Kharmas 2026: दूसरा खरमास कब लगेगा, क्यों रोके जाते हैं शुभ कार्य और क्या है धार्मिक मान्यता, क्यों माना जाता है इसे अशुभ?

Authored By: Nishant Singh

Published On: Wednesday, February 4, 2026

Last Updated On: Wednesday, February 4, 2026

Kharmas 2026 में दूसरा खरमास कब शुरू होगा, शुभ कार्य क्यों वर्जित माने जाते हैं.
Kharmas 2026 में दूसरा खरमास कब शुरू होगा, शुभ कार्य क्यों वर्जित माने जाते हैं.

Kharmas 2026: सनातन परंपरा में खरमास को एक विशेष आध्यात्मिक काल माना जाता है, जब शुभ कार्यों से दूरी बनाकर आत्मचिंतन और साधना पर जोर दिया जाता है. यह अवधि ज्योतिषीय और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है, जिसके कारण इसे आम जीवन से अलग दृष्टि से देखा जाता है. इस साल का दूसरा खरमास कब लगेगा और क्यों माना जाता है इसे अशुभ?

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Wednesday, February 4, 2026

Kharmas 2026: सनातन धर्म में खरमास को एक विशेष ज्योतिषीय अवधि माना जाता है, जिसे आमतौर पर शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं समझा जाता. यह समय साल में दो बार आता है और लगभग एक महीने तक रहता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि में प्रवेश करते हैं, तब सूर्य की शुभता कमजोर हो जाती है. यही स्थिति खरमास कहलाती है. इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, जबकि पूजा-पाठ, दान और साधना को अत्यंत फलदायी कहा गया है.

खरमास 2026 कब-कब लगेगा?

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में भी खरमास दो बार लगेगा. साल का पहला खरमास 16 दिसंबर 2025 को शुरू होकर 14 जनवरी 2026 को समाप्त हो गया था, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश कर गए. इसके बाद साल का दूसरा खरमास 14 मार्च 2026 से शुरू होगा और 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा. इस अवधि में सूर्य देव मीन राशि में गोचर करेंगे. यानी मार्च के मध्य से अप्रैल के मध्य तक लगभग एक महीने का समय खरमास के प्रभाव में रहेगा.

  • वर्ष 2026 में खरमास दो बार लगेगा, जैसा कि सनातन परंपरा में माना जाता है.
  • पहला खरमास 16 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 तक रहा.
  • पहला खरमास सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ समाप्त हुआ.
  • दूसरा खरमास वर्ष 2026 में 14 मार्च 2026 से शुरू होगा.
  • दूसरा खरमास 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा.
  • इस अवधि में सूर्य देव मीन राशि में गोचर करेंगे.
  • दोनों खरमास की अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं.

खरमास के दौरान क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाह और अन्य शुभ कार्यों के कारक ग्रह गुरु बृहस्पति माने जाते हैं. जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तब गुरु का प्रभाव कमजोर पड़ जाता है. इसके साथ ही सूर्य की तेज ऊर्जा मिलकर ऐसा योग बनाती है, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता. यही कारण है कि इस अवधि में शादी-विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करना या कोई बड़ा शुभ संकल्प लेने से परहेज किया जाता है.

खरमास की अवधि को अशुभ क्यों माना जाता है?

खरमास को अशुभ कहने का अर्थ यह नहीं है कि यह समय नकारात्मक होता है. बल्कि यह अवधि सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूर रहकर आत्मिक उन्नति के लिए मानी जाती है. चूंकि गुरु का प्रभाव कमजोर होता है, इसलिए नए रिश्ते, नए काम और भौतिक निर्णयों को टालने की परंपरा है. इस समय किया गया दान, जप, तप, व्रत और सेवा कार्य कई गुना पुण्य फल देता है, ऐसा धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है.

पौराणिक कथा: खरमास कैसे पड़ा?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव सात घोड़ों के रथ पर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं. एक बार उनके घोड़े अत्यधिक थक गए, तब सूर्य देव ने रथ में गधों को जोड़ दिया. गधों की चाल धीमी होने के कारण सूर्य की गति भी मंद पड़ गई. इसी धीमी गति वाले काल को खरमास कहा गया. यह कथा प्रतीकात्मक रूप से यह दर्शाती है कि इस समय गति नहीं, बल्कि ठहराव और आत्मचिंतन आवश्यक है.

खरमास में क्या करना शुभ माना जाता है?

हालांकि खरमास में मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन यह समय पूरी तरह से निष्क्रिय रहने का नहीं है. इस अवधि में भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा, दान-पुण्य, गरीबों की सेवा, गीता-रामायण का पाठ और संयमित जीवन को विशेष फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास में की गई साधना व्यक्ति को मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है.

निष्कर्ष

खरमास 2026 का दूसरा चरण 14 मार्च से 13 अप्रैल तक रहेगा. यह समय भले ही शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त न माना जाए, लेकिन आत्मिक शुद्धि और धर्म-कर्म के लिए इसे बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. इसलिए इस अवधि को अशुभ समझने के बजाय इसे संयम, साधना और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखना ही सनातन परंपरा का सार है.

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About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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