दिल्लीवालों सावधान! पंजाब की पराली करेगी आपका जीना हराम

Authored By: सतीश झा

Published On: Tuesday, September 30, 2025

Last Updated On: Tuesday, September 30, 2025

Delhi Pollution Alert: पंजाब की पराली जलाने से दिल्ली में प्रदूषण बढ़ेगा, सांस लेने में दिक्कत और स्वास्थ्य पर असर पड़ने का खतरा.
Delhi Pollution Alert: पंजाब की पराली जलाने से दिल्ली में प्रदूषण बढ़ेगा, सांस लेने में दिक्कत और स्वास्थ्य पर असर पड़ने का खतरा.

दिल्ली-NCR की हवा एक बार फिर जहरीली होने की ओर बढ़ रही है. पंजाब में पराली जलाने के अब तक 45 मामले सामने आ चुके हैं और यह संख्या आने वाले दिनों में तेजी से बढ़ सकती है. हर साल की तरह इस बार भी पराली जलाने का धुआं दिल्ली की सांसें भारी करने वाला है. पंजाब और हरियाणा के खेतों से उठता धुआं दिल्ली की आबोहवा में घुलकर इसे गैस चेंबर में बदल देता है, दिल्ली पहले से ही धूल, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक धुएं से जूझ रही है, ऊपर से पराली का कहर इसे और भयावह बना देता है. नतीजा यह कि अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं रह जाती.

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Tuesday, September 30, 2025

Delhi Pollution Alert: सरकारें हर बार दावे करती हैं कि पराली जलाने पर सख्ती बरती जाएगी, किसानों को विकल्प दिए जाएंगे, लेकिन हकीकत में हालात जस के तस हैं. हर साल यही सिलसिला दोहराया जाता है – किसान मजबूरी में पराली जलाते हैं, राज्य सरकारें सिर्फ कागज़ी आदेश जारी करती हैं. दिल्ली-NCR के करोड़ों लोग खामियाजा भुगतते हैं. बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए यह प्रदूषण किसी आपदा से कम नहीं.

पराली जलाने के 45 मामले, 22 स्थानों पर आग की पुष्टि

पंजाब में पराली जलाने के मामलों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. 15 सितंबर से 27 सितंबर तक पराली जलाने के कुल 45 मामले सामने आए, जिनमें से जांच के बाद केवल 22 स्थानों पर आग लगने की पुष्टि हुई है. पर्यावरण इंजीनियर सुखदेव सिंह ने बताया कि जिन 22 स्थानों पर आग लगने की पुष्टि हुई है, वहां पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया है. नुकसान की भरपाई की गई है और एफआईआर दर्ज की गई है. साथ ही रेड एंट्रीज़ भी दर्ज की गई हैं.

इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकार पराली जलाने के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थायी समाधान के लिए किसानों को व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है.

पिछले साल से कम पराली जलाने के मामले

पंजाब में पराली जलाने के मामलों को लेकर इस बार रुझान कुछ अलग नजर आ रहे हैं. 15 सितंबर से 27 सितंबर तक इस बार पराली जलाने के 45 मामले सामने आए हैं. वहीं, पिछले साल इसी अवधि में ऐसे 59 मामले दर्ज किए गए थे. पिछले साल 15 से 27 सितंबर के बीच कुछ दिनों तक बारिश हुई थी, जिसके चलते मिट्टी गीली रहने से आग कम लगी. लेकिन इस बार 15 से 27 सितंबर तक पूरे दिन सूखा मौसम रहा. इसके बावजूद मामलों की संख्या पिछले साल की तुलना में कम है.

बढ़ी हुई कटाई से चिंता बरकरार

इस बार फसल उत्पादन भी अधिक है। पिछले साल 20% कटाई 30 सितंबर तक पूरी हुई थी, जबकि इस बार यह कटाई 24 सितंबर तक पूरी हो चुकी है. यानी कटाई का काम ज्यादा हुआ है, लेकिन पराली जलाने के मामले अपेक्षाकृत कम दर्ज किए गए हैं. गौरतलब है कि पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों में पराली जलाना लंबे समय से एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय रहा है. इसका धुआं न सिर्फ वायु प्रदूषण को बढ़ाता है, बल्कि सर्दियों के महीनों में कोहरे के साथ मिलकर स्मॉग का रूप ले लेता है, जिससे आमजन को गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का सामना करना पड़ता है.

पराली पर सख्ती, अमृतसर में नियंत्रण कक्ष से होगी रियल-टाइम निगरानी

पंजाब सहित पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण माना जाता है. इसी खतरे को देखते हुए पंजाब सरकार ने पराली पर अंकुश लगाने के लिए एक विशेष जागरूकता और सहायता अभियान की शुरुआत की है. इस पहल के तहत रविवार को अमृतसर में एक समर्पित नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जो पराली जलाने की घटनाओं की रियल-टाइम निगरानी करेगा. यह नियंत्रण कक्ष उपग्रह डेटा की मदद से उन इलाकों की पहचान करेगा जहाँ पराली जलाई जा रही होगी और तुरंत संबंधित उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) को सूचित करेगा. जानकारी मिलते ही, एसडीएम उस क्षेत्र में किसानों को पराली न जलाने की सलाह देने के लिए टीम भेजेंगे और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी करेंगे.

राजनीति और जुबानी जमाखर्च से निकालकर जमीन पर ठोस कदम उठाए जाएं

सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए किसानों को पराली प्रबंधन के टिकाऊ तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है. इसके तहत किसानों को जैव-अपघटक और मशीनी उपकरणों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. साथ ही, पराली जलाने पर सख्त प्रतिबंध भी लागू है. जरूरत है कि इस समस्या को राजनीति और जुबानी जमाखर्च से निकालकर जमीन पर ठोस कदम उठाए जाएं. वरना दिल्लीवालों का जीना सचमुच हर साल कुछ महीनों के लिए दूभर बना रहेगा.

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About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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