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अंडा-चिकन से लेकर प्याज-लहसुन तक महंगा हुआ सामान, जुलाई में बढ़ी खुदरा महंगाई ने बढ़ाई आम आदमी की चिंता
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, August 13, 2026
Last Updated On: Thursday, August 13, 2026
India July Inflation: जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45 फीसदी हो गई. अंडा, चिकन, खाद्य तेल, प्याज, अदरक और लहसुन महंगे होने से खाद्य महंगाई बढ़ी. रेस्टोरेंट और होटल सेवाओं की कीमतों में भी इजाफा हुआ. अनियमित मानसून और कच्चे तेल की कीमतें आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, August 13, 2026
India July Inflation: देश में महंगाई को लेकर आम लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है. जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि जून में यह 4.38 फीसदी थी. यानी एक महीने के भीतर महंगाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है. महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में आया उछाल माना जा रहा है. रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजें महंगी होने से घरेलू बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.
खाने की थाली पर बढ़ा महंगाई का दबाव
जुलाई में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 5.52 फीसदी हो गई. अंडे, चिकन और खाने के तेल की कीमतों में तेजी ने खाद्य महंगाई को ऊपर खींचने में अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा सब्जियों और मसालों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली. मानसून के दौरान बारिश की स्थिति में बदलाव और सप्लाई प्रभावित होने से कई खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं.
खास तौर पर प्याज, अदरक और लहसुन की कीमतों में बढ़ोतरी ने रसोई का खर्च बढ़ा दिया है. इन चीजों का इस्तेमाल लगभग हर घर में रोजाना होता है, इसलिए इनके दाम बढ़ने का असर सीधे परिवारों के मासिक बजट पर दिखाई देता है.
बाहर खाना भी हुआ महंगा
महंगाई का असर केवल घर की रसोई तक सीमित नहीं रहा. बाहर खाना और होटल में ठहरना भी पहले की तुलना में महंगा हुआ है. रेस्टोरेंट और अकोमोडेशन से जुड़े सेगमेंट में जुलाई की महंगाई दर 7.72 फीसदी रही, जबकि जून में यह 6.91 फीसदी थी.
इसका मतलब है कि परिवार के साथ बाहर खाना, यात्रा के दौरान होटल में रुकना या रेस्तरां में भोजन करना अब जेब पर ज्यादा भार डाल सकता है. बढ़ती लागत का असर धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है.
महंगाई बढ़ने की बड़ी वजहें
जुलाई में कीमतों पर दबाव बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. इनमें खास तौर पर ये प्रमुख हैं:
- अनियमित मानसून: बारिश के उतार-चढ़ाव से कृषि उत्पादन और सप्लाई प्रभावित होने की आशंका रहती है.
- खाद्य वस्तुओं के दाम: अंडा, चिकन, खाने के तेल, प्याज, अदरक और लहसुन की कीमतों में तेजी आई.
- परिवहन लागत: कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च पर दबाव पड़ा.
- पर्सनल केयर उत्पाद: रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली व्यक्तिगत देखभाल की कुछ वस्तुएं भी महंगी हुईं.
- रेस्टोरेंट और होटल: इस क्षेत्र में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई.
राहत की बात, कोर महंगाई में बड़ा बदलाव नहीं
महंगाई बढ़ने के बावजूद अर्थव्यवस्था के लिए एक राहत वाली बात यह है कि कोर महंगाई में बड़ा बदलाव नहीं हुआ. जुलाई में यह करीब 3.8 से 4.3 फीसदी के दायरे में बनी रही. कोर महंगाई में खाद्य और ईंधन जैसी अस्थिर कीमतों को अलग रखकर बाकी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों का रुझान देखा जाता है.
इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल महंगाई का मुख्य दबाव खाने-पीने की वस्तुओं और ईंधन से जुड़ा हुआ है, न कि अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में एक समान कीमतें बढ़ रही हैं.
BofA ने जताई आगे महंगाई बढ़ने की आशंका
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म BofA Securities ने भी महंगाई को लेकर सावधानी बरतने का संकेत दिया है. उसके अनुमान के मुताबिक मानसून की असमान चाल और अल-नीनो से जुड़े जोखिमों के कारण खाद्य कीमतों पर आगे भी दबाव बन सकता है.
ऐसी स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर भी असर पड़ सकता है. अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में RBI ब्याज दरों में कुल 50 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी कर सकता है. हालांकि यह फिलहाल एक अनुमान है और वास्तविक फैसला महंगाई तथा आर्थिक परिस्थितियों को देखकर ही लिया जाएगा.
आम आदमी के लिए क्या है मतलब?
जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई का सबसे सीधा असर रोजमर्रा के खर्च पर पड़ रहा है. रसोई का बजट, बाहर खाना और यात्रा जैसी जरूरतों पर पहले से ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है. आने वाले महीनों में मानसून और खाद्य आपूर्ति की स्थिति यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि महंगाई का दबाव कम होता है या फिर आम लोगों की जेब पर बोझ और बढ़ता है.
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