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Indian Passport Rank: भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में गिरावट, टॉप-50 से बाहर हुआ भारत, जानिए किस देश का पासपोर्ट सबसे ताकतवर
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, July 24, 2026
Last Updated On: Friday, July 24, 2026
Indian Passport Rank: हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की नई रैंकिंग में भारतीय पासपोर्ट 81वें स्थान पर पहुंच गया है. अब भारतीय नागरिक 55 देशों में ही वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा का लाभ उठा सकते हैं. वहीं, सिंगापुर लगातार दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट बना हुआ है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, July 24, 2026
Indian Passport Rank: विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट केवल पहचान पत्र नहीं, बल्कि किसी देश की वैश्विक साख और उसके नागरिकों को मिलने वाली यात्रा की स्वतंत्रता का भी प्रतीक होता है. ऐसे में हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की ताजा रैंकिंग भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाली है. जुलाई 2026 में जारी नई सूची के अनुसार भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग पहले के मुकाबले और नीचे खिसक गई है. इससे यह साफ होता है कि भारतीय नागरिकों को बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल के साथ यात्रा करने वाले देशों की संख्या अभी भी सीमित है.
भारतीय पासपोर्ट क्यों हुआ कमजोर?
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के 20वें संस्करण में भारतीय पासपोर्ट 81वें स्थान पर पहुंच गया है. इससे पहले फरवरी 2026 की सूची में भारत 75वें स्थान पर था. नई रैंकिंग के अनुसार भारतीय नागरिक फिलहाल 55 देशों में ही वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं. रैंकिंग में गिरावट का मतलब यह है कि भारतीय यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा पहले की तुलना में कुछ अधिक सीमित हो गई है. हालांकि यह रैंकिंग समय-समय पर देशों की वीजा नीतियों और कूटनीतिक संबंधों के आधार पर बदलती रहती है.
कौन है दुनिया में नंबर-1?
इस बार भी सिंगापुर दुनिया के सबसे ताकतवर पासपोर्ट वाला देश बना हुआ है. सिंगापुर का पासपोर्ट रखने वाले नागरिक बिना पहले से वीजा लिए 192 देशों की यात्रा कर सकते हैं. दूसरे स्थान पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जापान और दक्षिण कोरिया हैं, जिनके नागरिक 188 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा प्राप्त करते हैं. दूसरी ओर, सूची में सबसे नीचे अफगानिस्तान का नाम है, जहां के नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा के विकल्प सबसे सीमित हैं.
क्या कहते हैं पिछले दो दशक के आंकड़े?
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के अनुसार पिछले 20 वर्षों में वैश्विक यात्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है. वर्ष 2006 में भारतीय पासपोर्ट 71वें स्थान पर था, जबकि 2021 में यह गिरकर 91वें स्थान तक पहुंच गया था. इसके बाद कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन ताजा रैंकिंग में फिर गिरावट दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि पासपोर्ट की रैंक किसी देश के कूटनीतिक संबंधों, वीजा समझौतों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी दर्शाती है. ऐसे में भविष्य में भारत यदि अधिक देशों के साथ वीजा समझौते करता है, तो उसकी रैंकिंग में दोबारा सुधार देखने को मिल सकता है.
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