Special Coverage
Syria Civil War: चार साल, चार देशों में तख्तापलट, राष्ट्राध्यक्षों को दूसरे देशों में लेना पड़ा शरण
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Monday, December 9, 2024
Last Updated On: Monday, December 9, 2024
साल 2021 से अब तक सीरिया सहित चार देशों में तख्तापलट हुआ है। इनमें से तीन भारत के पड़ोसी देश हैं। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान ने तख्तापलट किया था। उसके बाद श्रीलंका में आर्थिक सकंट से जूझ रहे आम लोगों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्ज़ा कर लिया।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Monday, December 9, 2024
इसी साल अगस्त में बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ था। तख्तापलट के बाद ढाका के प्रधानमंत्री हाउस में लूटपाट किया गया। चार महीने बाद लगभग वही तस्वीर सीरिया से आ रही है। सीरिया में करीब एक सप्ताह से चल रहे विद्रोह के बाद वहां तख्तापलट हो गया। राष्ट्रपति बशर-अल-असद को परिवार के साथ देश से भागना पड़ा। उनके राष्ट्रपति भवन छोड़ते ही आम लोग वहां घुस गए। राष्ट्रपति भवन में खूब उत्पात मचाया। वहां लूटपाट किया। सिर्फ राष्ट्रपति भवन ही नहीं सीरिया के सेन्ट्रल बैंक को भी लोगों ने लुटा। नोटों की गड्डी के बंडल और कार्टन सड़कों पर दिखे।
चार साल चार देशों में तख्तापलट
साल 2021 से अब तक सीरिया सहित चार देशों में तख्तापलट हुआ है। इनमें से तीन भारत के पड़ोसी देश हैं। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान ने तख्तापलट किया था। उसके बाद श्रीलंका में आर्थिक सकंट से जूझ रहे आम लोगों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्ज़ा कर लिया। श्रीलंका के बाद बांग्लादेश में इसी साल अगस्त महीने में तख्तापलट हुआ है। इन चारों देश में अफगानिस्तान के अलावा सभी में तख्तापलट के बाद खूब लूटपाट मचाया गया।
सीरियाई राष्ट्रपति भागे रूस
विद्रोह के बाद सीरिया में तख्तापलट हो गया है। तख्तापलट के बाद राष्ट्रपति असद को देश छोड़कर भागना पड़ा। वे अपने परिवार के साथ रूस भागे। रूस ने भी उन्हें परिवार के साथ शरण दे दी। राष्ट्रपति असद को शरण देते हुए रूस ने इसे मानवीय आधार बताया।
अफगानिस्तान में तख्तापलट
वर्ष 2021 में अफगानिस्तान में राष्ट्रपति अशरफ गनी का तख्तापलट तालिबानियों ने किया था। उस समय अमेरिकी फौज अफगानिस्तान छोड़ रहे थे। उनके अफगानिस्तान छोड़ते ही तालिबानियों ने अफगानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया। उस वक्त आफगानिस्तान के राष्ट्रपति गनी को देश छोड़कर भागना पड़ना, तब चर्चा में थी कि उन्होंने ताजिकिस्तान में शरण लिये हैं। लेकिन बाद में स्पष्ट किया गया कि गनी ने अपने परिवार के साथ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में शरण लिये हैं। यूएई ने उन्हें मानवीय आधार पर उनके परिवार सहित अपने देश में शरण दिया।
दो साल पूर्व श्रीलंका में तख्तापलट
वर्ष 2022 में आर्थिक संकट के कारण तख्तापलट हुआ था। तब श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे थे। आर्थिक संकट के कारण आम लोगों में सरकार के प्रति काफी गुस्सा था। वहां महंगाई, बेरोजगारी चरम पर था। तख्तापलट से पहले कई दिनों तक आम लोगों ने कोलंबो में उग्र आंदोलन किया। फिर गुस्साई आम जनता ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया। उसके बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा। तब उग्र आन्दोलनकारियों ने राष्ट्रपति भवन में घुसकर तोड़फोड़ की थी। काफी उत्पात मचाया था। प्रदर्शनकारियों ने भी वहां लूटपाट किया।
अगस्त में शेख हसीना हुईं पदच्युत
इसी साल बांग्लादेश में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को भी तख्तापलट का शिकार होना पड़ा। आरक्षण को लेकर बांग्लादेश में हो रहे आंदोलन ने कुछ दिनों के बाद ही उग्र रूप ले लिया था। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि सेना को प्रधानमंत्री हाउस जाकर शेख हसीना को देश छोड़ने के लिए कहना पड़ा। सेना अध्यक्ष ने शेख हसीना को देश छोड़ने के लिए 45 मिनट का समय दिया।
कहा जाता है कि भारत ने शेख हसीना को बांग्लादेश से निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था। उनके प्रधानमंत्री आवास छोड़ते ही, भीड़ पीएम हाउस में घुसकर खूब लूटपाट किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई फुटेज वायरल हुए थे, जिनमें प्रदर्शनकारियों को पीएम हाउस के बेडरूम में आराम करते देखा गया। सामान लूटते भी देखा गया। तब से शेख हसीना अपनी बहन के साथ भारत में शरण लिए हुए हैं।














