11 महीने बाद पटना लौटीं रोहिणी आचार्य, बिहार की राजनीति में अचानक क्यों बढ़ी हलचल?

Authored By: Galgotias Times Bureau

Published On: Tuesday, October 6, 2026

Last Updated On: Tuesday, October 6, 2026

रोहिणी आचार्य 11 महीने बाद पटना लौटीं
रोहिणी आचार्य 11 महीने बाद पटना लौटीं

करीब 11 महीने बाद रोहिणी आचार्य सिंगापुर से पटना लौट आई हैं. उनके बिहार पहुंचते ही राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. आखिर उनकी वापसी के पीछे क्या है वजह?

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Last Updated On: Tuesday, October 6, 2026

Rohini Acharya Returns: बिहार(Bihar) की राजनीति और लालू परिवार(Lallu Family) में सियासी हलचल कभी थमती नहीं दिखती. करीब 11 महीने बाद सिंगापुर से लौटीं रोहिणी आचार्य ने भले ही अपने दौरे को गैर-राजनीतिक बताया हो, लेकिन घटनाक्रम तेजी से राजनीतिक रंग ले रहा है. भाई तेजस्वी यादव से कथित मतभेद, सोशल मीडिया पर दूरी बनाने के पुराने पोस्ट और अब मामा साधु यादव का खुला समर्थन—इन सभी कड़ियों ने राजद और बिहार की सियासत में नए समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है. आइए विस्तार से जानते हैं क्या है पूरा मामला और इसके सियासी मायने.

क्या है पूरा मामला

लालू (Lallu) की बेटी रोहिणी आचार्य जब करीब 11 महीने बाद सिंगापुर से पटना लौटीं(Rohini Acharya Return to Patna)तो उन्होंने खुद कहा था कि उनके आने को राजनीतिक रंग न दिया जाए. उनका कहना था कि पिता लालू यादव ने बुलाया है और वह अपने मां-बाप से मिलने आई हैं. मगर राजनीति जितनी सरल और सहज दिखती है, वैसी दिखती नहीं. रोहिणी के आने से निसंदेह बिहार की राजनीति और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में भी उठापटक और सरगर्मी तेज होगी.

पटना लौटने के कुछ ही दिनों में घटनाक्रम जिस दिशा में बढ़ रहा है, उसने बिहार की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है. पहले लालू यादव का बुलावा, फिर परिवार के बीच उनकी वापसी और अब लंबे अरसे बाद मामा साधु यादव से मुलाकात. ऊपर से साधु यादव का यह कहना कि रोहिणी चुनाव लड़ेंगी और अगर छपरा से लड़ती हैं तो उन्हें उनका पूरा समर्थन रहेगा.

तेजस्वी से मतभेद के बाद चली गई थीं सिंगापुर

बता दें कि रोहिणी आचार्य पिछले करीब एक साल से सिंगापुर में थीं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव(Bihar election) के बाद उनके और तेजस्वी यादव के बीच कथित राजनीतिक और पारिवारिक मतभेद की चर्चा ने जोर पकड़ा था. उस दौरान रोहिणी ने सोशल मीडिया पर राजनीति और परिवार से दूरी बनाने से जुड़े पोस्ट भी किए थे. इस साल जुलाई में भी उन्होंने सारण के एक राजद नेता के निलंबन को लेकर पार्टी के भीतर के लोगों पर सवाल उठाए थे. यानी पटना से दूरी के बावजूद उनकी राजनीतिक दिलचस्पी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी.

साधु यादव से मुलाकात और बयान की चर्चा क्यों?

रोहिणी आचार्य(Rohini Acharya) ने अपने मामा और पूर्व सांसद साधु यादव से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद साधु यादव ने ऐसा बयान दिया, जिसने आरजेडी को लेकर बिहार की सियासत में नई राजनीति की चर्चा छेड़ दी है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में रोहिणी आचार्य चुनाव लड़ेंगी और लोकसभा पहुंचेंगी. मुलाकात के बाद साधु यादव ने कहा कि रोहिणी आचार्य से उनकी कभी दूरी नहीं रही. उन्होंने कहा कि रोहिणी अगर छपरा से लोकसभा चुनाव लड़ती हैं तो उनका पूरा समर्थन रहेगा. साधु यादव ने साफ तौर पर कहा कि वह रोहिणी के साथ खड़े रहेंगे.

Written By: Rajiv Mandal

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