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World Heart Day: हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है ये संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Tuesday, September 29, 2026
Last Updated On: Tuesday, September 29, 2026
हार्ट अटैक हमेशा अचानक नहीं आता. शरीर पहले ही कई संकेत देता है, जिन्हें अक्सर गैस या थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. World Heart Day पर जानें वे जरूरी संकेत, जोखिम और बचाव के तरीके. पढ़ें पूरी खबर.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Tuesday, September 29, 2026
World Heart Day: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्व में सबसे ज्यादा मौतें हृदय रोग से होती हैं. हर साल लगभग एक करोड़ अस्सी लाख लोग इसकी वजह से अपनी जान गंवा देते हैं. क्या है इस बीमारी की असली वजह, कैसे करें इसका सामना और कैसे रहें सतर्क. जानते हैं पूरा सच…
विश्व हृदय दिवस (World Heart Day) की शुरुआत वर्ष 2000 में विश्व हृदय महासंघ (World Heart Day 2026) द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से की गई. इसका उद्देश्य हृदय रोगों और उनकी रोकथाम के लिए आवश्यक उपायों के बारे में वैश्विक जागरूकता पैदा करना था. यह दिन हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है, जो दुनिया भर के व्यक्तियों, स्वास्थ्य संगठनों और समुदायों को हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने और निवारक उपायों को प्रोत्साहित करने के लिए एक साथ लाता है.
हार्ट अटैक (heart attack) हमेशा अचानक तेज सीने के दर्द (heart disease) या बेहोशी के साथ ही नहीं आता. कई रोगियों में शरीर पहले ही संकेत देने लगता है, लेकिन इन्हें गैस, अपच, थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार करीब 70 से 80 फीसदी लोग शुरुआती वार्निंग सिग्नल को गंभीरता से नहीं लेते. यही लापरवाही उपचार में देरी और हार्ट की मांसपेशियों को ज्यादा नुकसान का कारण बन सकती है.
कम उम्र में भी स्वास्थ्य जांच जरूरी
कम उम्र में हार्ट अटैक(heart attack) के मामलों में पारिवारिक इतिहास भी महत्वपूर्ण जोखिम कारक हो सकता है. परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक हुआ हो तो नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है.
एक घंटे की देरी पड़ सकती है भारी
लक्षण शुरू होने के बाद शुरुआती समय उपचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. इसे आमतौर पर ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है. (heart attack prevention) इस दौरान उपचार मिलने से हृदय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है.
सीने में लगातार दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, अचानक कमजोरी या बेचैनी जैसे लक्षणों को तुरंत गंभीरता से लेना चाहिए. मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल नहीं जाना चाहिए.
कोविड के बाद आया सबसे बड़ा बदलाव
ओपीडी में अब कम उम्र के मरीज भी सामने आ रहे हैं. सबसे बड़ा बदलाव कोविड के बाद सामने आया है. पहले जहां हार्ट अटैक के मरीजों में 50 वर्ष से अधिक उम्र का वर्ग प्रमुख था, अब 20 से 50 वर्ष की उम्र के मरीज भी पहुंच रहे हैं.
जिन्हें पहले हृदय संबंधी बीमारी का कोई इतिहास नहीं रहा, युवाओं में धूम्रपान और तंबाकू के अलावा हाई बीपी, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, तनाव और स्वास्थ्यकर खाने की कमी जोखिम बढ़ाती है.
सीने के दर्द के बिना भी हो सकता है अलर्ट
- हार्ट अटैक (heart attack) से पहले सीने में दबाव, जकड़न या भारीपन, सांस फूलना, अचानक कमजोरी, ठंडा पसीना, बेचैनी, चक्कर या उल्टी जैसे लक्षण हो सकते हैं.
- कई बार नाभि के ऊपर या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द अथवा भारीपन महसूस होता है. दर्द बांह या दोनों हाथों, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक भी जा सकता है.
- इन लक्षणों को एसिडिटी मानकर दवा लेना खतरनाक हो सकता है. खासकर जब लक्षण शारीरिक मेहनत के दौरान बढ़ रहे हों.
हर बार बदल जाती है थीम
हर वर्ष यह दिन एक अलग थीम के साथ मनाया जाता है. इस बार इस दिन पर विश्व हृदय महासंघ ने “डोंट मिस ए बीट” थीम रखी है जिसमें काफी कुछ संकेत छुपे हैं. इस संदेश को दोहराया गया है कि हृदय रोग अक्सर गंभीर जटिलताओं का कारण बनने तक अनदेखा रह जाता है.
Written By: Rajiv Mandal
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