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एयरलाइन पायलट आखिर क्यों छुपाते हैं अपनी मेंटल हेल्थ? स्टडी में खुल गया बड़ा राज
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Thursday, December 4, 2025
Last Updated On: Thursday, December 4, 2025
एयरलाइन पायलट दिखते भले ही आसमान में उड़ते सुपरहीरो जैसे हों, लेकिन उनकी असल जिंदगी मानसिक दबावों से भरी है और वो इसे छुपाते हैं. रॉयटर्स की एक गहन जांच में सामने आया है कि हजारों पायलट अपनी मेंटल हेल्थ से जुड़ी दिक्कतें सिर्फ इसलिए छिपाते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि मदद लेने का मतलब होगा लाइसेंस रद्द, करियर खत्म और महीनों की ग्राउंडिंग. यह छुपाव सिर्फ पायलटों की परेशानी नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Thursday, December 4, 2025
Airline Pilots Mental Health: दूर से देखने पर एयरलाइन पायलट की जिंदगी बेहद चमकदार लगती है. कॉकपिट में बैठा एक आत्मविश्वासी चेहरा, हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ान और दुनिया भर की यात्राएं. लेकिन रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट बताती है कि इस खूबसूरत तस्वीर के पीछे एक गहरी खामोशी छिपी है. पायलटों को FAA के कड़े मेडिकल नियमों का सामना करना पड़ता है, जहां छोटी-सी मानसिक दिक्कत भी उनके करियर पर ब्रेक लगा सकती है. यही वजह है कि कई पायलट एंग्जायटी, स्ट्रेस या डिप्रेशन जैसी समस्याओं को रिपोर्ट करने से डरते हैं.
तीन दर्जन से ज्यादा पायलटों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के इंटरव्यू से पता चला कि थेरेपी लेने, दवा खाने या सिर्फ मदद मांगने भर से भी उनका फ्लाइंग लाइसेंस खतरे में पड़ सकता है. कई पायलटों ने बताया कि वे मानसिक समस्याओं का सामना करते हुए भी चुप रहते हैं, क्योंकि ग्राउंडेड होने और महंगे मेडिकल रिव्यू की आशंका उनका करियर दांव पर लगा देती है. एयरलाइंस भले ही पीयर सपोर्ट और काउंसलिंग उपलब्ध करा रही हों, लेकिन पायलटों के मन में मौजूद स्टिग्मा और नियमों का डर आज भी उतना ही गहरा है.
पायलट अपनी मेंटल हेल्थ क्यों छिपाते हैं?
रॉयटर्स ने अमेरिका और कई दूसरे देशों की एयरलाइनों के 24 से ज्यादा कमर्शियल पायलटों से बात की. सभी ने एक ही बात कही- वे अपनी मेंटल हेल्थ की दिक्कतों के बारे में खुलकर नहीं बताते. वजह है डर. उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने सच बता दिया तो उन्हें तुरंत ग्राउंड कर दिया जाएगा. मेडिकल रिव्यू लंबा हो सकता है और खर्चा भी बहुत आता है. कई पायलटों को डर है कि कहीं उनका करियर ही खत्म न हो जाए.
पायलटों ने रॉयटर्स को बताया कि मेंटल हेल्थ छिपाने के पीछे कई वजहें हैं एयरलाइन की पॉलिसी, सख्त रेगुलेटरी रूल्स और समाज में मानसिक बीमारियों को लेकर बना डर. यह सिर्फ एक निजी समस्या नहीं है. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह आदत पायलटों के लिए तो नुकसानदायक है ही, यात्रियों की सुरक्षा पर भी असर डाल सकती है.
FAA यानी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन कहता है कि वह पायलटों की मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता देता है. वह समय-समय पर अपने नियमों को अपडेट भी कर रहा है. लेकिन असल तस्वीर यह दिखाती है कि अभी भी बदलाव की जरूरत है और पायलट खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते.
कॉन्फिडेंशियल पीयर सपोर्ट प्रोग्राम
कई बड़ी अमेरिकी एयरलाइनों की तरह डेल्टा भी अपने पायलटों को कॉन्फिडेंशियल पीयर सपोर्ट और काउंसलिंग सर्विस देती है. हाल ही में उसने एक नया एम्प्लॉई असिस्टेंस प्रोग्राम भी शुरू किया है. इसमें पायलट थेरेपी और कोचिंग ले सकते हैं और उनकी मेडिकल सर्टिफिकेशन जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है.
डेल्टा ने कहा है कि वह पायलटों के लिए और बेहतर समाधान देने की कोशिश लगातार जारी रखेगा. आमतौर पर दूसरी इंडस्ट्रीज़ में लोग बिना किसी डर के मेडिकल या साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट लेते हैं. लेकिन पायलटों के साथ स्थिति अलग है. अगर कोई पायलट एंग्जायटी या डिप्रेशन की रिपोर्ट करता है, तो उसे ग्राउंड किया जा सकता है. हल्के मामलों में वापसी जल्दी हो सकती है, लेकिन गंभीर मामलों में FAA की लंबी जांच पड़ताल होती है, जिसमें एक साल या उससे ज्यादा समय लग सकता है.
FAA क्या कहता है?
FAA का कहना है कि वह पायलटों की मेंटल हेल्थ को पूरी गंभीरता से लेता है. वह लगातार अपने तरीकों और दिशा-निर्देशों को मेडिकल साइंस के हिसाब से अपडेट कर रहा है. इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि कई पायलट सिर्फ इसलिए अपनी मानसिक परेशानी छिपाते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि वे उड़ान भरने के लायक नहीं समझे जाएंगे. उनका लाइसेंस खतरे में पड़ सकता है और नौकरी भी जा सकती है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह डर कहीं बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है. अगर पायलट मानसिक रूप से मजबूत न हों, तो इसका असर यात्रियों की सुरक्षा पर पड़ सकता है.
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