BJP National President Election : BJP का कब चुना जाएगा अध्यक्ष? कैसे होता है राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव, जानिए पूरी प्रक्रिया

Authored By: Nishant Singh

Published On: Friday, January 16, 2026

Last Updated On: Friday, January 16, 2026

BJP National President Election: जानें राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कब और कैसे होता है, पूरी प्रक्रिया और अहम जानकारियां.
BJP National President Election: जानें राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कब और कैसे होता है, पूरी प्रक्रिया और अहम जानकारियां.

BJP National President Election : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संगठन की सोच, रणनीति और भविष्य की राजनीति को दर्शाने वाला अहम पड़ाव होता है. यह चुनाव पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था, अनुशासन और विचारधारा के संतुलन को सामने लाता है. संगठनात्मक स्तरों से गुजरती यह प्रक्रिया दिखाती है कि नेतृत्व किस तरह सहमति, अनुभव और संगठनात्मक मजबूती के आधार पर उभरता है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Friday, January 16, 2026

BJP National President Election: भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. पार्टी की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसके अनुसार 19 जनवरी को दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक नामांकन की प्रक्रिया होगी. इसके बाद 20 जनवरी को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी. इसी दिन बीजेपी मुख्यालय में अध्यक्ष पद का विधिवत कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह जैसे कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे. ऐसे में आम लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष आखिर चुना कैसे जाता है.

क्या चुनाव आयोग कराता है बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव?

अक्सर लोगों को लगता है कि पार्टी अध्यक्ष का चुनाव भी चुनाव आयोग की निगरानी में होता होगा, लेकिन सच्चाई इससे अलग है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भारत के चुनाव आयोग द्वारा नहीं कराया जाता. यह पूरी तरह पार्टी का आंतरिक संगठनात्मक चुनाव होता है, जो बीजेपी के अपने संविधान के तहत संपन्न किया जाता है. चुनाव आयोग की भूमिका केवल लोकसभा, विधानसभा और संवैधानिक पदों से जुड़े चुनावों तक सीमित रहती है. राजनीतिक दलों के अंदरूनी चुनाव उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते.

कौन बन सकता है बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष?

बीजेपी का संविधान राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए कड़े नियम तय करता है. किसी भी व्यक्ति का कम से कम 15 साल तक पार्टी का प्राथमिक सदस्य होना जरूरी है. इसके अलावा उसे चार कार्यकाल तक सक्रिय सदस्य के रूप में काम किया होना चाहिए. सक्रिय सदस्य वही माना जाता है, जो लगातार कम से कम तीन वर्षों से संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लेता रहा हो. हालांकि पार्टी ने कुछ पदों पर समय-समय पर अपवाद किए हैं, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे सर्वोच्च संगठनात्मक पद के लिए नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है.

नीचे से ऊपर तक बनता है संगठन

बीजेपी में चुनाव की प्रक्रिया नीचे से ऊपर की ओर चलती है. सबसे पहले बूथ और प्राथमिक समितियों का गठन होता है. इसके बाद मंडल स्तर, जिला स्तर और फिर प्रदेश स्तर पर संगठन तैयार किया जाता है. प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव उसी राज्य के निर्वाचन मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें उस राज्य की विधानसभा सीटों के बराबर सदस्य होते हैं. इस प्रक्रिया में महिलाओं और आरक्षित वर्गों को प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य माना जाता है, ताकि संगठन संतुलित और समावेशी बने.

राष्ट्रीय परिषद की अहम भूमिका

प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के साथ-साथ राष्ट्रीय परिषद का गठन भी किया जाता है. यही राष्ट्रीय परिषद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करती है. राष्ट्रीय परिषद में देश की लोकसभा सीटों के बराबर सदस्य शामिल होते हैं. यदि किसी स्तर पर महिलाओं या आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व पूरा नहीं हो पाता, तो समायोजन किया जाता है. पार्टी के नियमों के अनुसार, जब तक कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे नहीं हो जाते, तब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती.

नामांकन, प्रस्ताव और सर्वसम्मति की परंपरा

राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार का नाम कम से कम पांच राज्यों की राष्ट्रीय परिषद इकाइयों द्वारा प्रस्तावित किया जाना जरूरी होता है. इसके साथ ही उम्मीदवार की लिखित सहमति भी ली जाती है. बीजेपी में आमतौर पर इस पद के लिए सर्वसम्मति बनाने की परंपरा रही है, ताकि चुनाव निर्विरोध और औपचारिक रूप से संपन्न हो. यही वजह है कि अधिकतर मामलों में मुकाबला देखने को नहीं मिलता.

आरएसएस की भूमिका कितनी अहम है?

बीजेपी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक राजनीतिक इकाई माना जाता है. हालांकि पार्टी के संविधान में आरएसएस की कोई औपचारिक भूमिका तय नहीं है, लेकिन व्यवहार में संघ की राय को काफी महत्व दिया जाता है. प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बड़े संगठनात्मक फैसलों में बीजेपी नेतृत्व और आरएसएस के बीच विचार-विमर्श होता है. पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री परंपरागत रूप से आरएसएस से आते रहे हैं, जिससे दोनों संगठनों के बीच समन्वय बना रहता है. यही तालमेल बीजेपी के अध्यक्ष चयन में भी अहम भूमिका निभाता है.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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