भारत में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, फिर भी बेरोजगारी और आर्थिक असमानता बनी बड़ी चुनौती
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Saturday, October 31, 2026
Updated On: Saturday, October 31, 2026
विश्व बैंक की ओर से जारी ‘पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ’ (अक्टूबर 2026) के आंकड़े भारत की ऐतिहासिक आर्थिक उपलब्धि के बारे में बताते हैं. वर्ष 2011 से 2023 के बीच भारत ने 49.6 करोड़ (496 मिलियन) लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, जिससे निम्न-मध्यम आय रेखा (4.20 डॉलर प्रतिदिन) के नीचे रहने वाली आबादी 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत पर आ गई है. वहीं अति-गरीबी (3 डॉलर प्रतिदिन) भी 27.1 प्रतिशत से सिमटकर महज 2.6 प्रतिशत रह गई है. हालांकि, इस अभूतपूर्व प्रगति के बावजूद रिपोर्ट के आंकड़े चेतावनी भी देते हैं. श्रम बाजार में उत्पादकता की कमी, बढ़ती युवा बेरोजगारी, व्यापक आय असमानता और भौगोलिक रूप से केंद्रित गरीबी ऐसे प्रमुख मैट्रिक्स हैं, जिनमें संतोषजनक सुधारों की तत्काल दरकार है.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Updated On: Saturday, October 31, 2026
विश्व बैंक के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार में 13.4 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी प्रमुख रही, लेकिन इस बढ़त के साथ रोजगार की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल बने हुए हैं.
भौगोलिक और ग्रामीण स्तर पर सुधारों की दरकार
रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत में गरीबी का स्वरूप अब भौगोलिक रूप से केंद्रित होता जा रहा है. यद्यपि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर कम हुआ है, फिर भी ग्रामीण इलाकों में गरीबी दर 19.3 प्रतिशत है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.6 प्रतिशत ही है. उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैले निरंतर राज्य-बेल्ट में भारत की कुल गरीब आबादी का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है. ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता कम है और उच्च-गुणवत्ता वाले गैर-कृषि रोजगार अवसरों की उपलब्धता सीमित बनी हुई है. बिना शिक्षा वाली आबादी में गरीबी दर 21.3 प्रतिशत है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त आबादी में घटकर 7.4 प्रतिशत रह जाती है. ऐसे तो बहुआयामी गरीबी घटकर 2022-23 में 15.5 प्रतिशत पर आ गई है.
भारत में गरीबी की वर्षवार स्थिति
निम्न-मध्यम आय वर्ग की अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा : 4.20 डॉलर प्रतिदिन
- वर्ष 2011-12: गरीबी दर 57.7%
- वर्ष 2023-24: गरीबी दर 16.1%
ग्रामीण युवा महिलाओं में स्थिति अधिक गंभीर
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में युवा बेरोजगारी दर 14.6 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बढ़कर 15.9 प्रतिशत पर पहुंच गई. यह स्थिति ग्रामीण युवा महिलाओं में अधिक गंभीर है. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों की वास्तविक कमाई में कोई खास सुधार नहीं हुआ है, क्योंकि रोजगार वृद्धि मुख्य रूप से कम-उत्पादकता वाली गतिविधियों में केंद्रित रही है. वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में शीर्ष 10 प्रतिशत श्रमिकों की औसत कमाई सबसे निचले 10 प्रतिशत श्रमिकों की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक दर्ज की गई.
रोजगार एवं बेरोजगारी के आंकड़े
- 2017-2023 रोजगार में कुल वृद्धि: 13.4 करोड़
- FY2026 की पहली तिमाही युवा बेरोजगारी दर: 14.6%
- FY2027 की पहली तिमाही युवा बेरोजगारी दर: 15.9%
ग्रामीण और शहरी गरीबी की तुलना
- ग्रामीण भारत: गरीबी दर 19.3%
- शहरी भारत: गरीबी दर 8.6%
शिक्षा के आधार पर गरीबी
- बिना शिक्षा वाली आबादी: गरीबी दर 21.3%
- उच्च शिक्षा प्राप्त आबादी: गरीबी दर 7.4%
प्राथमिक शिक्षा का अभाव
लगभग 13.8% परिवार ऐसे हैं जिनमें किसी भी वयस्क ने प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं की है. 6.4% आबादी के पास स्वच्छ पेयजल की सीमित सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है. रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि केवल गरीबी दर में गिरावट ही अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकता. यदि भारत को 2028 तक मध्यम गरीबी को 12.1% के स्तर पर लाना है, तो नीतिगत सुधारों का मुख्य फोकस उच्च-उत्पादकता वाले रोजगार सृजन, कौशल विकास, विषमता को दूर करना होगा.
Written By: Rajiv Mandal
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