देश विदेश में श्रीकृष्ण

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Published On: Monday, August 26, 2024

Last Updated On: Monday, August 26, 2024

lord krishna temple
lord krishna temple

श्रीकृष्णजन्माष्टमी...उल्लास और उत्साह का पर्व। भगवान श्रीकृष्ण सनातन का अभिन्न अंग हैं, लेकिन उनकी ग्लोबल इमेज भी बहुत सशक्त है। हर महाद्वीप में उनके भक्त हैं, मंदिर हैं और उनके प्रति अगाध आस्था भी। महाराष्ट्र के गोविंदा आला रे से लेकर वेस्टर्न वर्ल्ड में इस्कान के हरे रामा, हरे कृष्णा के संकीर्तन तक श्रीकृष्ण का स्वरूप सर्वव्याप्त है...

Authored By: अरुण श्रीवास्तव

Last Updated On: Monday, August 26, 2024

हैप्पी बर्थडे…जन्मदिन मनाने की परंपरा भारतीय समाज का अभिन्न अंग रही है, लेकिन अब बदलते समय के साथ हैप्पी बर्थडे वाला कल्चर डेवलप हो गया है। तिलक और दूध पिलाकर मनाया जाने वाला जन्मदिन बर्थडे बनकर उल्लास और जश्न का बड़ा अवसर बन गया है। इसे पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव कहा जा रहा है, कुछ इससे खुश हैं कुछ नाराज लेकिन बर्थडे तो बर्थडे है साहब और हम सनातनियों से बेहतर इसे मनाना कौन जानता है भला…दुनिया के सबसे बड़े बर्थडे हम सनातनी ही मनाते हैं चाहे वह श्रीरामनवमी (Shriramnavami) हो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami)। एक बार फिर हमारे कृष्णा का जन्मदिन आ गया है और यह एक ग्लोबल इवेंट की तरह सेलिब्रेट किया जाएगा। यही तो है भगवान श्रीकृष्ण यानी हमारे कृष्णा की सर्वव्यापकता। महाराष्ट्र का गोविंदा आला रहे हो या इस्कान का हरे रामा हरे कृष्णा…सांवले सलोने की माया से सब मोहित हैं। देश ही नहीं दुनिया भी कृष्ण पर मोहित है, उनकी लीलाओं पर मोहित है, उनके ज्ञान से अभिभूत है और उनकी कृपा से समृद्ध। पूरे विश्व में श्रीकृष्ण के 650 से अधिक मंदिर हैं। ये सभी श्रीकृष्णजन्माष्टमी पर अपने प्रिय आराध्य का श्रंगार करेंगे, पूजन करेंगे, नृत्य करेंगे और भक्ति में लीन हो जाएंगे। यूरोप में श्रीकृष्ण के 135 से अधिक मंदिर हैं। स्पेन, इटली, फ्रांस में आपको नाचते-गाते श्रीकृष्ण-राधा के भक्त मिल जाएंगे। ढोल-मंजीरों की थाप पर कृष्णगीत सुमधुर लगते हैं। रूस में भी 30 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिर हैं।

god krishna

अमेरिका में करीब सवा सौ श्रीकृष्ण मंदिर हैं। भौतिकवाद के सबसे बड़े केंद्र अमेरिका में श्रीकृष्ण की यह उपासना बताती है कि गोकुल का नटखट कन्हैया किस तरह दिलों को जीत लेता है। मायावी दुनिया में अपने को पहचानने की ताकत देता है, बुद्धि देता है। अफ्रीका भी श्रीकृष्ण के प्रभाव से अछूता नहीं है और एशिया व आस्ट्रेलिया का भी यही हाल है। सात महाद्वीप और हर जगह श्रीकृष्ण। श्रीमद्भगवतगीता मात्र एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, खुद को श्रेष्ठ मानने वाली पाश्चात्य सभ्यता के लिए जीवन को सीखने-समझने-जानने-मानने का गुरुमंत्र है। न जाने कितने विदेशी विद्वानों व आमजन ने श्रीमद्भगवतगीता को जीवन का सार बना लिया है। हो भी क्यों न…यह एक ग्रंथ है जो 18 अध्यायों में 700 श्लोक के माध्यम से मानव को जीवन जीने का सही तरीका बताता है। प्रबंधन संस्थानों में इससे सीख ली जाती है। इसे सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन पाठ कहा जाता है।

दरअसल श्रीकृष्ण एक भगवान के रूप में हर किसी को कुछ न कुछ शिक्षा देते हैं, तरीका बताते हैं। बालक के रूप में, किशोर के रूप में, प्रेमी के रूप में, युवा के रूप में, राजा के रूप में, सखा के रूप में, सलाहकार के रूप में, भाई के रूप में, पति के रूप में वह बहुत कुछ बताते हैं और बहुत प्रैक्टिकल तरीके से बताते हैं। सो आप भी इस श्रीकृष्णजन्माष्टमी पर अपने कन्हैया को थोड़ा और जानिए, मानिए और जीवन में उतारिये…बोलिए हाथी, घोड़ा, पालकी, जय कन्हैया लाल की..

अरुण श्रीवास्तव पिछले करीब 34 वर्ष से हिंदी पत्रकारिता की मुख्य धारा में सक्रिय हैं। लगभग 20 वर्ष तक देश के नंबर वन हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण में फीचर संपादक के पद पर कार्य करने का अनुभव। इस दौरान जागरण के फीचर को जीवंत (Live) बनाने में प्रमुख योगदान दिया। दैनिक जागरण में करीब 15 वर्ष तक अनवरत करियर काउंसलर का कॉलम प्रकाशित। इसके तहत 30,000 से अधिक युवाओं को मार्गदर्शन। दैनिक जागरण से पहले सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल (हिंदी), चाणक्य सिविल सर्विसेज टुडे और कॉम्पिटिशन सक्सेस रिव्यू के संपादक रहे। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, करियर, मोटिवेशनल विषयों पर लेखन में रुचि। 1000 से अधिक आलेख प्रकाशित।
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