Grahan 2026: साल 2026 में कब-कब लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण? एक नज़र में जानिए पूरी जानकारी

Authored By: Nishant Singh

Published On: Friday, February 6, 2026

Last Updated On: Friday, February 6, 2026

Grahan 2026 में सूर्य और चंद्र ग्रहण की तारीखें, समय और प्रकार की संक्षिप्त जानकारी.
Grahan 2026 में सूर्य और चंद्र ग्रहण की तारीखें, समय और प्रकार की संक्षिप्त जानकारी.

Grahan 2026: साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज़ से बेहद खास रहने वाला है. इस दौरान सूर्य और चंद्रमा से जुड़े चार बड़े ग्रहण देखने को मिलेंगे. विज्ञान जहां इसे खगोलीय प्रक्रिया मानता है, वहीं भारतीय परंपराओं में ग्रहण का धार्मिक महत्व भी है. लेख में ग्रहण के प्रकार, भारत में दृश्यता, सूतक काल और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी जरूरी जानकारियों को आसान और स्पष्ट भाषा में समझाया गया है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Friday, February 6, 2026

Grahan 2026: साल 2026 खगोल विज्ञान और धार्मिक मान्यताओं दोनों के लिहाज़ से बेहद खास माना जा रहा है. इस साल आसमान में चार बार ग्रहण लगेंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं. विज्ञान के अनुसार ग्रहण सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की आपसी स्थिति का स्वाभाविक परिणाम है, लेकिन भारतीय संस्कृति में इसे एक संवेदनशील काल माना जाता है. इसी वजह से लोग ग्रहण की तारीख, समय, भारत में दृश्यता और सूतक काल को लेकर पहले से जानकारी जुटाना चाहते हैं. अगर आपके मन में भी यही सवाल हैं, तो यह लेख आपके लिए पूरी तरह मददगार है.

2026 में कुल कितने ग्रहण लगेंगे?

ग्रहण कैलेंडर 2026 के अनुसार, इस साल कुल चार ग्रहण देखने को मिलेंगे. इनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे. हालांकि, इनमें से सभी ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे. भारत में केवल दोनों चंद्र ग्रहण दिखाई देंगे, जबकि सूर्य ग्रहण भारत से बाहर ही रहेंगे. यही वजह है कि सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा, लेकिन चंद्र ग्रहण के समय सावधानियां बरतनी होंगी.

  • कुल ग्रहण: 4
  • सूर्य ग्रहण: 2
  • चंद्र ग्रहण: 2
  • भारत में दिखने वाले ग्रहण: 2 (केवल चंद्र ग्रहण)

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण – 17 फरवरी

साल 2026 की शुरुआत 17 फरवरी को पहले सूर्य ग्रहण से होगी. यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा. जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है और सूर्य के सामने आ जाता है, तो वह सूरज को पूरी तरह ढक नहीं पाता. ऐसे में सूर्य के चारों ओर आग की अंगूठी जैसी आकृति बनती है, जिसे “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है. यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा. यह खगोलीय घटना पश्चिम एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखी जा सकेगी.

मुख्य बातें:

  • तारीख: 17 फरवरी 2026 (मंगलवार)
  • ग्रहण का प्रकार: वलयाकार सूर्य ग्रहण
  • भारत में दृश्यता: नहीं
  • सूतक काल: मान्य नहीं
  • कहां दिखेगा: पश्चिम एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, उत्तर और दक्षिण अमेरिका

साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण – 12 अगस्त

साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा और यह भी वलयाकार सूर्य ग्रहण ही होगा. यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा. अमेरिका, अर्जेंटीना और अटलांटिक क्षेत्र के कुछ हिस्सों में लोग इस अद्भुत नज़ारे को देख पाएंगे. भारत में दृश्यता न होने के कारण सूतक काल लागू नहीं होगा और दैनिक जीवन सामान्य रहेगा.

मुख्य बातें:

  • तारीख: 12 अगस्त 2026 (बुधवार)
  • ग्रहण का प्रकार: वलयाकार सूर्य ग्रहण
  • भारत में दृश्यता: नहीं
  • सूतक काल: लागू नहीं
  • कहां दिखेगा: अमेरिका, अर्जेंटीना और अटलांटिक क्षेत्र

2026 का पहला चंद्र ग्रहण – 3 मार्च (होली पर)

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होली के दिन लगेगा, जो इसे और भी खास बना देता है. यह एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा पर पृथ्वी की हल्की छाया पड़ेगी. यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा और शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक रहेगा. भारत में दिखने के कारण इसका सूतक काल मान्य होगा. यह ग्रहण भारत के अलावा यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में भी देखा जाएगा.

मुख्य बातें:

  • तारीख: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
  • ग्रहण का प्रकार: उपछाया चंद्र ग्रहण
  • समय: शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक
  • भारत में दृश्यता: हां
  • सूतक काल: मान्य होगा
  • कहां दिखेगा: भारत, एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया

साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण – 28 अगस्त

साल का अंतिम ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा. यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा का कुछ हिस्सा पृथ्वी की छाया में ढका नजर आएगा. यह ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से दिखाई देगा. जहां-जहां यह ग्रहण दिखेगा, वहां सूतक काल के नियम लागू होंगे. यह खगोलीय घटना यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका में भी देखी जाएगी.

मुख्य बातें:

  • तारीख: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
  • ग्रहण का प्रकार: आंशिक चंद्र ग्रहण
  • भारत में दृश्यता: कुछ हिस्सों में
  • सूतक काल: जहां दिखेगा, वहां मान्य
  • कहां दिखेगा: भारत (आंशिक), यूरोप, अफ्रीका, उत्तर और दक्षिण अमेरिका

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?

हिंदू धर्म में ग्रहण काल को सूतक काल कहा जाता है. इस दौरान पूजा-पाठ नहीं किया जाता और मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं. मान्यता है कि ग्रहण के समय भोजन नहीं करना चाहिए और पहले से बने खाने में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और उन्हें बाहर निकलने या नुकीली वस्तुओं का उपयोग करने से बचना चाहिए. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और पूजा करके सामान्य दिनचर्या शुरू की जाती है.

ग्रहण के दौरान ध्यान रखें:

  • पूजा-पाठ और मूर्ति स्पर्श से बचें
  • मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं
  • ग्रहण के समय भोजन न करें
  • पके भोजन में तुलसी के पत्ते डालकर रखें
  • गर्भवती महिलाएं बाहर न निकलें
  • नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करें

ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और पूजा कर सामान्य दिनचर्या शुरू की जाती है.

यह भी पढ़ें :- Kharmas 2026: दूसरा खरमास कब लगेगा, क्यों रोके जाते हैं शुभ कार्य और क्या है धार्मिक मान्यता, क्यों माना जाता है इसे अशुभ?

About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
Leave A Comment

अन्य लाइफस्टाइल खबरें