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होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव, ड्रोन हमले के बाद रुका UN का रेस्क्यू मिशन, 11000 नाविकों की जान को खतरा
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, June 26, 2026
Last Updated On: Friday, June 26, 2026
होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO ने सुरक्षा कारणों से रेस्क्यू अभियान रोक दिया है. इससे करीब 11 हजार नाविक अब भी समुद्र में फंसे हैं. समुद्री मार्ग को लेकर ईरान और अन्य पक्षों के बीच विवाद बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, June 26, 2026
Hormuz Strait Drone Attack: होर्मुज स्ट्रेट में हाल ही में हुए ड्रोन हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. ओमान के तट के पास एक कार्गो जहाज पर हुए हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने अपना रेस्क्यू अभियान फिलहाल रोक दिया है. इस फैसले का असर उन हजारों नाविकों पर पड़ा है, जो कई दिनों से फारस की खाड़ी में अलग-अलग जहाजों पर फंसे हुए हैं. सुरक्षा कारणों से मिशन रुकने के बाद अब इन नाविकों की सुरक्षित निकासी अनिश्चित हो गई है.
रेस्क्यू अभियान क्यों रोकना पड़ा?
संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई सहयोगी देशों की मदद से पिछले कुछ दिनों से फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चलाया जा रहा था. इसी दौरान ओमान के पास सिंगापुर के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा. हालांकि इस घटना में किसी नाविक की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली. इसके बावजूद IMO ने इसे गंभीर सुरक्षा खतरा मानते हुए पूरे अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया. एजेंसी का कहना है कि जब तक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक रेस्क्यू मिशन दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा.
ईरान और समुद्री रास्ते को लेकर विवाद
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री मार्ग को लेकर मतभेद है. ईरान का कहना है कि सभी जहाज केवल उसके द्वारा निर्धारित आधिकारिक समुद्री कॉरिडोर का ही उपयोग करें. उसने चेतावनी दी है कि यदि कोई जहाज दूसरे मार्ग से गुजरता है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी ईरान नहीं लेगा. दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र और ओमान ने जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए एक अलग समुद्री मार्ग का उपयोग किया था. इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है.
11 हजार से अधिक नाविकों पर मंडरा रहा खतरा
IMO के अनुसार फारस की खाड़ी में लगभग 20 हजार नाविक अलग-अलग जहाजों पर मौजूद हैं. इनमें से करीब 11 हजार लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष योजना बनाई गई थी. लेकिन रेस्क्यू अभियान रुकने के बाद ये नाविक अब भी समुद्र में फंसे हुए हैं. उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं है कि सुरक्षित रास्ता कब खुलेगा और वे अपने गंतव्य तक कब पहुंच पाएंगे. इससे समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.
दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलएनजी की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से विभिन्न देशों तक पहुंचती है. भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा जरूरतें भी इसी मार्ग पर निर्भर हैं. यदि यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों पर असर पड़ सकता है. फिलहाल IMO, ओमान, ईरान और अन्य संबंधित देशों के बीच बातचीत जारी है. सभी की कोशिश है कि सुरक्षित समाधान निकले और जहाजों की आवाजाही जल्द दोबारा शुरू हो सके, ताकि समुद्री व्यापार और हजारों नाविकों की सुरक्षा सामान्य हो सके.














