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खाड़ी में दरकता तेल गठबंधन: यमन पर सऊदी हमले से समझें अमेरिका, सूडान और यमन की त्रिकोणीय राजनीति
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Wednesday, December 31, 2025
Last Updated On: Wednesday, December 31, 2025
यमन पर सऊदी हवाई हमले के बाद अमीराती सेनाओं की वापसी बेशक यूएई और सऊदी अरब के बीच टकराव कम कर सकता है. लेकिन इस घटना ने लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों वाले दो खाड़ी तेल शक्तियों के बीच बढ़ते अविश्वास को उजागर जरूर कर दिया है.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Wednesday, December 31, 2025
Gulf Oil Conflict: यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर मंगलवार (30 दिसंबर) तड़के सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हवाई हमले ने खाड़ी क्षेत्र को हिला दिया. इस हमले से खाड़ी क्षेत्र के दो बड़ी तेल शक्तियों (सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात) के रिश्तों में छिपे तनाव खुलकर सामने आ गया है. हमले के तुरंत बाद यमन में मौजूद सभी अमीराती सेनाओं को देश छोड़ने के लिए कहा गया है. साथ ही रियाद की ओर से सख्त संदेश आया कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एक ‘रेड लाइन’ पर है.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इस हमले पर हैरानी जताई. कुछ ही समय बाद घोषणा की कि वह अपनी सुरक्षा को देखते हुए यमन से अपनी बाकी सेनाओं को भी वापस बुला रहा है. भले ही UAE के इस कदम से अभी सीधे टकराव की आशंका कम हो, लेकिन इस पूरी घटना ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास को और गहरा कर दिया है.
दक्षिण यमन में STC का वर्चस्व
इस ताज़ा संकट की जड़ें दिसंबर की शुरुआत में दिखती हैं। तब UAE समर्थित सदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल (STC) ने दक्षिण यमन में अचानक तेज़ बढ़त बना ली. STC बलों ने बड़े इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया, जिनमें रणनीतिक रूप से अहम हद्रामौत प्रांत भी शामिल है.
STC पहले सऊदी समर्थित यमनी सरकार के साथ मिलकर ईरान समर्थित हाउथी आंदोलन के खिलाफ लड़ने वाले गठबंधन का हिस्सा था. हाउथी अब भी यमन की राजधानी सना और उत्तर-पश्चिम के घनी आबादी वाले हिस्सों पर नियंत्रण रखते हैं. लेकिन STC की दक्षिण में बढ़त ने समीकरण बदल दिए.
सऊदी और यूएई आमने-सामने
दक्षिण में आगे बढ़ते हुए STC बल यमन–सऊदी सीमा के क़रीब पहुंच गए हैं. यह इलाका सऊदी अरब के लिए सिर्फ़ रणनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी अहम है. इसका कारण यह है कि कई प्रमुख सऊदी परिवार अपनी जड़ें इसी क्षेत्र से जोड़ते हैं. इसी वजह से रियाद, इसे अपनी सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मानता है.
इसी कारण से जहां सऊदी अरब और यूएई 2014 से चले आ रहे यमन गृह युद्ध में एक-दूसरे के विरोधी खेमों में खड़े दिखाई देने लगे. दोनों देशों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे यमनी समूहों के साथ बातचीत कर हालात काबू में लाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बावजूद हाल के दिनों में सऊदी गठबंधन ने प्रांत में दो बार हवाई हमले किए हैं.
STC ने सऊदी गठबंधन के उस आह्वान को खारिज कर दिया है, जिसमें उससे कब्ज़ाए गए इलाकों से पीछे हटने को कहा गया था. STC का कहना है कि वह हद्रामौत और पूर्वी महरा प्रांत की सुरक्षा जारी रखेगा.
- यमन के बंदरगाह शहर मुकल्ला पर सऊदी हमले से खाड़ी देशों के बीच बढ़ता टकराव.
- यूएई समर्थित सेना सऊदी अरब से सटे इलाके में आगे बढ़ रही है.
- यूएई ने सऊदी सुरक्षा को कमजोर करने की बात से इनकार किया.
- दोनों देशों के बीच कई मध्य पूर्व मुद्दों पर मतभेद हैं.
- इस हमले को सूडान मुद्दे पर नवंबर की बातचीत से जोड़ा जा रहा है.
तेल, OPEC+ और खाड़ी की स्थिरता पर असर
सऊदी अरब और यूएई के बीच किसी भी तरह का लंबा टकराव पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा. यह क्षेत्र खुद को अशांत मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानता रहा है. दोनों देशों के बीच मतभेद अगर गहराते हैं, तो इसका असर तेल उत्पादन और OPEC+ जैसे मंचों पर आम सहमति बनाने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है.
दोनों देश OPEC+ के अन्य सदस्यों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में बढ़ता तनाव तेल बाजारों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए चिंता का कारण बन सकता है. चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम के मुताबिक, ‘दोनों देशों के रिश्ते कभी आसान नहीं रहे, लेकिन मौजूदा टकराव कई सालों में सबसे अधिक है.’
सूडान पर मतभेद
यमन के अलावा सूडान भी सऊदी – यूएई मतभेदों का बड़ा कारण बनकर उभरा है. सूडान अप्रैल 2023 से गृह युद्ध और गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है. इस संघर्ष पर कूटनीतिक प्रयासों का नेतृत्व उस ‘क्वाड’ ने किया है, जिसमें सऊदी अरब, मिस्र, अमेरिका और यूएई शामिल हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात नहीं सुधरे.
वाशिंगटन की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने यूएई पर सूडान की अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं. यूएई इन आरोपों से इनकार करता रहा है. इसी साल नवंबर में वाशिंगटन में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक में सूडान पर चर्चा हुई थी. खाड़ी सूत्रों के मुताबिक, इसी बैठक को लेकर पैदा हुई गलतफहमी ने यमन में तनाव को और हवा दी.
क्या बातचीत से रास्ता निकालेगी?
यूएई राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार अनवर गर्गश ने हाल ही में कहा कि इस नाज़ुक दौर में बातचीत और राजनीतिक समाधान ज़रूरी हैं. ताकि दोस्ती और गठबंधन बचे रहें. खाड़ी क्षेत्र पहले भी 2017 के कतर संकट जैसी अस्थिरता देख चुका है. वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा तनाव कतर संकट के स्तर तक जाने की संभावना बहुत कम है.
एक अमीराती शिक्षाविद ने कहा, ‘सहयोगी आपस में टकराते हैं, लेकिन अंततः वे अपने मतभेद सुलझाकर साझा हितों पर आगे बढ़ते हैं.’ सवाल यही है कि क्या सऊदी अरब और यूएई भी इस बार वही रास्ता चुनेगा या यह दरार खाड़ी राजनीति को नई दिशा देगी.
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