ममता बनर्जी को बड़ा सियासी झटका, टीएमसी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद ने छोड़ी पार्टी और संसद सदस्यता
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, June 8, 2026
Last Updated On: Monday, June 8, 2026
तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने सांसद पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने पार्टी में भ्रष्टाचार और आंतरिक असंतोष को कारण बताया. उनके इस फैसले से बंगाल की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है और भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, June 8, 2026
TMC Rajya Sabha MP Resigns News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. लंबे समय तक पार्टी का अहम चेहरा रहे रॉय का यह फैसला ऐसे समय आया है जब बंगाल की राजनीति पहले से ही कई चुनौतियों और विवादों का सामना कर रही है. उनके इस्तीफे को केवल एक सांसद का पद छोड़ना नहीं, बल्कि टीएमसी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है.
पार्टी से दूरी बनाने का फैसला
शुखेंदु शेखर रॉय ने केवल राज्यसभा की सदस्यता ही नहीं छोड़ी, बल्कि तृणमूल कांग्रेस से भी अपना नाता तोड़ लिया. उन्होंने अपने फैसले के पीछे पार्टी के भीतर बढ़ती समस्याओं और कथित भ्रष्टाचार को प्रमुख कारण बताया. रॉय का कहना है कि जब उन्होंने कुछ मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी और गलतियों की ओर ध्यान दिलाने की कोशिश की, तो उन्हें संगठन के भीतर पहले जैसी अहमियत नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया.
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उठाए सवाल
इस्तीफे के बाद रॉय ने राज्य में हुए विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने मांग की कि पिछले कुछ वर्षों में हुए खर्च और परियोजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि जनता के सामने पूरी तस्वीर आ सके. उनका मानना है कि पारदर्शिता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है और यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच जरूरी है.
जनता की नाराजगी का भी किया जिक्र
रॉय ने यह भी कहा कि हाल के समय में राज्य में कई ऐसे मुद्दे सामने आए, जिनसे आम लोगों के बीच असंतोष बढ़ा. उनके अनुसार कुछ घटनाओं ने जनता के विश्वास को प्रभावित किया और यही कारण रहा कि लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया. उन्होंने संकेत दिया कि केवल एक या दो विवाद नहीं, बल्कि कई कारण ऐसे थे जिन्होंने राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया.
INDIA गठबंधन पर भी साधा निशाना
अपने बयान में शुखेंदु शेखर रॉय ने विपक्षी दलों के गठबंधन पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केवल चुनावी समीकरण बनाने से कोई गठबंधन मजबूत नहीं हो जाता. यदि विचारधारा, नेतृत्व और रणनीति में स्पष्टता न हो तो ऐसे गठबंधन लंबे समय तक टिक नहीं पाते. उनके इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा को जन्म दे दिया है.
क्या बदलने वाला है बंगाल का राजनीतिक समीकरण?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रॉय का इस्तीफा आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को प्रभावित कर सकता है. वह लंबे समय तक ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे और पार्टी के कई महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका रही है. ऐसे में उनका अलग होना टीएमसी के लिए चुनौती माना जा रहा है. साथ ही उनके भविष्य को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई हैं.
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि शुखेंदु शेखर रॉय का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा. उन्होंने अभी किसी नई पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. आने वाले दिनों में उनका फैसला बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. इतना तय है कि इस इस्तीफे ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति को सुर्खियों में ला दिया है.
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