BRICS में नया देश कैसे बनता है सदस्य? जानिए क्या है पूरी प्रक्रिया और पार्टनर कंट्री का नियम

Authored By: Nishant Singh

Published On: Thursday, September 3, 2026

Last Updated On: Thursday, September 3, 2026

BRICS Summit Delhi में नए देश की सदस्यता और Partner Country प्रक्रिया
BRICS Summit Delhi में नए देश की सदस्यता और Partner Country प्रक्रिया

BRICS Summit Delhi: ब्रिक्स में नए देशों की सदस्यता प्रक्रिया सर्वसम्मति पर आधारित है. इच्छुक देश को सभी मौजूदा पूर्ण सदस्यों की सहमति जरूरी होती है. जोहान्सबर्ग दिशानिर्देशों के तहत सदस्यता दी जाती है. वहीं पार्टनर कंट्री मॉडल देशों को व्यापार और आर्थिक सहयोग के जरिए ब्रिक्स से जुड़ने का अवसर देता है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Thursday, September 3, 2026

BRICS Summit Delhi: दुनिया की तेजी से बदलती राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच BRICS का दायरा लगातार बढ़ रहा है. भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. ऐसे में यह सवाल भी अहम हो जाता है कि आखिर कोई नया देश इस प्रभावशाली समूह का हिस्सा कैसे बनता है? BRICS Summit 2026 में सदस्यता के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसी कोई कठोर और विस्तृत नियमावली नहीं है, लेकिन इसकी प्रक्रिया कूटनीतिक सहमति और आपसी विश्वास पर आधारित है.

सर्वसम्मति है सदस्यता की सबसे बड़ी शर्त

BRICS में किसी नए देश को शामिल करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण नियम सर्वसम्मति यानी Consensus है. इच्छुक देश अपनी सदस्यता की इच्छा BRICS के सदस्य देशों या अध्यक्ष देश के सामने रखता है. इसके बाद उसकी उम्मीदवारी पर मौजूदा पूर्ण सदस्य आपस में चर्चा करते हैं.

यहां किसी एक देश की सहमति काफी नहीं होती. सभी मौजूदा पूर्ण सदस्यों का एकमत होना जरूरी है. यदि किसी उम्मीदवार के नाम पर किसी सदस्य देश को आपत्ति होती है, तो उसकी सदस्यता का रास्ता रुक सकता है. यही वजह है कि BRICS में विस्तार केवल संख्या बढ़ाने का मामला नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक और आर्थिक विचार-विमर्श की प्रक्रिया है.

जोहान्सबर्ग बैठक के बाद बनी स्पष्ट रूपरेखा

साल 2023 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुए BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान नए देशों को शामिल करने के लिए एक ढांचा तैयार किया गया. इसके तहत उम्मीदवार देशों की भूमिका, आर्थिक क्षमता और समूह के साथ सहयोग की संभावनाओं जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है.

जब सदस्य देश किसी नाम पर सहमत हो जाते हैं, तो उस देश को औपचारिक निमंत्रण दिया जाता है. निमंत्रण स्वीकार करने के बाद तय प्रक्रिया के अनुसार उसे BRICS का पूर्ण सदस्य बनाया जाता है और शिखर सम्मेलन के मंच से इसकी घोषणा की जाती है.

11 देशों तक पहुंच चुका है BRICS परिवार

BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के समूह के रूप में हुई थी. बाद में 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS बना. हाल के वर्षों में संगठन का विस्तार तेजी से हुआ है.

वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया. इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य बन गया. इस तरह BRICS के पूर्ण सदस्यों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है.

पार्टनर कंट्री क्या होती है?

पूर्ण सदस्यता की बढ़ती मांग को देखते हुए BRICS ने पार्टनर कंट्री का मॉडल भी तैयार किया. 2024 में रूस के कजान शिखर सम्मेलन के दौरान इस श्रेणी को आगे बढ़ाया गया. इसका उद्देश्य उन देशों को BRICS से जोड़ना है, जिन्हें तत्काल पूर्ण सदस्यता नहीं दी जा रही.

बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे देश पार्टनर कंट्री के रूप में BRICS के साथ जुड़े हुए हैं. इससे उन्हें व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के नए अवसर मिलते हैं.

पूर्ण सदस्य और पार्टनर देश में अंतर

पूर्ण सदस्य देशों को BRICS की नीति और भविष्य की दिशा तय करने में सीधी भूमिका मिलती है. वे महत्वपूर्ण बैठकों और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. दूसरी ओर, पार्टनर देशों की भागीदारी सीमित होती है और उन्हें चुनिंदा बैठकों में शामिल होने का अवसर मिलता है.

हालांकि, पार्टनर कंट्री का दर्जा भी काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह भविष्य में BRICS के साथ गहरे आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों का रास्ता खोल सकता है. बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी साफ दिखाती है कि BRICS अब केवल एक संगठन नहीं, बल्कि उभरती शक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच बनता जा रहा है.

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About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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