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Gout Treatment : पंचकर्म चिकित्सा से मिल सकता है लाभ, एक्सपर्ट
Authored By: स्मिता
Published On: Saturday, December 14, 2024
Last Updated On: Friday, December 13, 2024
जो लोग मांस, शराब और हाई प्रोटीन आहार का सेवन करते हैं, वे भी गाउट का शिकार होते हैं। असंतुलित आहार-विहार, व्यायाम एवं परिश्रम न करना भी इस रोग को बढ़ावा देता है। इसमें दवाओं से ज्यादा जीवनशैली में बदलाव अधिक कारगर है।
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Friday, December 13, 2024
मीडिया, बैकिंग सेक्टर, कॉल सेंटर, स्टॉक एक्सचेंज सहित बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में घंटों एक ही पोज में बैठे-बैठे कम्प्यूटर और लैपटाप, मोबाइल पर काम करने वाले लोग एक प्रकार की जोड़ों की बीमारी ‘गाउट’ का शिकार हो रहे है। इसमें कमर,गर्दन और रीढ़ की हड्डियों के साथ पैर या हाथ के अंगूठे में अचानक दर्द शुरू हो जाता है। इसमें जोड़ो का अकड़ जाना,जोड़ में सूजन आना,प्रभावित क्षेत्र में लालिमा दिखना ‘गाउट’ का लक्षण है। रोग बढ़ने पर पीड़ित व्यक्ति को काम करना कठिन हो जाता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ पंचकर्म चिकित्सा भी इसमें राहत (Gout Treatment) पहुंचा सकती है।
क्यों होता है गाउट (Gout cause)
आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, वाराणसी के कायचिकित्सा पंचकर्म विभाग के रीडर और चिकित्सक डॉ. मनीष मिश्र ने बताया, ‘वातरक्त (गाउट) के लिए अनियमित खान—पान और एकसमान कार्यशैली है। गाउट जोड़ों में यूरिक एसिड से बने क्रिस्टल के जमा होने पर होता है।’ उन्होंने बताया कि गठिया दो सौ प्रकार का होता है। इसमें मुख्यत: संधिवात है। इसमें उम्र फैक्टर खास तौर पर बुढ़ापे की गठिया है। मध्यम आयु वर्ग में आम वात गठिया होती है। इसमें शरीर के छोटे—छोटे जोड़ वात से प्रभावित हो जाते है। इसके बाद वातरक्त गठिया, जिसे ‘गाउट’ कहा जाता है। आयुर्वेद में इस ‘वातरक्त’ बीमारी का उल्लेख और उपचार है।
शुगर और हाई बीपी भी कारण (Sugar and High BP)
शुगर, हाइपरटेंशन, मोटापे से भी गठिया होती है। जो लोग मांस, शराब और हाई प्रोटीन आहार का सेवन करते हैं, वे भी इसका शिकार होते हैं। डॉ. मनीष मिश्र के अनुसार, असंतुलित आहार-विहार, व्यायाम एवं परिश्रम न करना भी इस रोग को बढ़ावा देता है। इसमें दवाओं से ज्यादा जीवनशैली में बदलाव अधिक कारगर है।
पंचकर्म और आयुर्वेदिक औषधि से इलाज (Gout Treatment)
बीमारी के अधिक बढ़ने पर पंचकर्म, व्यायाम के साथ आयुर्वेदिक औषधि मरीज को दी जाती है। डॉ. मनीष मिश्र ने बताया, ‘ ‘गाउट’ के मरीजों को आयुर्वेद की औषधि योगराज गुग्गुल, कचनार गुग्गुल, कैशोर गुग्गुल, त्रयोदशांग गुग्गुल, महामंजिष्ठादी क्वाथ आदि दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर भर्ती कर पंचकर्म चिकित्सा दी जाती है। उन्होंने बताया कि मरीजों को शुगर नियंत्रित रखने, अधिक तीखे-चटपटे, गरम खट्टे, चिकने पदार्थ, मद्य-मांस का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।’
क्रिस्टल के रूप में यूरिक एसिड (Uric Acid)
अत्यधिक प्रोटीन युक्त, गलत और दूषित खान पान से खून में जब यूरिक एसिड एवं सोडियम यूरेट्स की मात्रा अधिक बढ़ जाती है, तब ये तत्व जोड़ों के खाली स्थानों में, कोमल ऊतकों में क्रिस्टल के रूप में जमने लगते हैं। यूरिक एसिड के अधिक इकटठे होने के कारण शरीर के जोड़ों, संधियों आदि में दर्द एवं जकडऩ होने लगती है। गाउट का आरंभ मुख्य रूप से छोटी अस्थि-संधियों तथा विशेष रूप से पैर के अंगूठे की संधि से होता है।
बचाव के उपाय (Gout Prevention)
इससे बचने के लिए लहसुन, अदरक, जीरा, सौंफ़, धनिया, इलायची और दालचीनी का उपयोग करना चाहिए। साथ ही शरीर के वजन को नियंत्रित करने के लिए व्यायाम करें और संतुलित आहार लें।
(हिन्दुस्थान समाचार के इनपुट के साथ)
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