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अग्निवीरों का पहला बैच पूरा करेगा 4 साल, अब सेना के सामने रिटेंशन और रोजगार की बड़ी चुनौती
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, August 14, 2026
Last Updated On: Friday, August 14, 2026
अग्निपथ योजना का पहला अग्निवीर बैच चार साल की सेवा पूरी करने जा रहा है. नौसेना के करीब 2,600 अग्निवीरों के सामने अब स्थायी सेवा या नई नौकरी का विकल्प होगा. अधिकतम 25% को नियमित किया जा सकता है, जबकि बाकी को सेवा निधि और सुरक्षा बलों में रोजगार के अवसर मिलेंगे.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, August 14, 2026
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों का पहला बैच (Agniveer First Batch) अब चार साल की सेवा पूरी करने के करीब है. यह सिर्फ जवानों के लिए आगे की राह तय करने का समय नहीं, बल्कि सरकार और तीनों सेनाओं के लिए भी इस योजना की पहली बड़ी परीक्षा है. खासकर नौसेना में करीब 2,600 अग्निवीरों का पहला बैच इस चरण में पहुंच चुका है.
नौसेना से शुरू हुआ था अग्निपथ का पहला सफर
अग्निपथ योजना के तहत भारतीय नौसेना ने सबसे पहले अग्निवीरों को प्रशिक्षण देना शुरू किया था. नवंबर 2022 में पहला बैच INS चिल्का पहुंचा था. इसके बाद मार्च 2023 में करीब 2,600 अग्निवीरों ने 16 सप्ताह का बुनियादी प्रशिक्षण पूरा किया. इनमें महिला अग्निवीर भी शामिल थीं. 28 मार्च 2023 को INS चिल्का में अग्निवीरों की पहली पासिंग-आउट परेड हुई थी.
अब वही बैच चार साल की निर्धारित सेवा पूरी करने जा रहा है. इसलिए नौसेना के लिए यह देखना अहम होगा कि इस मॉडल से मिले अनुभव को आगे की भर्ती और प्रशिक्षण व्यवस्था में किस तरह इस्तेमाल किया जाए.
सबसे बड़ा सवाल- कितनों को मिलेगी स्थायी नौकरी?
अग्निपथ योजना की मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक चार साल की सेवा पूरी होने के बाद प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है. हालांकि, स्थायी नौकरी अपने आप मिलने का अधिकार नहीं है. चयन सेवा के दौरान प्रदर्शन, संबंधित बल की जरूरत और तय मानकों के आधार पर किया जाता है.
यानी बड़ी संख्या में अग्निवीरों को चार साल बाद सेना से बाहर होकर अपने करियर का अगला रास्ता तलाशना होगा. यही स्थिति अब इस योजना के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर रही है.
25 प्रतिशत की सीमा बढ़ेगी या नहीं?
पहले बैच के अनुभव के बीच ऐसी चर्चाएं सामने आई हैं कि तीनों सेनाएं मौजूदा 25 प्रतिशत रिटेंशन सीमा में बदलाव की जरूरत पर विचार कर रही हैं. हालांकि, फिलहाल इस सीमा को बढ़ाने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
नौसेना के मामले में यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण है. अग्निवीरों को हथियार प्रणालियों, सेंसर, संचार उपकरण और समुद्री ऑपरेशन से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है. चार साल में तैयार हुए अनुभवी कर्मियों को बड़ी संख्या में बाहर करना और फिर नए युवाओं को उसी स्तर तक प्रशिक्षित करना समय और संसाधन दोनों की मांग करता है.
जो बाहर जाएंगे, उनके लिए क्या व्यवस्था?
चार साल बाद नियमित सेवा में जगह नहीं पाने वाले अग्निवीरों को सेवा निधि पैकेज मिलेगा. इसके अलावा उनके लिए सेना से बाहर रोजगार के कई रास्ते तैयार किए जा रहे हैं. केंद्र ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स में पूर्व अग्निवीरों के लिए भर्ती में आरक्षण और आयु संबंधी राहत जैसे प्रावधान किए हैं.
राज्य स्तर पर भी कई सरकारों ने पूर्व अग्निवीरों के लिए पुलिस, फायर सर्विस, जेल विभाग और दूसरी वर्दी वाली नौकरियों में अवसर देने की व्यवस्था की है. इसके अलावा रक्षा क्षेत्र से जुड़े संस्थानों, तटरक्षक बल और कुछ अन्य सरकारी सेवाओं में भी उनके लिए प्राथमिकता के रास्ते बनाए गए हैं.
राज्यों में पूर्व अग्निवीरों के लिए अवसर
- उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात में राज्य की वर्दी वाली सेवाओं में आरक्षण या प्राथमिकता के प्रावधान हैं.
- उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, ओडिशा और असम में भी पूर्व अग्निवीरों के लिए भर्ती के अवसर बढ़ाए गए हैं.
- CAPFs और असम राइफल्स में भी पूर्व अग्निवीरों के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं.
सेना और वायुसेना की बारी अभी बाकी
नौसेना के बाद अब सेना और वायुसेना के पहले बैच भी आने वाले वर्षों में इसी चरण तक पहुंचेंगे. वायुसेना के पहले अग्निवीरवायु बैच ने दिसंबर 2022 में प्रशिक्षण शुरू किया था, जबकि सेना का पहला बैच 2027 के आसपास चार साल की अवधि पूरी करेगा.
इसलिए नौसेना का पहला एग्जिट चक्र बाकी दोनों सेवाओं के लिए भी एक तरह का अनुभव बनेगा. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि चार साल की सेवा, प्रशिक्षण और उसके बाद रिटेंशन की व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है.
अग्निपथ के भविष्य का फैसला करेगा पहला बैच
पहले अग्निवीर बैच के लिए आने वाला समय बेहद अहम है. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने जवान स्थायी होंगे, बल्कि यह भी है कि चार साल की सेवा के बाद बाहर निकलने वाले युवाओं को कितनी आसानी से नई नौकरी मिलती है.
अगर पूर्व अग्निवीर सुरक्षा बलों, पुलिस और निजी क्षेत्र में अपनी सैन्य ट्रेनिंग का सफल इस्तेमाल कर पाते हैं, तो यह अग्निपथ मॉडल की बड़ी उपलब्धि होगी. वहीं, अगर बड़ी संख्या में युवाओं के सामने रोजगार की चुनौती खड़ी होती है, तो सरकार को व्यवस्था में बदलाव पर विचार करना पड़ सकता है.













