैं.
पारो (ऐश्वर्या राय): आत्मसम्मान और भावनात्मक ताकत की मिसाल

फिल्म देवदास में पारो का किरदार, जिसे ऐश्वर्या राय ने निभाया था, एक ऐसी महिला का चेहरा है जो अपने प्यार के लिए सब कुछ करने को तैयार रहती है, लेकिन अपने आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं करती. देवदास से गहरा प्यार करने के बावजूद, जब हालात उसके खिलाफ हो जाते हैं, तब भी पारो टूटकर बिखरती नहीं है. वह अपने जीवन की जिम्मेदारियां और समाज की अपेक्षाओं को गरिमा के साथ निभाती है. पारो का किरदार दिखाता है कि एक महिला की ताकत सिर्फ उसके फैसलों में ही नहीं, बल्कि उसकी सहनशक्ति और आत्मसम्मान में भी होती है.
चंद्रमुखी (माधुरी दीक्षित): समाज की सोच को चुनौती देने वाली महिला

देवदास की ही एक और अहम किरदार चंद्रमुखी, जिसे माधुरी दीक्षित ने निभाया था, पेशे से तवायफ होने के बावजूद बेहद संवेदनशील और दयालु दिल रखती है. भंसाली ने इस किरदार के जरिए यह दिखाया कि समाज अक्सर लोगों को उनके पेशे से आंकता है, लेकिन इंसान की असली पहचान उसके दिल और व्यवहार से होती है. चंद्रमुखी का देवदास के लिए निस्वार्थ प्यार और उसका आत्मसम्मान उसे कहानी का सबसे यादगार किरदार बना देता है. वह यह साबित करती है कि समाज की बनाई सीमाएं किसी इंसान की महानता को तय नहीं कर सकतीं.
लीला (दीपिका पादुकोण): निडर और अपने फैसलों पर अडिग

फिल्म गोलियों की रासलीला राम-लीला में लीला का किरदार, जिसे दीपिका पादुकोण ने निभाया, बेहद जोशीला और बेखौफ है. वह पुराने रिवाजों और खानदानी दुश्मनी के सामने झुकने से साफ इनकार कर देती है. लीला अपने दिल की सुनती है और अपने फैसलों के लिए पूरी जिम्मेदारी भी लेती है. उसका आत्मविश्वास और खुलकर अपनी बात कहने का अंदाज उसे भंसाली की सबसे मजबूत महिला किरदारों में शामिल करता है.
मस्तानी (दीपिका पादुकोण): प्यार और बहादुरी का अनोखा संगम

फिल्म बाजीराव मस्तानी में दीपिका पादुकोण द्वारा निभाया गया मस्तानी का किरदार सिर्फ एक प्रेमिका नहीं, बल्कि एक कुशल योद्धा भी है. वह तलवार चलाना जानती है और अपने प्यार के लिए हर मुश्किल का सामना करने को तैयार रहती है. समाज और राजनीति के विरोध के बावजूद, मस्तानी अपने रिश्ते और अपने आत्मसम्मान के लिए डटी रहती है. उसका किरदार यह दिखाता है कि एक महिला संवेदनशील होने के साथ-साथ बेहद साहसी भी हो सकती है.
काशीबाई (प्रियंका चोपड़ा): दर्द के बीच भी गरिमा बनाए रखने वाली ताकत

प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म बाजीराव मस्तानी में काशीबाई का किरदार निभाया, जो भावनात्मक मजबूती का बेहतरीन उदाहरण है. अपने पति बाजीराव के दूसरी महिला से प्रेम करने का दर्द सहने के बावजूद, काशीबाई कभी अपनी गरिमा नहीं खोती. वह शालीनता और समझदारी के साथ परिस्थितियों को स्वीकार करती है. काशीबाई का किरदार हमें यह सिखाता है कि कई बार चुप रहकर भी इंसान अपनी ताकत और आत्मसम्मान को कायम रख सकता है.
रानी पद्मावती (दीपिका पादुकोण): साहस और नेतृत्व की प्रतीक

फिल्म पद्मावत में रानी पद्मावती का किरदार भी दीपिका पादुकोण ने निभाया था. उन्हें एक ऐसी शासक के रूप में दिखाया गया है जो बुद्धिमान, साहसी और दृढ़ निश्चयी है. वह अपने राज्य और सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी खतरे से डरती नहीं है. पद्मावती का किरदार यह दिखाता है कि एक सच्चा नेता वही होता है जो कठिन से कठिन हालात में भी अपने मूल्यों और सम्मान के साथ खड़ा रहता है.
गंगूबाई (आलिया भट्ट): संघर्ष से पैदा हुई असली ताकत

फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी में आलिया भट्ट ने गंगूबाई का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीत लिया. गंगूबाई की कहानी संघर्ष और आत्मसम्मान की कहानी है. धोखे और शोषण का सामना करने के बाद भी वह हार नहीं मानती और अपने समाज की महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाती है. वह कमाठीपुरा की महिलाओं के लिए एक मजबूत आवाज बन जाती है. गंगूबाई का किरदार यह दिखाता है कि अगर किसी इंसान में हिम्मत और आत्मविश्वास हो, तो वह अपने हालात बदलने की ताकत भी रखता है.
क्यों खास हैं भंसाली की ये ‘पावर क्वीन’
भंसाली की फिल्मों की महिलाएं सिर्फ खूबसूरत किरदार नहीं हैं, बल्कि उनकी अपनी सोच, संघर्ष और पहचान होती है. वे समाज की बंदिशों को चुनौती देती हैं और अपने फैसलों के साथ खड़ी रहती हैं. यही वजह है कि इन किरदारों को दर्शक सिर्फ फिल्म के किरदार के रूप में नहीं, बल्कि प्रेरणा के रूप में भी देखते हैं. भंसाली ने अपने सिनेमा के जरिए यह साबित किया है कि जब कहानी के केंद्र में एक मजबूत महिला होती है, तो फिल्म की ताकत कई गुना बढ़ जाती है.
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