मुख्यमंत्री का कार्यालय है, गुंडागर्दी का अड्डा नहीं ! क्यों सुप्रीम कोर्ट को करनी पड़ी ऐसी टिप्पणी

Authored By: सतीश झा

Published On: Thursday, August 1, 2024

comment of supreme court on delhi government in Swati Maliwal case
comment of supreme court on delhi government in Swati Maliwal case

एक ओर जनता के रडार पर दिल्ली सरकार है, तो दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी से भी उसका सामना हो रहा है। स्वाति मालिवाल वाले केस में सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री का कार्यालय कोई गुंडागर्दी का अड्डा नहीं होता है।

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Thursday, August 1, 2024

दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल में है। बारिश ने पूरी दिल्ली की व्यवस्था को चरमरा दिया है। बीते दिन दिल्ली-एनसीआर में जाम की कहानी पूरी दुनिया ने देखी और सुनी। इसके बीच जब सुप्रीम कोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय और वहां की व्यवस्था को लेकर तल्ख टिप्पणी करें, तो स्थिति असहज हो जाती है।

क्यों कहा सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी विभव कुमार को लेकर कड़ी टिप्पणी की, जो आप की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर हमले के आरोपी हैं। अदालत ने कहा कि वह इस घटना से “स्तब्ध” है और एक “गुंडे” के मुख्यमंत्री के आवास में घुसकर मालीवाल पर हमला करने के आचरण को लेकर सवाल उठाए। पीठ ने इस मामले पर चिंता जताते हुए पूछा, “क्या मुख्यमंत्री का बंगला एक निजी आवास है? क्या ऐसे गुंडों को रखने के लिए उस कार्यालय की आवश्यकता है? क्या ऐसा ही होता है? हम हैरान हैं। सवाल यह है कि यह कैसे हुआ।”

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई की, जो दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी। उच्च न्यायालय ने विभव कुमार की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, और इससे पहले मई में दिल्ली की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने भी उनकी जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया था।

वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दिया अपना ये तर्क

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने विभव कुमार की ओर से पेश होकर अदालत को एमएलसी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें चोटों को गैर-खतरनाक और साधारण बताया गया है। रिपोर्ट में उल्लेखित चोटें दाहिने गाल पर और बाएं पैर के ऊपर दो निशानों के रूप में दर्ज हैं। घटना 13 मई को घटी थी और एफआईआर 16 मई को दर्ज की गई थी, जिसके बारे में कहा गया कि एफआईआर की कहानी अजीब है और पहले दिन पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

इस पर अदालत ने प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि घटना के तुरंत बाद की गई आपातकालीन कॉल के बारे में क्या कहा जा सकता है। अदालत ने कहा कि अगर किसी पर हमला हुआ है और वह आपातकालीन नंबर पर कॉल कर रहा है, तो उसे उचित सहायता मिलनी चाहिए थी। पीठ ने कहा कि अदालत को कॉन्ट्रैक्ट किलर और हत्यारों को भी जमानत देने का अनुभव है, लेकिन इस मामले में नैतिकता की गंभीरता पर ध्यान देना जरूरी है।

दिल्ली सरकार पर सांसद मनोज तिवारी ने लगाया ये आरोप

भाजपा नेता  सांसद मनोज तिवारी  ने कहा, “दिल्ली को अरविंद केजरीवाल की सरकार ने लोगों के लिए सबसे खतरनाक जगह बना दिया है। दिल्ली में एक ऐसी सरकार बैठ गई है जिसे कोई काम से मलतब नहीं है। उनको बस दाम से मतलब है कि कैसे उन्हें पैसा मिले और कैसे भ्रष्टाचार करने का मौका मिले…समाधान इसका ये है कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार को हटाया जाए और पीएम मोदी के नेतृत्व में यहां पर सरकार बने। यहां पर भाजपा को लाया जाए।”

About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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