छोटा द्वीप, बड़ा असर : क्या अमेरिका ने सेंट मार्टिन्स द्वीप के लिए करा दिया बांग्लादेश में तख्ता पलट

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Published On: Monday, August 12, 2024

st martins island
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कूटनीति, राजनीति और ग्लोबल पावर वार में देश का बड़ा और ताकतवर होना ही जरूरी नहीं है, छोटा भूभाग भी बड़े सत्ता परिवर्तन का कारण बन सकता है। इसका ताजातरीन एक्जांपल है सेंट मार्टिन्स द्वीप। शेख हसीना द्वारा बांग्लादेश की सत्ता से हटाने के लिए अमेरिका पर लगाए गए बड़े आरोप में इस छोटे से, लेकिन सामरिक रूप से बेहद अहम द्वीप का भी जिक्र आया है। जिक्र क्या आया है, बांग्लादेश में तख्तापलट की पूरी कहानी के पीछे का असली किरदार ही यही सेंट मार्टिन्स द्वीप लग रहा है। शेख हसीना ने कहा है कि अमेरिका इस द्वीप पर अधिकार चाहता था ताकि वह यहां अपना सैन्य बेस बना सके और इसके बदले में शेख हसीना की सरकार कायम रखने में मदद करने का वादा कर रहा था। शेख हसीना ने इस सौदे से इंकार कर दिया और नतीजा सबके सामने है। वह आज भारत में शरणार्थी के रूप में रह रही हैं और दुनिया के कई देशों से शरण मांगने की खबरें भी सामने आ रही हैं। खैर, अमेरिका ने क्या सौदेबाजी का प्रस्ताव दिया, यह तो बाद की बात है। पहले जानना-समझना चाहिए कि यह सेंट मार्टिन्स द्वीप है क्या और कैसे इतना अहम हो गया कि एक देश की चुनी हुई सरकार ही गिरवा दी। आइए आपको ले चलते हैं सेंट मार्टिन्स द्वीप...

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Last Updated On: Monday, August 12, 2024

यहां है सेंट मार्टिन्स द्वीप (St. Martin Island)

बांग्लादेश के दक्षिणी तट से करीब नौ किमी दूर स्थित है सेंट मार्टिन्स द्वीप। एक छोटे से डाट सा दिखता है यह। बंगाल की खाड़ी में बसे इस द्वीप का एक और महत्व है कि यह म्यांमार से केवल आठ किमी दूर है यानी दक्षिण एशिया में हिंद महासागर में बेहद अहम पोजीशन पर है सेंट मार्टिन्स द्वीप। इसका एरिया महज तीन स्क्वायर किमी है, लेकिन स्ट्रैटेजिकल इंपार्टेंस इससे लाख गुना ज्यादा है। क्यों…क्योंकि अमेरिका यहां एक बेस बनाना चाहता है।

क्या मिलेगा अमेरिका कोः

अब एक और सवाल कि अमेरिका को सेंट मार्टिन्स में बेस बनाकर क्या मिलेगा? दरअसल अमेरिका पूरी दुनिया का बिग ब्रदर बनने की चाहत सदैव से रखता रहा है। वह यह करते-करते कब अंकल सैम बन गया, किसी को पता भी नहीं चला। उसके ग्लोबल एजेंडे में एशिया, खासकर दक्षिण एशिया की बहुत अहमियत है क्योंकि यहीं अंकल सैम की ताकत को चुनौती देने वाला ड्रैगन यानी चीन बसा है। अब चीन से सीधे टकराने की न तो स्थिति है और न ही इसमें समझदारी है सो उसके निकट कहीं बेस रहेगा तो अमेरिका मजबूत होगा। बस इसीलिए सेंट मार्टिन्स की सौदेबाजी वह शेख हसीना से कर रहा था। यहां बेस बनाकर वह म्यांमार के भी निकट रहेगा और निगाह रख सकेगा जोकि दक्षिण एशिया का बहुत सेंसिटिव देश है। लोकतंत्र वहां फिलहाल सूली पर है और सेना का शासन है।

अमेरिका और भारतः

यूं तो अमेरिका (America) खुद को भारत(India) का दोस्त बताता रहता है, लेकिन उसकी डिप्लोमेसी कुछ और ही कहती है। कभी वह भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर टिप्पणी करता है, करवाता है तो कभी धार्मिक असहिष्णुता की बात कर दबाव बनाता है। बीते एक-डेढ़ दशक में भारत की बढ़ती साख, खासकर ग्लोबल साउथ में लीडर की पोजीशन को अमेरिका पचा नहीं पा रहा है। सो सेंट मार्टिन्स में अड्डा बनाकर वह भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनाएगा। हम पहले ही बता चुके कि सेंट मार्टिन्स बंगाल की खाड़ी में स्थित है जोकि चीन की पैंतरेबाजी को काउंटर करने के लिहाज से भारत के लिए बेहद अहम क्षेत्र है। अगर सेंट मार्टिन्स बांग्लादेश के बजाय किसी और देश के हितों के लिए प्रयोग होता है तो भारत के लिए सिरदर्द बढ़ेगा ही। सेंट मार्टिन्स द्वीप को लेकर इंटरनेशनल लेवल पर सीमा विवाद भी है।

हिंद महासागर (Indian Ocean) की अहमियतः

भारत के लिए हिंद महासागर की अहमियत बहुत अधिक है। इसी में सेंट मार्टिन्स है और दूर समुद्र में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह जो भारत के पास है। श्रीलंका भी इसी क्षेत्र में है जिसके हंबनटोटा पोर्ट के परोक्ष रूप से अपने बेस के रूप में प्रयोग की चीन कोशिश कर चुका है। भारत के लिए यह भी एक चिंता का विषय है। म्यांमार भी इसी क्षेत्र में स्थित है और भारत के उत्तर पूर्व के लिए वह कितनी बड़ी समस्या है, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है। इसी क्षेत्र में आगे चलें तो स्ट्रेट आफ मलक्का यानी मलक्का जलडमरूमध्य है। यह हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है और भारत के लिए व्यापारिक रूप से अति महत्वपूर्ण है, खासकर पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन के संदर्भ में। एक तरह से यह हिंद महासागर में चीन की तरफ से एंट्री प्वाइंट का भी काम करता है। जाहिर है कि सेंट मार्टिन्स में बेस बनाकर अमेरिका बहुत सारे निशाने एक साथ साधना चाहता है।

अभी सेंट मार्टिन्स के बारे में इतना ही…इसके आगे की कहानी जल्द आप तक पहुंचाएंगे।

अरुण श्रीवास्तव पिछले करीब 34 वर्ष से हिंदी पत्रकारिता की मुख्य धारा में सक्रिय हैं। लगभग 20 वर्ष तक देश के नंबर वन हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण में फीचर संपादक के पद पर कार्य करने का अनुभव। इस दौरान जागरण के फीचर को जीवंत (Live) बनाने में प्रमुख योगदान दिया। दैनिक जागरण में करीब 15 वर्ष तक अनवरत करियर काउंसलर का कॉलम प्रकाशित। इसके तहत 30,000 से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन। दैनिक जागरण से पहले सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल (हिंदी), चाणक्य सिविल सर्विसेज टुडे और कॉम्पिटिशन सक्सेस रिव्यू के संपादक रहे। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, करियर, मोटिवेशनल विषयों पर लेखन में रुचि। 1000 से अधिक आलेख प्रकाशित।
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