भरोसे का रिश्ता

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Published On: Thursday, August 8, 2024

ex prime minister shekh hasina bangladesh
ex prime minister shekh hasina bangladesh

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को एक बार फिर भारत ने मदद दी है। बांग्लादेश में हिंसा और विद्रोह के बाद शेख हसीना ने फिर भारत का ही रुख किया और यहां सुरक्षित प्रवास पर हैं। पहले भी भारत उनकी मदद कर चुका है।

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Last Updated On: Thursday, August 8, 2024

बांग्लादेश की 15 साल तक पीएम रहीं शेख हसीना अब बेघर हैं, परदेस में हैं। न पद है, न कद और न ही ठिकाना। फिलहाल भारत में हैं, कहां जाएंगी, कहां रहेंगी अभी कुछ तय नहीं है। भारत शेख हसीना के लिए दोस्त बनकर सामने आया है। वैसे यह पहली बार नहीं है जब भारत ने शेख हसीना की मदद की हो। बांग्लादेश की मुक्ति की भूमिका लिखने वाले शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी के लिए भारत कई बार कठिन मौकों पर दोस्त बनकर सामने आया है।

इस बार जब सेना ने बांग्लादेश की पूर्व पीएम को महज 45 मिनट का समय इस्तीफा देने के लिए दिया तो एकाएक उन्हें यकीन नहीं आया होगा कि क्या करें, कैसे करें और किसकी तरफ देखें…इसी उधेड़बुन में शायद उन्हें एक बार फिर भरोसेमंद साथी भारत की याद आई होगी। तभी तो जब बांग्लादेश की सेना ने उन्हें उग्र भीड़ से बचाने के लिए देश से सुरक्षित बाहर पहुंचाने का विकल्प दिया तो उन्होंने भारत को ही चुना। हेलीकाप्टर से ढाका से निकलने के बाद शेख हसीना सेना के विमान से भारत के हिंडन एयरबेस पहुंचीं तो उनके साथ बहन और करीबी लोगों के अलावा अन्य साथी भी थे। करीब 40 लोग बताए जा रहे हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल समेत वरिष्ठ अधिकारियों की उनसे मुलाकात की खबरें भी सामने आईं। सेफ हाउस में उन्हें ठहराया गया। कड़ी सुरक्षा की गई। राफेल विमानों के पहरे में हसीना का विमान भारत की सीमा में उड़ता रहा।

भारत ने हसीना की मदद पहली बार की हो, यह नहीं है। कई बार वह शेख हसीना के काम आ चुका है। उनके परिवार के काम आ चुका है। इस बार तो पुराने रिश्तों को फिर निभाया गया है। इस रिश्ते की शुरुआत यूं तो 1971 के बांग्लादेश मुक्ति अभियान से ही हो गई थी जब इंदिरा गांधी की सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लाभाषियों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर सैन्य कार्रवाई की और पाकिस्तान को युद्ध में धूल चटाई। शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान देश के बंगबंधु के रूप में सामने आए और भारत के साथ उनका और उनके देश का रिश्ता प्रगाढ़ हुआ। 1975 में जब बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने तख्तपालट किया तो शेख समेत परिवार को बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। हसीना के माता-पिता, भाई व रिश्तेदार मारे जा चुके थे। सत्ता किसी और के पास चली गई थी। उस समय हसीना की मदद को भारत आगे आया था। उनके वैज्ञानिक पति जर्मनी में रहते थे। वह वहां थीं। फिर भारत आईं। दिल्ली में पंडारा पार्क में उनके व परिवार के रहने की व्यवस्था की गई। पति के लिए नौकरी की व्यवस्था भी बातें भी सामने आती हैं। उन्हें व उनकी बहन को जर्मनी से लाया गया था।

वैसे तो कई किस्से हैं जब हसीना की मदद के लिए भारत आगे आया। एक मामला 2011 का बताया जाता है। तब भारत ने ही शेख हसीना तक एक चिट्ठी पहुंचवाई थी जो बताती थी कि कैसे उनके खिलाफ उनके ही देश में साजिश रची जा रही है। सूचना समय रहते मिल गई तो बांग्लादेश की पीएम से जुड़ा अमला सतर्क हो गया और साजिश के खिलाफ रणनीति तैयार कर ली गई। कहा तो यहां तक जाता है कि भारत ने शेख हसीना को सुरक्षित निकालने के लिए दो हेलीकाप्टर भी तैयार रखे थे। इसी तरह का एक अवसर 2009 में भी आया था। हसीना की नई-नई सरकार बनी थी, दो माह ही हुए थे। तभी बांग्लादेश राइफल्स ने विद्रोह कर दिया। अपने डीजी और उनके पत्नी की हत्या कर दी। तब भी भारत तक हसीना का संदेश आया था और देश ने उनकी मदद की थी। अब एक बार फिर जब देश में विद्रोह हुआ तो शेख हसीना को पुराने और भरोसेमंद दोस्त भारत की ही याद आई। राजनीतिक और ऱणनीतिक रूप से बांग्लादेश में बनीं स्थितियां भारत के लिए चिंता का सबब हैं। इसके लिए भी सरकार जुटी है और तैयारियां कर रही है।

अरुण श्रीवास्तव पिछले करीब 34 वर्ष से हिंदी पत्रकारिता की मुख्य धारा में सक्रिय हैं। लगभग 20 वर्ष तक देश के नंबर वन हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण में फीचर संपादक के पद पर कार्य करने का अनुभव। इस दौरान जागरण के फीचर को जीवंत (Live) बनाने में प्रमुख योगदान दिया। दैनिक जागरण में करीब 15 वर्ष तक अनवरत करियर काउंसलर का कॉलम प्रकाशित। इसके तहत 30,000 से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन। दैनिक जागरण से पहले सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल (हिंदी), चाणक्य सिविल सर्विसेज टुडे और कॉम्पिटिशन सक्सेस रिव्यू के संपादक रहे। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, करियर, मोटिवेशनल विषयों पर लेखन में रुचि। 1000 से अधिक आलेख प्रकाशित।
Leave A Comment

अन्य खबरें

अन्य खबरें