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Shani Jayanti 2026: शनि जयंती 2026 कब है और कैसे करें पूजा, शनि देव का जन्म और महत्व, नोट करें डेट, मुहूर्त
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, February 3, 2026
Last Updated On: Tuesday, February 3, 2026
Shani Jayanti 2026: शनि जयंती 2026 भगवान शनि के जन्मोत्सव के रूप में 16 मई को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी. यह दिन कर्म, न्याय और अनुशासन का संदेश देता है. मान्यता है कि शनि देव की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और परिश्रम का उचित फल मिलता है. शनि जयंती आत्मचिंतन, सद्कर्म और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का प्रेरक पर्व है. नोट करें डेट, मुहूर्त….
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, February 3, 2026
Shani Jayanti 2026: शनि जयंती, भगवान शनि के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है. शनि देव, सूर्य और छाया के पुत्र हैं और न्यायप्रियता, कर्मफल और जीवन में संतुलन के प्रतीक माने जाते हैं. उनके भक्त मानते हैं कि अगर शनि देव प्रसन्न हों तो जीवन में किसी भी प्रकार की असुविधा या संकट नहीं आता. शनि जयंती पर लोग व्रत रखते हैं, दान करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करके शनि देव की कृपा प्राप्त करते हैं. वर्ष 2026 में शनि जयंती 16 मई को पड़ रही है.
शनि जयंती की तिथि और भिन्नता
उत्तर भारत में शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाती है. वहीं दक्षिण भारत में इसे वैशाख अमावस्या के दिन मनाया जाता है. इसलिए देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका समय थोड़ा भिन्न हो सकता है. 2026 में उत्तर भारत के लिए यह दिन 16 मई है, और यह दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि देव का जन्म हुआ था.
शनि जयंती 2026 का शुभ मुहूर्त
शनि जयंती का पूजा मुहूर्त जानना बेहद जरूरी होता है. 16 मई 2026 को ज्येष्ठ अमावस्या सुबह 5:11 बजे से शुरू होकर अगले दिन 17 मई सुबह 1:30 बजे तक रहेगी. इस दौरान रात 7:05 से 8:23 बजे तक शनि पूजा का विशेष मुहूर्त है. इस समय पर पूजा करने से शनि देव की कृपा विशेष रूप से प्राप्त होती है.
- शनि जयंती की तिथि: 16 मई 2026 (शनिवार)
- ज्येष्ठ अमावस्या प्रारंभ: 16 मई सुबह 5:11 बजे
- ज्येष्ठ अमावस्या समाप्त: 17 मई सुबह 1:30 बजे
- शनि देव पूजा का शुभ समय: शाम 7:05 बजे से रात 8:23 बजे तक
- शनि देव की पूजा सूर्यास्त के बाद करना विशेष लाभकारी माना जाता है.
शनि जयंती पर करने योग्य अनुष्ठान
इस दिन विशेष पूजा और व्रत करने का महत्व है. सबसे प्रमुख अनुष्ठानों में शनि तैलाभिषेकम और शनि शांति पूजा शामिल हैं. सुबह स्नान और ध्यान के बाद पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और साफ जल चढ़ाएं और 11 बार परिक्रमा करें. इसके बाद “ऊं शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें. साथ ही, लोहा, जामुन, काले तिल, काले जूते और तेल का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.
- शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान और ध्यान करें.
- स्वच्छ काले या गहरे रंग के वस्त्र धारण करें.
- पीपल के पेड़ की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और साफ जल अर्पित करें.
- पीपल वृक्ष की 11 बार परिक्रमा करें.
- शनि देव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
- “ऊं शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें.
- शनि तैलाभिषेकम और शनि शांति पूजा कराना विशेष फलदायी माना जाता है.
- शनि देव का स्मरण करते हुए लोहा, काला तिल, जामुन, काले जूते या तेल का दान करें.
- गरीब, मजदूर और जरूरतमंद लोगों को भोजन या वस्त्र दान करें.
- शराब, झूठ, क्रोध और गलत कार्यों से दूरी बनाए रखें.
शनि देव की कृपा किन पर होती है
भगवान शनि निष्पक्ष न्याय में विश्वास रखते हैं. उनके आशीर्वाद से जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और सफलता मिलती है. जिन पर शनि देव की कृपा नहीं होती, उन्हें वर्षों तक मेहनत करने के बावजूद सफलता नहीं मिलती. ऐसे लोग लगातार परिश्रम करते हैं, लेकिन कोई विशेष फल नहीं प्राप्त कर पाते. शनि जयंती के दिन पूजा करके इन्हें संतुलन और सुख की प्राप्ति होती है.
शनि देव की नाराजगी के कारण
शनि देव उन लोगों पर प्रसन्न नहीं होते जो गरीब, लाचार और असहाय लोगों को परेशान करते हैं. इसके अलावा शराब, जुआ, चोरी, हत्या या अन्य तामसिक प्रवृत्तियों में लिप्त लोग भी शनि की नाराजगी झेलते हैं. जब ऐसे व्यक्तियों के जीवन में शनि की दशा आती है, तो उन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है. इसलिए शनि जयंती पर दान, पूजा और सत्कर्म करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं कम होती हैं.
शनि जयंती का संदेश
शनि जयंती केवल पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह सत्य, कर्म और न्याय का संदेश भी देती है. इस दिन अपने कर्मों पर ध्यान दें, लोगों की मदद करें और ईमानदारी के मार्ग पर चलें. इस प्रकार आप शनि देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में सफलता और संतुलन पा सकते हैं.

















