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General MM Naravanes Book: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब पर लगी रोक, गलवान झड़प और संवेदनशील जानकारी ने मचाया बवाल, जानें पूरा मामला
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, February 3, 2026
Last Updated On: Tuesday, February 3, 2026
पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा ‘फॉर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर रक्षा मंत्रालय ने रोक लगा दी है. किताब में 2020 की गलवान घाटी झड़प, चीन के साथ डिसएंगेजमेंट और प्रधानमंत्री व मंत्रियों के साथ हुई बातचीत जैसी संवेदनशील जानकारी शामिल है. ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत प्रकाशन के लिए ड्राफ्ट की मंजूरी जरूरी है. अभी तक मंत्रालय और सेना ने हरी झंडी नहीं दी.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, February 3, 2026
General MM Naravanes Book: पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘फॉर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ अचानक सुर्खियों में तब आई, जब इसकी छपाई पर रोक लगा दी गई. सवाल उठा कि आखिर जिस व्यक्ति ने भारतीय सेना की कमान संभाली, उसी की किताब पर सेना और सरकार ने ब्रेक क्यों लगा दिया? यह मामला सिर्फ एक किताब का नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, गोपनीयता और सैन्य रणनीति से जुड़ा है. संसद से लेकर मीडिया तक इस पर बहस शुरू हो गई और आम लोगों के मन में भी कई सवाल पैदा हो गए.
गलवान घाटी और किताब की सबसे बड़ी वजह
जनरल नरवणे 2020 में उस वक्त सेना प्रमुख थे, जब भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी. 15-16 मई 2020 की इस घटना में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे. अपनी किताब में जनरल नरवणे ने न सिर्फ इस झड़प का जिक्र किया, बल्कि चीन के साथ हुए डिसएंगेजमेंट समझौते और सीमा विवाद को सुलझाने की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से लिखा. यही जानकारी सरकार और सेना के लिए चिंता का कारण बन गई.
प्रधानमंत्री से NSA तक, हर बातचीत का जिक्र
इस किताब में जनरल नरवणे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल से हुई बातचीत और बैठकों का सिलसिलेवार उल्लेख किया है. इसके अलावा कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और चाइना स्टडी ग्रुप (CSG) की बैठकों का भी जिक्र मौजूद है. इतना ही नहीं, अपने मातहत कमांडरों को दिए गए निर्देश और ऑपरेशनल फैसले भी किताब का हिस्सा हैं. यही संवेदनशील विवरण रक्षा मंत्रालय को असहज कर गया.
ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट बना सबसे बड़ा रोड़ा
दरअसल, जनरल नरवणे की किताब पर रोक की सबसे बड़ी वजह है ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट, 1923. इस कानून के तहत कोई भी वर्तमान या पूर्व सैन्य अधिकारी बिना अनुमति अपने विभाग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकता. वर्ष 2021 में इस कानून को और सख्त कर दिया गया था. नियमों के मुताबिक, किताब छापने से पहले ड्राफ्ट को सरकार और संबंधित विभाग से मंजूरी मिलना जरूरी है, जो अब तक नहीं मिल पाई.
पूर्वी लद्दाख विवाद और समय की संवेदनशीलता
अक्टूबर 2023 में जब किताब के कुछ अंश सामने आए, तब पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था. अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच डिसएंगेजमेंट समझौता जरूर हुआ, लेकिन एलएसी पर डिएस्कलेशन और सैनिकों की संख्या घटाने की प्रक्रिया अभी बाकी है. ऐसे माहौल में किसी भी तरह की सैन्य या रणनीतिक जानकारी सार्वजनिक करना सरकार को जोखिम भरा लगा.
दुश्मन के लिए ‘जानकारी’ बन सकती है हथियार
सरकार की चिंता यह भी है कि इस किताब से चीन या पाकिस्तान यह समझ सकते हैं कि युद्ध जैसी स्थिति में भारत की राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व कैसे प्रतिक्रिया देता है, फैसले कितनी जल्दी लिए जाते हैं और रणनीतिक सोच क्या होती है. ठीक यही वजह है कि 1962 युद्ध से जुड़ी हेंडरसन-ब्रुक्स रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई. सेना की फॉरवर्ड मूवमेंट और रणनीति अगर बाहर आई, तो वह दुश्मन के लिए बड़ा हथियार बन सकती है.
पहले भी लिखी गई हैं किताबें, फिर बवाल क्यों?
यह पहली बार नहीं है जब किसी पूर्व थलसेना प्रमुख ने किताब लिखी हो. जनरल वीके सिंह और जनरल वीपी मलिक की किताबें पहले प्रकाशित हो चुकी हैं. फर्क बस इतना है कि उन किताबों के समय देश किसी सक्रिय सीमा विवाद या संवेदनशील सैन्य स्थिति से नहीं गुजर रहा था. यही वजह है कि ‘फॉर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ आज भी रक्षा मंत्रालय और सेना की मंजूरी का इंतजार कर रही है.
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