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महाशिवरात्रि 2026: भद्रा के साये में भी शुभ रहेगा जलाभिषेक, जानें पूजा विधि और सभी शुभ मुहूर्त
Authored By: Khursheed
Published On: Monday, February 9, 2026
Last Updated On: Monday, February 9, 2026
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 इस बार 15 फरवरी को मनाई जाएगी और इसी दिन करीब 12 घंटे तक भद्रा का साया रहेगा. हालांकि भद्रा का वास पाताल लोक में होने से शिव पूजा पर कोई अशुभ प्रभाव नहीं पड़ेगा. इस दिन जलाभिषेक के कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें श्रद्धा से की गई पूजा विशेष फल प्रदान करती है. जानें शुभ मुहूर्त, सही विधि….
Authored By: Khursheed
Last Updated On: Monday, February 9, 2026
Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाने वाला महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के भक्तों के लिए सबसे पावन अवसरों में से एक होता है. साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी. इस बार यह पर्व इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन करीब 12 घंटे तक भद्रा का साया भी रहेगा. ऐसे में कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भद्रा के कारण शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा पर कोई असर पड़ेगा या नहीं.
महाशिवरात्रि 2026 में भद्रा का समय और प्रभाव
पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 04 मिनट से भद्रा की शुरुआत होगी, जो 16 फरवरी की सुबह 5 बजकर 23 मिनट तक रहेगी. यानी लगभग 12 घंटे 19 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा. आमतौर पर भद्रा को अशुभ माना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस महाशिवरात्रि पर भद्रा का वास पाताल लोक में है. शास्त्रों में स्पष्ट बताया गया है कि जब भद्रा पाताल में रहती है, तो उसका प्रभाव पृथ्वी लोक पर नहीं पड़ता. इसलिए इस दिन शिव पूजा, व्रत और जलाभिषेक पूरी श्रद्धा के साथ बिना किसी भय के किया जा सकता है.
क्या भद्रा में शिव पूजा करना शुभ है?
महाशिवरात्रि भगवान शिव का पर्व है और शिव को कालों का काल माना जाता है. शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि शिव भक्ति पर किसी अशुभ योग का प्रभाव नहीं पड़ता. इस कारण भद्रा के साये में भी की गई शिव आराधना फलदायी होती है. भक्तों को केवल शुद्ध मन, श्रद्धा और नियमों का ध्यान रखना चाहिए, बाकी किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है.
महाशिवरात्रि 2026 पर जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए पूरे दिन कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे. पहला शुभ समय सुबह 8 बजकर 24 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक का होगा. तीसरा और सबसे श्रेष्ठ अमृत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जिसमें किया गया जलाभिषेक विशेष फल प्रदान करता है. जो श्रद्धालु संध्या के समय पूजा करना चाहते हैं, वे शाम 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट के बीच भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं.
- पहला शुभ मुहूर्त: सुबह 8:24 बजे से 9:48 बजे तक
- दूसरा शुभ मुहूर्त: सुबह 9:48 बजे से 11:11 बजे तक
- तीसरा और श्रेष्ठ अमृत मुहूर्त: सुबह 11:11 बजे से 12:35 बजे तक
- संध्या कालीन पूजा का समय: शाम 6:11 बजे से 7:47 बजे तक
इन सभी समयों में किया गया जलाभिषेक अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है
महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक की सही विधि
महाशिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें. इसके बाद शांत मन से भगवान शिव का स्मरण करें और पूजा स्थान पर दीपक जलाएं. यदि संभव हो तो पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करें. तांबे या मिट्टी के लोटे में स्वच्छ जल लें, उसमें गंगाजल, कच्चा दूध या थोड़ा सा शहद मिला सकते हैं. शिवलिंग पर जल धीरे-धीरे अर्पित करें और ध्यान रखें कि जल इधर-उधर न फैले.
- सुबह स्नान कर स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें.
- पूजा से पहले भगवान शिव का ध्यान करें और दीपक जलाएं.
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करें.
- तांबे या मिट्टी के लोटे में स्वच्छ जल लें.
- जल में गंगाजल, कच्चा दूध या थोड़ा सा शहद मिला सकते हैं.
- शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल अर्पित करें.
- जल सीधे शिवलिंग पर गिरे, इधर-उधर न बिखरे.
पूजा में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
जलाभिषेक के बाद तीन पत्तियों वाला बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल या आक का फूल अर्पित करें. बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी डंडी अपनी ओर न रखें. फिर चंदन से तिलक करें और धूप-दीप दिखाएं. पूजा के दौरान कम से कम 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. समय मिले तो शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है. अंत में शांत मन से भगवान शिव से अपनी मनोकामना कहें.
- बेलपत्र हमेशा तीन पत्तियों वाला ही चढ़ाएं.
- बेलपत्र की डंडी अपनी ओर न रखें.
- शिवलिंग पर सफेद फूल, धतूरा या आक का फूल अर्पित करें.
- पूजा के दौरान कम से कम 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.
- चंदन से तिलक करें और धूप-दीप अवश्य दिखाएं.
- पूजा के अंत में शांत मन से अपनी मनोकामना कहें.
- श्रद्धा और विश्वास को पूजा का सबसे अहम हिस्सा मानें.
निष्कर्ष: श्रद्धा ही सबसे बड़ा मुहूर्त
महाशिवरात्रि 2026 पर भद्रा का साया होने के बावजूद शिव पूजा और जलाभिषेक पूरी तरह शुभ है. इस दिन सच्चे मन और श्रद्धा से की गई आराधना भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाती है. इसलिए किसी भी भ्रम में न पड़ें और पूरे विश्वास के साथ महादेव की भक्ति में लीन रहें.
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