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‘लट्ठ भांज रहे हैं अखिलेश’ केशव मौर्य के बयान से गरमाई सियासत, ‘सपा का बिहार में सूखा, फिर भी कर रहे तमाशा’
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, November 6, 2025
Last Updated On: Thursday, November 6, 2025
बिहार चुनावी रण में अब जुबानी जंग तेज हो गई है. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर करारा तंज कसते हुए कहा - “न तीन में हैं, न तेरह में... फिर भी लट्ठ भांज रहे हैं.” बिहार में सपा की न के बराबर मौजूदगी के बावजूद अखिलेश के प्रचार अभियान पर मौर्य का यह बयान सियासत में नई हलचल मचा रहा है. जानिए इस बयान के पीछे की पूरी कहानी और इसका राजनीतिक असर.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, November 6, 2025
Keshav Mauryas Statement: राजनीति में तंज और जवाबी तंज का खेल कभी खत्म नहीं होता. बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के बीच अब उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया है. उनके बयान ने सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल मचा दी है.
“न तीन में, न तेरह में…” – मौर्य का करारा बयान
बिहार में चुनावी सरगर्मी के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा –
“बिहार के चुनावी पर्व में सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव नाहक ही अपना लट्ठ भांज रहे हैं. हकीकत यह है कि इस चुनाव में उनकी सपा न तीन में है और न ही तेरह में, और उनकी पार्टी के लिए दूर-दूर तक सूखा ही सूखा है.”
यह बयान उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ पर पोस्ट किया. मौर्य का इशारा साफ था – समाजवादी पार्टी का बिहार की राजनीति में कोई खास वजूद नहीं है, फिर भी अखिलेश यादव प्रचार में जुटे हुए हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल में तीखापन घोल दिया है.
बिहार चुनाव में सपा की एंट्री – सिर्फ दिखावे के लिए?
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग जारी है और तमाम दल अपनी-अपनी ताकत झोंक रहे हैं. मगर केशव प्रसाद मौर्य के मुताबिक, समाजवादी पार्टी का बिहार की सियासत में कोई ठोस आधार नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सपा का यहां “नाम तक लेने वाला नहीं”, फिर भी अखिलेश यादव लगातार रैलियों और बैठकों में नजर आ रहे हैं. राजनीतिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सपा की बिहार में जमीनी पकड़ कमजोर है. ऐसे में अखिलेश यादव की मौजूदगी को सिर्फ “राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश” बताया जा रहा है.
पटना एयरपोर्ट पर ‘मुलाकात’ ने बढ़ाई चर्चा
जहां एक तरफ मौर्य और अखिलेश एक-दूसरे पर तंज कस रहे हैं, वहीं पटना एयरपोर्ट पर दोनों की मुलाकात ने सोशल मीडिया पर नई कहानी गढ़ दी. मंगलवार को दोनों नेता एक साथ एयरपोर्ट पर दिखाई दिए. दोनों ने हाथ मिलाया, मुस्कुराए, और वही पल कैमरे में कैद हो गया. तस्वीरें सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गईं. लोग हैरान थे कि जो दो नेता एक-दूसरे पर बयानबाजी करते नहीं थकते, वो एक साथ इतने सहज कैसे दिखे?
इस मुलाकात पर कुछ यूजर्स ने लिखा – “सियासत में कोई दुश्मनी नहीं, बस मौके की बात है.”
वहीं कुछ ने इसे “राजनीतिक ड्रामा” बताया. कुल मिलाकर, यह तस्वीर चुनावी माहौल में नई बहस छेड़ गई.
पुरानी है अखिलेश-मौर्य की जुबानी जंग
यह पहला मौका नहीं है जब केशव प्रसाद मौर्य और अखिलेश यादव आमने-सामने आए हों.
दोनों नेताओं के बीच अक्सर राजनीतिक जुबानी जंग देखने को मिलती है –
- कभी यूपी की कानून व्यवस्था पर,
- कभी विपक्ष की भूमिका पर,
- तो कभी चुनावी रणनीतियों पर.
दोनों के बीच सोशल मीडिया पर भी कई बार तीखे शब्दों का आदान-प्रदान हो चुका है. मगर दिलचस्प यह है कि हर बार यह राजनीतिक नोकझोंक जनता के बीच खूब सुर्खियां बटोरती है.
मौर्य की जनता से अपील – “पहले मतदान, फिर जलपान”
अखिलेश यादव पर हमला बोलने के साथ ही केशव प्रसाद मौर्य ने बिहार की जनता से मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील भी की.
उन्होंने कहा -“विकसित और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण के लिए पहले मतदान, फिर जलपान करें. मजबूत लोकतंत्र और सशक्त बिहार के लिए आप सभी अपने मताधिकार का सदुपयोग करें. आइए, एकजुट होकर फिर से एनडीए समर्थित सुशासन की सरकार बनाएं.”
मौर्य का यह बयान बिहार में एनडीए के समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने जनता को यह संदेश देने की कोशिश की कि विकास की रफ्तार तभी बढ़ेगी जब एनडीए फिर से सत्ता में आए.
सियासी समीकरण और माहौल
बिहार चुनाव का यह दौर बेहद दिलचस्प है. एनडीए, महागठबंधन और अन्य दलों के बीच सियासी मुकाबला तेज हो चुका है. जहां भाजपा अपने संगठन और केंद्र की नीतियों पर भरोसा दिखा रही है, वहीं सपा जैसी पार्टियां अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में लगी हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव बिहार में ज्यादा वोट तो नहीं जुटा पाएंगे, लेकिन उनकी मौजूदगी से विपक्षी एकता का संदेश जरूर जा सकता है. वहीं केशव प्रसाद मौर्य जैसे नेता इस मौके को भाजपा के लिए सियासी बढ़त में बदलने की कोशिश कर रहे हैं.
सियासी वार-पलटवार का अंत नहीं
बिहार की राजनीति में अब सिर्फ वोटिंग नहीं, बल्कि बयानों की जंग भी जोरों पर है. केशव प्रसाद मौर्य का “न तीन में, न तेरह में…” वाला तंज अखिलेश यादव पर जरूर भारी पड़ा है, लेकिन सियासत में पलटवार की कोई कमी नहीं रहती. अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव इस बयान का क्या जवाब देते हैं और बिहार की सियासत में ये बयानबाज़ी किस ओर करवट लेती है. क्योंकि भारतीय राजनीति में – “जो बोलेगा वही ट्रेंड करेगा, और जो चुप रहेगा, वही हारेगा.”
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