ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric Mobility Ltd) को पहली तिमाही में 428 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. इसके बावजूद पिछले दो दिन में कंपनी के शेयर 22 फीसदी चढ़ गए हैं.
ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric Mobility Ltd) को इस वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 428 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. इसके बावजूद पिछले दो दिन में कंपनी के शेयर करीब 22 फीसदी चढ़ गए हैं. शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर ओला शेयर 39.76 रुपये पर बंद हुआ था. इसके बाद सोमवार को यह करीब 18 फीसदी की शानदार उछाल के साथ 47.07 रुपये पर बंद हुआ था. मंगलवार को यह शेयर 48.40 रुपये पर खुला और कारोबार के दौरान बढ़ते हुए 48.90 रुपये तक पहुंच गया. इस तरह दो दिन में ही इस शेयर में करीब 23 फीसदी की शानदार उछाल देखी गई. हालांकि मंगलवार को दोपहर में इसमें कुछ मुनाफावसूली देखी जा रही है और शेयर टूटकर 45 रुपये के आसपास आ गया है.
क्यों चढ़े शेयर
ओला इलेक्ट्रिक के हाल में आए नतीजे के अनुसार कंपनी को जून में खत्म तिमाही में 428 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हआ है. यह घाटा एक साल पहले की समान तिमाही में हुए 347 करोड़ रुपये के घाटे से करीब 27 फीसदी ज्यादा है. यानी कंपनी के घाटे में अच्छी बढ़त हुई है. हालांकि कंपनी का कहना है कि यह वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही यानी मार्च में खत्म तिमाही में हुए 870 करोड़ रुपये के घाटे से काफी कम है. जून तिमाही के दौरान कंपनी की कामकाजी आय करीब 50 फीसदी घटकर 828 करोड़ रुपये रह गई. पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी की आय 1,644 करोड़ रुपये थी. हालांकि वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में हुई 611 करोड़ रुपये से तुलना करें तो कंपनी की आय में सुधार हुई है. कंपनी की व्हीकल डिलिवरी की संख्या भी घटकर पहली तिमाही में महज 68,192 यूनिट रह गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 1,25,198 यूनिट थी. इसके बावजूद निवेशक ग्रॉस मार्जिन में सुधार से उत्साहित लग रहे हैं. कंपनी की ग्रॉस मार्जिन पिछले साल की समान तिमाही के 18.4% के मुकाबले बढ़कर रिकॉर्ड 25.8% तक पहुंच गई है. ग्रॉस मार्जिन बढ़ने का मतलब यह है कि कंपनी ने लागत पर बेहतर नियंत्रण किया है और कामकाज में सुधार हुआ है. कंपनी ने अपने प्रोजेक्ट लक्ष्य के तहत लागत पर काफी नियंत्रण किया है. इसके अलावा कंपनी का जून में एबिट्डा पॉजिटिव रहा है.
गाइडेंस ने किया प्रभावित
ओला ने वित्त वर्ष 2026 के लिए जो अनुमान जारी किए हैं उससे भी निवेशक काफी प्रभावित दिख रहे हैं. कंपनी ने कहा है कि पीएलआई से मिले प्रोत्साहनों की वजह से वित्त वर्ष 26 में मार्जिन 35 से 40 फीसदी तक पहुंच सकता है और कंपनी का लक्ष्य दूसरी तिमाही के बाद एबिट्डा को पॉजिटिव बनाए रखना है. कंपनी ने ऐसे मोटर पेश किए हैं जिनमें रेयर अर्थ की जरूरत नहीं होती. इससे सप्लाई चेन की चिंता लॉन्ग टर्म के लिए दूर हो सकती है.