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कौन कहां से चुनावी मैदान में? भाकपा (माले) की चौंकाने वाली 20 उम्मीदवारों की घोषणा
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, October 18, 2025
Last Updated On: Saturday, October 18, 2025
Bihar Assemby Election 2025: भाकपा (माले) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए 20 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें भोजपुर से धनंजय, दरौली से सत्यदेव राम, वारिसनगर से फूलबाबू सिंह और आरा से कयूमुद्दीन अंसारी शामिल हैं. पहली और दूसरी चरण की वोटिंग के अनुसार पार्टी ने सावधानीपूर्वक उम्मीदवार चुने हैं. यह कदम माले की राज्यव्यापी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और महागठबंधन में अपनी भूमिका मजबूत करने की रणनीति को दर्शाता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, October 18, 2025
Bihar Election 2025: 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां चरम पर हैं, और इस बीच भाकपा (माले / CPI-ML) ने राज्य में अपनी दावेदारी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है – यानी 20 उम्मीदवारों की सूची जारी करना. यह सूची यह संकेत देती है कि माले न केवल कुछ सीमित क्षेत्रों में लड़ना चाहता है, बल्कि पूरे राज्य में अपनी पहुंच बढ़ाने का इच्छुक है.
यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि अभी महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं जारी हैं. ऐसे समय में जब गठबंधन के अंदर सामंजस्य और मतभेद दोनों साथ-साथ दिख रहे हैं, माले की इस घोषणा ने राजनीतिक पारा और तेज कर दिया है.
उम्मीदवारों की झलक: कौन-कौन से सीटों पर टिकट मिला?
नीचे तालिका में राज्य के विभिन्न विधानसभ क्षेत्रों को पहले और दूसरे चरण की वोटिंग के आधार पर माले ने किन उम्मीदवारों को टिकट दिया है, वह दर्शाया गया है.
| विधानसभा क्षेत्र (सीट) | उम्मीदवार |
|---|---|
| भोर | धनंजय |
| जिर्देई | अमरजीत कुशवाहा |
| दरौली | सत्यदेव राम |
| दरोंडा | अमरनाथ यादव |
| कल्याणपुर | रंजीत कुमार राम |
| वारिसनगर | फूलबाबू सिंह |
| राजगीर | बिश्वनाथ चौधरी |
| दीघा | दिव्या गौतम |
| फुलवारी | गोपाल रविदास |
| पालीगंज | संदीप सौरव |
| आरा | कयूमुद्दीन अंसारी |
| अगियौन | शिव प्रकाश रंजन |
| तरारी | मदन सिंह |
| दुमरांव | अजीत कुमार सिंह |
| सिकटा | वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता |
| पीपरा | अनिल कुमार |
| बलरामपुर | महबूब आलम |
| कराकट | अरुण सिंह |
| अरवल | महानंद सिंह |
| घोसी | राम बली सिंह यादव |
टीप: इस सूची में कुछ सीटों पर पहले जारी सूची वापस लेने की घटनाएं मीडिया में भी आई हैं, क्योंकि माले ने अपनी पहली 18 उम्मीदवारों की सूची को बाद में वापस ले लिया था.
सूची वापस लेने की राजनीति: क्यों हुआ यह विवाद?
माले ने 18 उम्मीदवारों की एक सूची तो जारी की थी, लेकिन थोड़ी ही देर में उसने उस सूची को वापस ले लिया. उसका तर्क था – “गठबंधन के भीतर अभी भी कई सीटों पर बातचीत लंबित है, इसलिए अंतिम सूची बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा की जाएगी.”
इस घटना से ये बातें सामने आती हैं:
- गठबंधन दबाव: माले को महागठबंधन के अन्य दलों, खासकर राजद, कांग्रेस और वीआईपी, के साथ तालमेल बनाए रखना है. बिना सहमति सूची जारी करना गठबंधन गठरी को खटका दे सकता है.
- रणनीतिक रची-बसी: सूची वापस लेने का अर्थ यह भी लिया जा सकता है कि माले ने अपनी दावेदारी को अधिक सीटों तक बढ़ाने की कोशिश की हो, और वह चाहते हैं कि उनकी हिस्सेदारी अन्य दल स्वीकार करें.
- राजनीतिक संकेत: सूची वापस लेना यह बताता है कि आज की राजनीति में घोषणाएं सावधानी से करनी हों, यदि गठबंधन में दरार आ जाए तो नुकसान ऊपर चढ़ सकता है.
कुछ आकर्षक नाम: कौन बन रहा चेहरा?
इस सूची में कुछ नाम ऐसे हैं जो सामान्य मतदाताओं के लिए पहले से परिचित हो सकते हैं:
- दिव्या गौतम – दीघा से उम्मीदवार घोषित हुईं, एवं मीडिया में सुशांत सिंह राजपूत की बहन होने की चर्चा रही है.
- कयूमुद्दीन अंसारी – आरा से मैदान में उतारे गए हैं.
- अरुण सिंह – कराकट सीट पर माले द्वारा चुने गए उम्मीदवारों में शामिल.
इन नामों को इसलिए भी देखा जा रहा है कि वे बेहतर जनसंवेदन और पहचान लेकर मैदान में उतर रहे हैं, जो माले को व्यापक मत हासिल करने में सहायक हो सकते हैं.
चुनौतियां और असर: माले की राह आसान नहीं
- सीट बंटवारा विवाद: महागठबंधन में सीटें बांटना एक जटिल प्रक्रिया है. यदि माले को संतोषजनक हिस्सेदारी न मिले, तो सूची वापस लेना जैसी स्थिति पैदा हो जाती है.
- प्रतिस्पर्धा का दबाव: एनडीए पक्ष और अन्य बड़े दल वर्षों से बिहार में मजबूत पैठ बनाए हुए हैं. माले को छोटे दलों की तरह मुकाबला करना होगा, और स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ बनानी होगी.
- संवेदनशीलता और पहचान: माले की विचारधारा व कम्युनिस्ट आधार इसे कुछ क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाती है, लेकिन सामाजिक-जातीय समीकरण, मतदाताओं की अपेक्षाएं और स्थानीय मुद्दे इस पार्टी को चुनौती देंगे.
- प्रकाशन और बदलाव: सूची वापस लेना यह दर्शाता है कि अंतिम स्थिति तक उम्मीदवारों की सूची बदल भी सकती है. लेखन या रिपोर्टिंग में यह लचीलापन बनाए रखना ज़रूरी है.
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