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POK Dispute: POK में बवाल क्यों थम नहीं रहा? आरक्षित सीटों से शुरू हुआ विवाद अब बड़े जनआंदोलन में बदला
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, June 9, 2026
Last Updated On: Tuesday, June 9, 2026
POK Dispute: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में JAAC पर प्रतिबंध के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. आरक्षित विधानसभा सीटों, महंगाई, बिजली संकट और राजनीतिक अधिकारों को लेकर शुरू हुआ विरोध अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है. हिंसक झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है, जबकि चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, June 9, 2026
POK Dispute: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) इन दिनों गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है. हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि कई शहरों में विरोध प्रदर्शन, झड़पें और सुरक्षा बलों की तैनाती आम बात बन गई है. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है. हाल ही में रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कई लोगों की जान चली गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं.
प्रतिबंध के बाद भड़का विरोध
POK प्रशासन ने आतंकवाद-रोधी कानून के तहत JAAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की. इस कदम ने स्थानीय लोगों और संगठन के समर्थकों को नाराज कर दिया. रावलाकोट में एक कार्यकर्ता की मौत के बाद जब लोग उसके अंतिम दर्शन के लिए जुटे, तब हालात अचानक बिगड़ गए और प्रदर्शन हिंसक रूप ले बैठा.
झड़पों के दौरान पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों दोनों को नुकसान पहुंचा. कई लोगों को हिरासत में लिया गया और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई.
आखिर क्या है विवाद की जड़?
इस पूरे आंदोलन की सबसे बड़ी वजह POK विधानसभा की 45 सदस्यीय व्यवस्था में 12 आरक्षित सीटों को लेकर उठी नाराजगी है. ये सीटें उन लोगों के लिए सुरक्षित रखी गई हैं, जो कश्मीर से बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं.
JAAC और कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था से स्थानीय निवासियों की राजनीतिक ताकत कमजोर होती है. उनका कहना है कि क्षेत्र की राजनीति और फैसलों में उन्हीं लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जो वास्तव में वहां रहते हैं और स्थानीय समस्याओं का सामना करते हैं.
महंगाई और बिजली संकट ने बढ़ाई परेशानी
विधानसभा सीटों का मुद्दा आंदोलन की प्रमुख वजह जरूर है, लेकिन असंतोष केवल इसी तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ वर्षों से POK में महंगाई, बिजली संकट, बेरोजगारी और प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती रही है.
आटा, बिजली और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने आम जनता का जीवन कठिन बना दिया है. JAAC लंबे समय से इन मुद्दों को उठाता रहा है और कई बार बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन भी आयोजित कर चुका है.
चुनाव से पहले बढ़ी सरकार की चिंता
POK में जुलाई के अंत में चुनाव प्रस्तावित हैं. ऐसे समय में बढ़ते विरोध प्रदर्शन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने कई इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया है. कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ा है और बड़े सार्वजनिक जमावड़ों पर निगरानी बढ़ा दी गई है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले बढ़ता जनाक्रोश आने वाले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है.
पुलिसकर्मी भी ड्यूटी से बना रहे दूरी
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई पुलिसकर्मी और सुरक्षा कर्मी भी POK में तैनाती से बचने की कोशिश कर रहे हैं. रिपोर्टों के अनुसार कई जवानों ने यहां ड्यूटी जॉइन करने में रुचि नहीं दिखाई है.
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सुरक्षा जोखिम बताया जा रहा है. लगातार हो रही हिंसा और तनावपूर्ण माहौल में सुरक्षा कर्मियों को अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है. इसके अलावा वेतन और सुविधाओं को लेकर भी लंबे समय से असंतोष बना हुआ है.
वेतन असमानता भी बना बड़ा मुद्दा
पुलिसकर्मियों का कहना है कि पाकिस्तान के अन्य प्रांतों की तुलना में POK और गिलगित क्षेत्र में वेतन और भत्ते काफी कम हैं. यही कारण है कि पहले भी हजारों पुलिसकर्मी वेतन सुधार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं. कम वेतन और जोखिम भरी ड्यूटी का मिश्रण अब प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है.
आगे क्या होगा?
POK में मौजूदा हालात केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गए हैं, बल्कि यह राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक परेशानियों और प्रशासनिक नीतियों से जुड़ा व्यापक मुद्दा बन चुका है. एक तरफ सरकार सख्ती के जरिए हालात नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन को जारी रखने की बात कह रहे हैं.
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन बातचीत का रास्ता अपनाता है या टकराव की राजनीति और गहरी होती है. फिलहाल इतना साफ है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में असंतोष की आग अभी बुझती नजर नहीं आ रही है.
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