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Indian Army Day 2026: 15 जनवरी को क्यों मनाया जाता है सेना दिवस, इतिहास, थीम और महत्व
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, January 14, 2026
Last Updated On: Wednesday, January 14, 2026
Indian Army Day 2026: 15 जनवरी को मनाया जाने वाला भारतीय सेना दिवस देश की सुरक्षा में समर्पित वीर जवानों के शौर्य और बलिदान को नमन करने का दिन है. भूमिका के तौर पर, यह दिवस हमें याद दिलाता है कि 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा ने स्वतंत्र भारत की सेना की कमान संभाली थी. Indian Army Day 2026 सेना की गौरवशाली परंपरा, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना का प्रतीक है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, January 14, 2026
Indian Army Day 2026: हर साल 15 जनवरी का दिन भारत के इतिहास में गर्व, सम्मान और आत्मसम्मान की एक नई कहानी लेकर आता है. यह दिन उन वीर सपूतों को समर्पित होता है, जो सीमा पर खड़े होकर देश की एक-एक सांस की रक्षा करते हैं. भारतीय सेना दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस त्याग, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा का उत्सव है, जिसने भारत को सुरक्षित और संप्रभु बनाए रखा है. साल 2026 में भारत अपना 78वां भारतीय थल सेना दिवस मना रहा है, जो अपने आप में सेना की गौरवशाली यात्रा की एक मजबूत कड़ी है.
15 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है भारतीय सेना दिवस?
भारतीय सेना दिवस की तारीख यूं ही तय नहीं की गई. 15 जनवरी 1949 को भारत के सैन्य इतिहास में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ था. इसी दिन फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के आखिरी कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी. इसके साथ ही आज़ाद भारत को पहली बार अपना भारतीय सेनाध्यक्ष मिला. यह पल केवल पदभार ग्रहण का नहीं, बल्कि भारत की सैन्य संप्रभुता का प्रतीक था, और इसी याद में हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है.
भारतीय सेना दिवस का ऐतिहासिक महत्व
15 जनवरी 1949 वह दिन था, जब भारतीय सेना पूरी तरह भारतीय नेतृत्व के हाथों में आई. आज़ादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी सीमाओं की सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता. उस दौर में सेना ने न सिर्फ सीमाओं की रक्षा की, बल्कि देश को एकजुट रखने में भी अहम भूमिका निभाई. सेना दिवस हमें याद दिलाता है कि भारतीय सेना ने आज़ादी के शुरुआती वर्षों से लेकर आज तक हर परिस्थिति में देश का साथ निभाया है.
भारतीय सेना दिवस 2026: 78 साल की गौरवशाली यात्रा
साल 2026 में भारतीय थल सेना अपने 78वें स्थापना दिवस का जश्न मना रही है. हालांकि भारतीय सेना की औपचारिक स्थापना 1 अप्रैल 1895 को ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी, लेकिन 1949 में इसे एक स्वतंत्र और पूर्ण भारतीय पहचान मिली. इन 78 वर्षों में सेना ने तकनीक, प्रशिक्षण और रणनीति—हर मोर्चे पर खुद को लगातार मजबूत किया है और विश्व की सबसे सक्षम सेनाओं में अपनी जगह बनाई है.
Army Day Parade 2026: पहली बार जयपुर में ऐतिहासिक आयोजन
भारतीय सेना दिवस 2026 की एक खास बात यह है कि इस साल आर्मी डे परेड जयपुर में आयोजित की जा रही है. राजस्थान की राजधानी जयपुर में महल रोड पर होने वाली यह परेड सैन्य परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम होगी. यह दिल्ली से बाहर होने वाली चौथी आर्मी डे परेड है और राजस्थान में पहली बार यह गौरवपूर्ण आयोजन हो रहा है. परेड में सेना की आधुनिक हथियार प्रणाली, तकनीकी ताकत और जवानों का अनुशासन देखने को मिलेगा.
Army Day 2026 की थीम: शौर्य और बलिदान की परंपरा
भारतीय थल सेना दिवस 2026 की थीम है “भारतीय सेना: शौर्य एवं बलिदान की परंपरा”. यह थीम सेना के उस मूल स्वभाव को दर्शाती है, जिसमें साहस और बलिदान पीढ़ियों से रचा-बसा है. इससे पहले 2025 में पुणे में सेना दिवस मनाया गया था, जबकि 2024 की थीम “राष्ट्र की सेवा में” रही थी. हर साल की थीम सेना की सोच और प्राथमिकताओं को समाज के सामने रखती है.
फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा: भारतीय सेना के शिल्पकार
फील्ड मार्शल कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा भारतीय सेना के इतिहास का एक चमकता नाम हैं. 28 जनवरी 1899 को कर्नाटक में जन्मे करिअप्पा स्वतंत्र भारत के पहले कमांडर-इन-चीफ बने. 1947-48 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने भारतीय सेना का सफल नेतृत्व किया. उन्हें 1986 में फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई. उनका जीवन अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का आदर्श उदाहरण है.
भारतीय सेना: दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में एक
भारतीय थल सेना विश्व की दूसरी सबसे बड़ी थल सेना मानी जाती है. यह सेना न केवल संख्या में बड़ी है, बल्कि तकनीक और प्रशिक्षण के मामले में भी अग्रणी है. सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र पर तैनाती भारतीय सेना की क्षमता का प्रमाण है. 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर तैनात जवान विपरीत हालात में भी डटे रहते हैं.
भारतीय सेना की सात कमानें
भारतीय थल सेना को सात प्रमुख कमानों में बांटा गया है, जिनका मुख्यालय देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित है. लखनऊ की केंद्रीय कमान से लेकर कोलकाता की पूर्वी कमान तक, हर कमान अपनी भौगोलिक जिम्मेदारी निभाती है. यह संरचना सेना को तेज़ और प्रभावी निर्णय लेने में मदद करती है.
युद्ध से आपदा तक: हर मोर्चे पर सेना
भारतीय सेना ने अब तक पांच बड़े युद्ध लड़े हैं चार पाकिस्तान के साथ और एक चीन के साथ. लेकिन सेना की भूमिका सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है. प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, भूकंप और आंतरिक अशांति के समय भी सेना सबसे पहले मदद के लिए आगे आती है. यही कारण है कि सेना को देश की सबसे भरोसेमंद संस्था माना जाता है.
भारतीय सेना का आदर्श वाक्य
भारतीय थल सेना का आदर्श वाक्य है- “सर्विस बिफोर सेल्फ”, यानी “स्वयं से पहले सेवा”. यह वाक्य सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हर सैनिक की सोच और जीवन का आधार है. यही भावना भारतीय सेना को बाकी सेनाओं से अलग बनाती है.















