केरल में बढ़ा ‘रैट फीवर’ का खतरा, 1352 मामले और 58 मौतें, मानसून में ऐसे करें बचाव
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, August 8, 2026
Updated On: Saturday, August 8, 2026
केरल में मानसून के बीच लेप्टोस्पायरोसिस यानी ‘रैट फीवर’ का खतरा बढ़ गया है. 29 जुलाई 2026 तक 1,352 कन्फर्म मामले और 58 मौतें दर्ज हुईं. दूषित पानी और मिट्टी इसका प्रमुख संक्रमण स्रोत हैं. तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखने पर सावधानी और समय पर इलाज जरूरी है.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Saturday, August 8, 2026
Rat Fever Kerala: केरल में मानसून के बीच लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ गया है. आम भाषा में इसे ‘रैट फीवर’ कहा जाता है. 29 जुलाई 2026 तक राज्य में इसके 1,352 कन्फर्म मामले और 58 मौतें दर्ज की गई थीं. बारिश, बाढ़ और जलभराव के दौरान दूषित पानी और मिट्टी के संपर्क में आने से संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है. ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं.
मजदूरों पर ज्यादा खतरा क्यों?
लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा उन लोगों में अधिक रहता है, जो खेतों, बगीचों, नालियों या जलभराव वाली जगहों पर काम करते हैं. 2025 के डेथ ऑडिट आंकड़ों में 40 से 69 वर्ष की उम्र के लोगों में इसका प्रभाव अधिक देखा गया. विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बीमारी की समय पर पहचान नहीं हो पाती, इसलिए वास्तविक मौतों का आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड से ज्यादा भी हो सकता है.
पांच साल में तेजी से बढ़ा संक्रमण
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2016-20 के दौरान केरल में लेप्टोस्पायरोसिस से 319 मौतें दर्ज हुई थीं. 2021-25 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 1,455 हो गया. इस दौरान बीमारी की मृत्यु दर भी बढ़ी. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती पहचान और सही उपचार मिलने पर गंभीर मामलों और मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
क्या है लेप्टोस्पायरोसिस?
यह Leptospira नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है. संक्रमित चूहे और दूसरे जानवर इसके प्रमुख वाहक हो सकते हैं. इनके पेशाब से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने पर बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है. कटे-फटे घाव, आंख, नाक या मुंह इसके प्रवेश के रास्ते बन सकते हैं. मानसून में बाढ़ और जलभराव के कारण यह जोखिम और बढ़ जाता है.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
शुरुआत में बीमारी सामान्य बुखार जैसी लग सकती है, लेकिन कुछ लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है.
- तेज बुखार और सिरदर्द
- पिंडलियों समेत मांसपेशियों में तेज दर्द
- ठंड लगना, कमजोरी और थकान
- उल्टी या मतली
- आंखों का लाल होना
गंभीर संक्रमण में किडनी और लिवर प्रभावित हो सकते हैं. पीलिया, सांस लेने में परेशानी और रक्तस्राव जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं.
मानसून में ऐसे करें बचाव
बाढ़ या गंदे पानी में अनावश्यक जाने से बचें. जरूरी होने पर गमबूट और दस्ताने पहनें तथा शरीर पर मौजूद घावों को ढककर रखें. जलभराव वाले इलाके से लौटने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह साफ करें और घर के आसपास चूहों की मौजूदगी को नियंत्रित करें. दूषित पानी के संपर्क के बाद बुखार या शरीर में तेज दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. किसी भी एंटीबायोटिक को बिना चिकित्सकीय सलाह के न लें.
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