ममता के मुश्किल दौर में कौन साथ, कौन खामोश? TMC के भीतर उठते सवालों की कहानी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, June 5, 2026
Last Updated On: Friday, June 5, 2026
पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस गहरे संकट से गुजर रही है. पार्टी के भीतर बगावत और नेताओं की चुप्पी ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जहां कुछ वरिष्ठ नेता खुलकर उनके समर्थन में हैं, वहीं कई चर्चित चेहरे दूरी बनाए हुए नजर आ रहे हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, June 5, 2026
CM Mamata Crisis: लगातार डेढ़ दशक तक पश्चिम बंगाल की राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाए रखने वाली तृणमूल कांग्रेस इन दिनों अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है. विधानसभा चुनाव में मिली हार ने पार्टी को केवल सत्ता से दूर नहीं किया, बल्कि उसके भीतर कई तरह के मतभेदों को भी उजागर कर दिया है. चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के अंदर बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं और कई नेता खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि ममता बनर्जी के साथ आखिर कौन खड़ा है और कौन दूरी बनाकर हालात का इंतजार कर रहा है.
टॉलीवुड ब्रिगेड की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
तृणमूल कांग्रेस की राजनीति में फिल्म, टीवी और खेल जगत से जुड़े चेहरों की हमेशा बड़ी भूमिका रही है. ममता बनर्जी ने शुरू से ही इन लोकप्रिय हस्तियों को राजनीति में जगह देकर पार्टी की पहुंच आम लोगों तक बढ़ाई. कई अभिनेता, गायक, निर्देशक और खिलाड़ी चुनाव लड़कर सांसद और विधायक बने. लेकिन आज जब पार्टी संकट में है, तब यही चर्चित ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’ असामान्य रूप से शांत दिखाई दे रही है. चुनावी हार और पार्टी के भीतर शुरू हुई बगावत के बाद इन सितारों की चुप्पी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है.
ममता की राजनीति में सितारों की अहम भूमिका
तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर से ही ममता बनर्जी ने लोकप्रिय चेहरों को राजनीति में आगे बढ़ाया. बंगाली फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियां पार्टी का हिस्सा बनीं. इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों, खिलाड़ियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को भी पार्टी में शामिल किया गया. इस रणनीति का फायदा भी मिला और पार्टी की छवि को मजबूती मिली. हालांकि पार्टी के पुराने और जमीनी नेताओं के बीच समय-समय पर यह शिकायत भी रही कि फिल्मी सितारों को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. लेकिन सत्ता के दौर में यह असंतोष कभी खुलकर सामने नहीं आया.
कुछ नेता चुप, कुछ खुलकर कर रहे समर्थन
चुनावी हार के बाद पार्टी के कई बड़े चेहरे चुप्पी साधे हुए हैं. सांसद सयानी घोष, जो अपनी बेबाक राय के लिए जानी जाती हैं, उन्होंने भी मौजूदा संकट पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है. वहीं शिक्षा मंत्री रहे ब्रत्या बसु भी चुनाव के बाद सार्वजनिक मंचों पर कम दिखाई दिए हैं. उनकी चुप्पी को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. दूसरी ओर कुछ नेता ऐसे भी हैं जिन्होंने खुलकर ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा जताई है.
ममता के समर्थन में डटे वरिष्ठ नेता
वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी लगातार ममता बनर्जी के साथ दिखाई दे रहे हैं. पार्टी के भीतर बने नए गुट को लेकर उन्होंने कानूनी सवाल भी उठाए हैं. इसी तरह डेरेक ओ’ब्रायन भी हर महत्वपूर्ण बैठक और कार्यक्रम में ममता के साथ मौजूद रहे हैं. राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने भी सार्वजनिक रूप से कहा कि कठिन समय में वह ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे. सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने पार्टी प्रमुख के समर्थन में कई संदेश साझा किए और खुद को पूरी तरह उनके साथ बताया.
महुआ मोइत्रा और डोला सेन ने भी दिखाई एकजुटता
कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा भले ही सार्वजनिक मंचों पर कम नजर आई हों, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए साफ कर दिया कि वह ममता बनर्जी के साथ हैं. उन्होंने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग पार्टी के खिलाफ खड़े हैं, वे खुद को असली तृणमूल नहीं कह सकते. इसी तरह डोला सेन और चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसे नेताओं ने भी चुनावी हार के बावजूद ममता का साथ नहीं छोड़ा और उनके कार्यक्रमों में लगातार मौजूद रहीं.
बगावत ने बढ़ाई नेतृत्व की चिंता
पार्टी के पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में शुरू हुई बगावत ने तृणमूल कांग्रेस के लिए नई चुनौती पैदा कर दी है. उन्होंने अपने समर्थक विधायकों के साथ खुद को असली तृणमूल बताने की कोशिश की है. वहीं बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी पार्टी के पदों से इस्तीफा देकर नाराजगी जाहिर की. इन घटनाओं ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर असंतोष केवल सीमित नहीं है, बल्कि कई स्तरों पर मौजूद है.
कुछ नेताओं ने बनाई दूरी
हार के बाद कई चर्चित चेहरे पार्टी गतिविधियों से दूर दिखाई दे रहे हैं. अभिनेता देव अधिकारी ने चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी को जीत की बधाई देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी. वहीं कुछ अन्य कलाकार और नेता भी मौजूदा संकट पर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं. इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या ये चेहरे भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को देखते हुए अपनी स्थिति तय करने का इंतजार कर रहे हैं.
आने वाला समय तय करेगा TMC का भविष्य
तृणमूल कांग्रेस इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां हर नेता का रुख महत्वपूर्ण बन गया है. सत्ता में रहते हुए पार्टी एकजुट दिखाई देती थी, लेकिन हार के बाद असली परीक्षा शुरू हुई है. कुछ नेता ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं, जबकि कुछ ने दूरी बना ली है और कुछ अब भी खामोशी का रास्ता अपनाए हुए हैं. आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि पार्टी के भीतर कौन वफादारी निभाता है और कौन नया राजनीतिक रास्ता चुनता है. फिलहाल इतना तय है कि तृणमूल कांग्रेस का यह संकट पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा बदलने की क्षमता रखता है.
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