Special Coverage
ग्लोबल साउथ और 120 देशों की ओर से शांति का संदेश लेकर आया हूँ: मोदी
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Saturday, August 24, 2024
Last Updated On: Saturday, August 24, 2024
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूक्रेन की धरती से शांति का संदेश दिया। उन्होंने कहा, भारत बुद्ध और गांधी का देश है। हम पहले दिन से युद्ध के पक्षधर नहीं हैं। दोनों देश एक साथ बैठकर इसका हल निकालें।
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Saturday, August 24, 2024
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) आज सुबह (23 अगस्त 2024) युद्धग्रस्त यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। वहां उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के निमंत्रण पर पोलैंड से कीव पहुंचे थे।
उनकी इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर थी। दुनिया के देशों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र को भी उम्मीद है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस यात्रा से रूस-यूक्रेन युद्ध रुक सकता है।
प्रधानमंत्री ने कीव से शांति का संदेश दिया भी। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत पहले दिन से युद्ध का पक्षधर नहीं है। क्योंकि भारत बुद्ध और गांधी का देश है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच चार समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
मोदी (Modi) और जेलेंस्की (Zelensky) करीब तीन घंटे एक साथ रहे। जबकि प्रधानमंत्री मोदी की पूरी यूक्रेन यात्रा करीब सात घंटे की थी। प्रधानमंत्री ट्रेन से ही पोलैंड के लिए रवाना हो गए हैं। कीव से रवाना होने के पहले उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की को भारत आने का न्योता दिया।
यूक्रेन(Ukraine) की यात्रा करने वाले पहले पीएम
नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने यूक्रेन की यात्रा की है। सोवियत संघ के विघटन के बाद कई देश बने थे। उसमें यूक्रेन भी था। रूस भारत का सबसे विश्वसनीय मित्र देश रहा है। शायद इसलिए भी भारत का कोई प्रधानमंत्री यूक्रेन नहीं गया। लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी का संबंध रूस और यूक्रेन से बेहद करीबी और एक सामान है।
युद्ध रोकने की अपील
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जेलेंस्की से मुलाकात के दौरान करीब ढाई वर्षों से चल रहे यूक्रेन-रूस युद्ध को रोकने की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘मैं भारत के साथ-साथ ग्लोबल साउथ और करीब 120 देशों की ओर से शांति का संदेश लेकर आया हूं। शांति के हर प्रयास में भारत का सक्रिय योगदान रहा है। भारत का स्पष्ट मानना है कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान सर्वोपरी है। हम उसका समर्थन करते हैं।’
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ‘हमें बिना समय गंवाएं शांति के लिए आगे बढ़ना चाहिए। दोनों पक्ष एक साथ बैठकर इस संकट से निकलने का रास्ते तलाशने चाहिए। भारत इस तरह के हर प्रयास में अपनी सक्रिय भूमिका देने को तैयार है। व्यक्तिगत रूप से मैं भी इसमें कोई योगदान दे सकता हूं। मैं एक मित्र के रूप में ये जरूर करना चाहूंगा।’
रूस (Russia) में भी शांति की अपील की थी
प्रधानमंत्री मोदी इसी साल जून में रूस गए गए थे। उन्होंने उस दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि जब मैं रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिला था तो मीडिया के सामने आँख से आँख मिलाकर कहा था कि यह समय युद्ध का नहीं है। मास्को को में साफ-साफ शब्दों में कहा थी कि किसी भी समस्या का समाधान जंग के मैदान में कभी नहीं होता है। समाधान का रास्ता बातचीत, डायलॉग और कूटनीति से निकलता है।
भारत बुद्ध और गांधी का देश
प्रधानमंत्री मोदी कहा कि हम बुद्ध और गांधी की भूमि से हैं। जिन्होंने पूरी दुनिया में शांति का संदेश दिया है। भारत कभी भी युद्ध पर तटस्थ नहीं रहा है। भारत पहले दिन से शांति के पक्ष में रहा है। बुद्ध की धरती के लोगों के लिए युद्ध का कोई स्थान नहीं है। हम महात्मा गांधी की धरती से हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया को शांति का संदेश दिया है।
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को भी इस यात्रा से उम्मीद
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनी गुटेरेस (UN Secretary-General Antoni Guterres) के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक (Stephane Dujarric) ने मोदी की यूक्रेन यात्रा पर उम्मीद जताई है कि यह दौरा शांति लाने में मददगार साबित होगा। आज नहीं तो कल यह यात्रा अपना असर दिखाएगी।
इनके अलावा प्रधानमंत्री की यूक्रेन यात्रा से पूरी दुनिया को उम्मीद है कि इससे रूस और यूक्रेन के बीच अब शांति आएगी। इस उम्मीद का सबसे बाद कारण यही है कि प्रधानमंत्री मोदी का दोनों देशों के साथ कूटनीतिक और व्यक्तिगत स्तर पर करीबी संबंध हैं।
चार समझौतों पर मुहर
इस यात्रा के दौरान भारत और यूक्रेन के बीच चार समझौते हुए हैं। दोनों देशों ने कृषि, चिकित्सा, संस्कृति और मानवीय सहायता में सहयोग के लिए समझौते किए हैं। बताया जाता है कि इन समझौतों पर मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल चुकी थी। कृषि और खाद्य उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग उपलब्ध करता है।
दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को दोबारा बनाने के लिए इंटर गवर्नमेंटल टास्क टीम बनाई गई है। इसमें भारत और यूक्रेन के विदेश मंत्री शामिल हैं। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस टीम के चेयरपर्सन होंगे। दोनों देशों की बीच कई अन्य मुद्दों पर बातचीत हुई है।
भारत ने यूक्रेन को दिया भीष्म क्यूब
प्रधानमंत्री @narendramodi ने आज यूक्रेन के राष्ट्रपति@ZelenskyyUa को #BHISHM क्यूब्स भेंट किए। इस क्यूब्स में चिकित्सा देखभाल के लिए दवाइयां और उपकरण होते हैं।#Ukraine️ #ModiInUkraine#RussiaUkraineWar #Zelensky #UkraineRussiaWar @DrSJaishankar pic.twitter.com/q2VZSgXu3p
— Galgotias Times (@galgotiastimes) August 23, 2024
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन को भीष्म (BHISHM) मेडिकल क्यूब दिए है। यह कॉम्पैक्ट किट जंग में घायल लोगों और सैनिकों के इलाज में मदद करेगी। BHISHM Cube एक पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल की तरह है।
इसे आपदा प्रबंधन और इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट के लिए डिजाइन किया गया है। इसे ‘Project BHISHM’ यानी भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित, एंड मैत्री के तहत विकसित किया गया है। यह फरवरी 2022 में घोषित की गई थी।













