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‘लोकतंत्र की हल्दी घाटी बना रामलीला मैदान’, अखिलेश यादव का BJP पर हमला, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
Authored By: Mazhar Pathan
Published On: Sunday, November 1, 2026
Last Updated On: Sunday, November 1, 2026
दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए. नेताओं ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठाए. अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया.
Authored By: Mazhar Pathan
Last Updated On: Sunday, November 1, 2026
दिल्ली का रामलीला मैदान 1 नवंबर को विपक्षी राजनीति का बड़ा केंद्र बन गया. कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के कई बड़े नेता यहां एक मंच पर जुटे. रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की नाराजगी रहा. विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं और वोट काटे जाने के आरोप उठाए. इस दौरान राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खरगे और तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा
रामलीला मैदान में जुटे INDIA गठबंधन के बड़े नेता
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इस रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और बिहार के नेता तेजस्वी यादव सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए.
नेता पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पहुंचे. इसके बाद वे खुले वाहन से मिंटो रोड और कनॉट प्लेस की ओर गए और वहां से मार्च करते हुए रामलीला मैदान पहुंचे. रैली को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत आयोजित किया गया था.
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और SIR की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं. गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई.
अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ पर साधा निशाना
रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को भी एहसास है कि वोट कटे हैं. अखिलेश यादव ने रामलीला मैदान को लोकतंत्र की ‘हल्दी घाटी’ बताते हुए कहा कि 2027 में उत्तर प्रदेश में ऐसा बदलाव होगा कि बीजेपी दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाएगी. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के अंगद के पैर वाले बयान पर भी पलटवार किया. अखिलेश ने कहा कि जब जमीन ही नहीं बचेगी तो पैर कहां रखा जाएगा. उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति और 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है
खरगे बोले- मोदी को हटाएंगे, संविधान बचाएंगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी रैली में केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य सरकार को हटाने के साथ संविधान की रक्षा करना है. खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई. विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को रोकने में प्रभावी भूमिका नहीं निभा रहा है. हालांकि चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है.
तेजस्वी यादव ने ज्ञानेश कुमार पर की कार्रवाई की मांग
बिहार के नेता तेजस्वी यादव ने भी रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की. यह उनका राजनीतिक बयान था, न कि किसी अदालत का फैसला या स्थापित कानूनी निष्कर्ष. विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं. वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना और डुप्लीकेट या अपात्र नामों को हटाना है.
रैली से पहले कारोबारियों ने जताई थी चिंता
रामलीला मैदान में रैली को लेकर दिल्ली के कारोबारियों की चिंताएं भी सामने आईं. एनडीटीए अध्यक्ष अतुल भार्गव ने कहा कि त्योहारों के मौसम में बाजारों में खरीदारी प्रभावित होने से व्यापारियों को नुकसान हो सकता है. उनका कहना था कि कारोबारियों ने दीपावली के बाद रैली आयोजित करने की मांग की थी.
दूसरी ओर, बीजेपी सांसद रवि किशन ने कांग्रेस पर व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और गरीबों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. उन्होंने विपक्ष की रैली को लेकर भी सवाल उठाए. इस तरह आयोजन से पहले ही राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी.
चुनाव आयोग और SIR पर टिकी रही रैली
कुल मिलाकर रामलीला मैदान की रैली में विपक्ष ने चुनाव आयोग, मतदाता सूची और SIR को प्रमुख मुद्दा बनाया. INDIA गठबंधन के नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई, जबकि बीजेपी नेताओं ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए. इस रैली का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसमें कई विपक्षी दलों के बड़े नेता एक साथ नजर आए. हालांकि रैली में लगाए गए आरोपों और उनके जवाबों का अंतिम आकलन संबंधित तथ्यों, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है.













