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UP Assembly Monsoon Session: चंदा विवाद, पेपर लीक और 26 हजार स्कूलों पर घमासान, चुनाव से पहले सपा-बीजेपी आमने सामने
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, August 3, 2026
Last Updated On: Monday, August 3, 2026
UP Assembly Monsoon Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 2027 चुनाव से पहले राजनीतिक मुकाबले का अहम मंच बनने जा रहा है. सरकार अनुपूरक बजट और विधेयक पेश करेगी, जबकि विपक्ष पेपर लीक, शिक्षा, किसानों, बेरोजगारी, स्कूलों के विलय और राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, August 3, 2026
UP Assembly Monsoon Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा का चार दिवसीय मानसून सत्र ऐसे समय शुरू हो रहा है, जब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं. सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों और विकास कार्यों को सामने रखने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष सरकार को शिक्षा, किसानों, बेरोजगारी, पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना चुका है. ऐसे में यह सत्र केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले चुनावों की राजनीतिक दिशा भी तय कर सकता है.
सरकार का फोकस विकास और विधायी एजेंडे पर
मानसून सत्र के दौरान योगी सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक बजट पेश करेगी. सरकार कई नए विधेयकों को पारित कराने के साथ पहले जारी किए गए अध्यादेशों को भी विधेयक के रूप में सदन में लाएगी. इसके अलावा विभिन्न विभागों की रिपोर्ट और संभल हिंसा से जुड़ी न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जा सकती है.
सरकार का प्रयास रहेगा कि विकास, कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण योजनाओं को प्रमुखता देकर अपने कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखा जाए.
विपक्ष के निशाने पर सरकार
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वे सरकार को कई संवेदनशील मुद्दों पर घेरेंगे. विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में किसानों, युवाओं, छात्रों और आम जनता से जुड़े सवालों की अनदेखी की जा रही है.
सपा बिजली संकट, खाद की उपलब्धता, बेरोजगारी, महंगाई और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है. साथ ही राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े विवाद को भी सदन में प्रमुख मुद्दा बनाया जा सकता है.
पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे पर होगी बहस
हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवाल मानसून सत्र में भी गूंज सकते हैं. विपक्ष का कहना है कि पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है.
छात्र आंदोलनों, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार से जवाब मांगे जाने की संभावना है. माना जा रहा है कि युवाओं से जुड़े मुद्दे चुनाव से पहले सबसे बड़े राजनीतिक हथियार बन सकते हैं.
26 हजार स्कूलों का मुद्दा गर्माएगा सदन
शिक्षा व्यवस्था भी इस बार सियासी बहस का बड़ा विषय बनने जा रही है. समाजवादी पार्टी का आरोप है कि सरकार ने स्कूलों के विलय की प्रक्रिया के दौरान 26 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद कर दिए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों पर असर पड़ा है.
विपक्ष यह भी दावा कर रहा है कि कई विद्यालयों में बिजली, पेयजल, शौचालय और कंप्यूटर जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है. शिक्षकों के रिक्त पदों और घटते छात्र नामांकन को भी विपक्ष सरकार के सामने प्रमुख मुद्दे के रूप में रखेगा.
बीजेपी भी करेगी पलटवार
सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए पूरी तैयारी में है. भाजपा नेताओं का कहना है कि 2017 के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है. सरकार अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और योजनाओं के जरिए विपक्ष के आरोपों को खारिज करने की कोशिश करेगी. भाजपा का फोकस यह संदेश देने पर रहेगा कि राज्य में विकास और सुशासन की गति लगातार बनी हुई है.
चुनाव से पहले बढ़ेगी राजनीतिक गर्मी
हालांकि मानसून सत्र केवल चार दिनों का है, लेकिन इसकी राजनीतिक अहमियत काफी अधिक मानी जा रही है. सत्ता और विपक्ष दोनों इसे जनता तक अपना संदेश पहुंचाने के मंच के रूप में देख रहे हैं. सदन के भीतर होने वाली बहसें आने वाले विधानसभा चुनाव के मुद्दों को भी प्रभावित कर सकती हैं.
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