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भाजपा अध्यक्षों का सफर: अब तक कौन-कौन बना राष्ट्रीय अध्यक्ष और नितिन नबीन को क्यों मिली बड़ी जिम्मेदारी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, January 17, 2026
Last Updated On: Saturday, January 17, 2026
BJP National President: भारतीय जनता पार्टी ने अब तक कई मजबूत नेताओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है, जिन्होंने अलग-अलग दौर में संगठन को दिशा दी. इसी कड़ी में दिसंबर 2025 में नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और क्षेत्रीय संतुलन को महत्व देने का संदेश दिया. कम उम्र में लंबा राजनीतिक अनुभव रखने वाले नितिन नबीन की यह जिम्मेदारी भविष्य की राजनीति का संकेत मानी जा रही है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, January 17, 2026
BJP National President: भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक ऐसा संगठन है जो अपने नेतृत्व चयन में अनुभव, समर्पण और संगठनात्मक क्षमता को सबसे ऊपर रखता है. बीते चार दशकों में भाजपा ने कई ऐसे अध्यक्ष देखे, जिन्होंने पार्टी को अलग-अलग दौर में नई दिशा दी. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दिसंबर 2025 में जब नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, तो यह फैसला सिर्फ एक नाम की घोषणा नहीं था, बल्कि भविष्य की राजनीति का संकेत भी था. बिहार और पूर्वी भारत से आने वाले नितिन नबीन का इस पद तक पहुंचना, भाजपा की बदलती रणनीति और संगठनात्मक सोच को साफ तौर पर दिखाता है.
नितिन नबीन: कम उम्र, बड़ी जिम्मेदारी
45 साल की उम्र में नितिन नबीन भाजपा के शीर्ष पदों तक पहुंचने वाले सबसे युवा नेताओं में गिने जाने लगे हैं. बिहार जैसे राजनीतिक रूप से जटिल राज्य से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी पाना आसान नहीं होता. नितिन नबीन की नियुक्ति यह बताती है कि भाजपा अब केवल बड़े नामों या लोकप्रिय चेहरों पर नहीं, बल्कि जमीनी पकड़, संगठन के लिए किए गए लंबे योगदान और भरोसेमंद नेतृत्व पर दांव लगा रही है. उनकी छवि एक शांत, मेहनती और रणनीतिक नेता की रही है, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया.
राजनीति में प्रवेश: परिस्थितियों से बना नेता
नितिन नबीन का राजनीति में आना किसी पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा नहीं था. साल 2006 में उनके पिता और भाजपा के वरिष्ठ नेता नवीन किशोर सिन्हा के निधन के बाद परिस्थितियां अचानक बदलीं. पार्टी ने उन्हें पटना पश्चिम उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया. उस समय नितिन की उम्र महज 26 साल थी और उन्होंने पढ़ाई छोड़कर राजनीति को चुना. यह फैसला भावनात्मक भी था और जिम्मेदारी से भरा भी. उपचुनाव में शानदार जीत के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा और यहीं से उनके लंबे राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई.
युवा उम्र में मजबूत नेतृत्व की पहचान
2006 के उपचुनाव में नितिन नबीन ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की और 82 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए. परिसीमन के बाद जब पटना पश्चिम सीट का नाम बदलकर बांकीपुर हुआ, तब भी नितिन नबीन ने अपनी पकड़ बनाए रखी. 2010 से वे लगातार बांकीपुर से जीतते आ रहे हैं. इस जीत ने उन्हें पार्टी के युवा नेतृत्व में एक मजबूत चेहरा बना दिया. इसके बाद वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंचे और राष्ट्रीय महामंत्री जैसी अहम जिम्मेदारी निभाई.
संगठन और सरकार दोनों का अनुभव
नितिन नबीन की खास बात यह है कि उनके पास संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर काम करने का अनुभव है. 2021 में वे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के एक्स-ऑफिशियो सदस्य बने और छत्तीसगढ़ के प्रभारी भी रहे. इसी साल उन्हें बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया, हालांकि 2022 में राजनीतिक समीकरण बदलने के कारण उनका कार्यकाल छोटा रहा. इसके बावजूद उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारियों पर पूरा ध्यान दिया और छत्तीसगढ़ में पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.
छत्तीसगढ़ में रणनीतिक सफलता
2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में भाजपा की शानदार जीत के बाद नितिन नबीन को राज्य का एकमात्र प्रभारी बनाया गया. यह जिम्मेदारी पार्टी का उन पर भरोसा दिखाती है. चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, इन सभी मोर्चों पर नितिन नबीन ने खुद को साबित किया. यही वजह रही कि 2024 में नीतीश कुमार के दोबारा भाजपा के साथ आने के बाद उन्हें फिर से बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया.
क्यों सौंपी गई नितिन नबीन को बड़ी जिम्मेदारी
नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाना सीधे तौर पर उत्तराधिकार की घोषणा नहीं है, बल्कि यह अनुभव और भरोसे का इनाम है. पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि यह पद चमक-दमक का नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत और संगठन के प्रति निष्ठा का परिणाम है. नितिन युवा भी हैं और अनुभवी भी, यही संतुलन उन्हें अगली पीढ़ी के नेतृत्व का चेहरा बनाता है.
भाजपा के अब तक के राष्ट्रीय अध्यक्ष (1980 से अब तक )
- अटल बिहारी वाजपेई (1980-1986)
- लाल कृष्ण आडवाणी (1986-1990, 1993-1998, 2004-2005)
- मुरली मनोहर जोशी (1991 – 1993)
- कुशाभाऊ ठाकरे (1998-2000)
- बंगारू लक्ष्मण (2000 -2001)
- के. जना कृष्णमूर्ति (2001-2002)
- एम. वेंकैया नायडू (2002-2004)
- नितिन गडकरी (2010 -2013)
- राजनाथ सिंह (2005-2009, 2013-2014)
- अमित शाह (2014-2017, 2017-2020)
- जगत प्रकाश नड्डा (2020 से अब तक)
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