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Mangla Gauri Vrat 2026: कब रखा जाएगा सावन का पहला मंगला गौरी व्रत? जानें तिथि, महत्व और संपूर्ण पूजन विधि
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, July 20, 2026
Last Updated On: Monday, July 20, 2026
Mangla Gauri Vrat 2026: सावन 2026 का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त, मंगलवार को रखा जाएगा. यह व्रत विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए करती हैं. जानें इसकी तिथि, महत्व और संपूर्ण पूजन विधि.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, July 20, 2026
Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है. जहां सावन के सोमवार भगवान शिव को समर्पित होते हैं, वहीं प्रत्येक मंगलवार माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दिन रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु का प्रतीक माना जाता है. वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए इस व्रत से दांपत्य जीवन में सुख, प्रेम और समृद्धि का वास होता है.
कब शुरू होगा सावन और पहला मंगला गौरी व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में सावन (श्रावण) मास की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी और इसका समापन 27 अगस्त 2026 को होगा. सावन शुरू होने के बाद पड़ने वाला पहला मंगलवार 4 अगस्त 2026 है. इसी दिन वर्ष का पहला मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा. इसके बाद पूरे सावन में प्रत्येक मंगलवार यह व्रत किया जाएगा.
सावन 2026 मंगला गौरी व्रत कैलेंडर
- पहला व्रत: 4 अगस्त 2026 (मंगलवार)
- दूसरा व्रत: 11 अगस्त 2026 (मंगलवार)
- तीसरा व्रत: 18 अगस्त 2026 (मंगलवार)
- चौथा व्रत: 25 अगस्त 2026 (मंगलवार)
मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के मंगलवार को माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा करने से वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास तथा सामंजस्य बना रहता है. यह व्रत पति के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए विशेष रूप से किया जाता है. जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो या योग्य वर की तलाश हो, उनके लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से मंगल दोष शांत होता है और संतान सुख से जुड़ी बाधाएं भी दूर हो सकती हैं.
इस तरह करें मंगला गौरी व्रत की पूजा
मंगला गौरी व्रत में 16 संख्या का विशेष महत्व माना जाता है. पूजा के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ या लाल रंग के वस्त्र धारण करें और माता गौरी के समक्ष व्रत का संकल्प लें. इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. पूजा में रोली, अक्षत, सिंदूर, पुष्प, फल तथा 16 प्रकार की श्रृंगार सामग्री जैसे चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, साड़ी, कंघी आदि अर्पित करें. इसके बाद आटे का हलवा, लड्डू या पंचमेवा का भोग लगाएं, मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें और घी या कपूर से आरती करें.
व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
- सुबह स्नान कर श्रद्धा के साथ व्रत का संकल्प लें.
- पूजा में 16 श्रृंगार सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है.
- माता गौरी को लाल पुष्प और सिंदूर अवश्य चढ़ाएं.
- व्रत कथा सुनने या पढ़ने के बाद ही आरती करें.
- पूजा पूर्ण होने पर किसी सुहागिन महिला या ब्राह्मण को श्रृंगार सामग्री, अन्न या दक्षिणा का दान करें.
- पूरे दिन सात्विक आचरण रखें और मन, वचन तथा कर्म से पवित्रता बनाए रखें.
आस्था के साथ करें व्रत, मिलेगा मंगलमय जीवन का आशीर्वाद
मंगला गौरी व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि वैवाहिक सुख, परिवार की खुशहाली और सकारात्मक जीवन की कामना का पर्व भी है. श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है. इसलिए यदि आप सावन में इस व्रत को करने की योजना बना रहे हैं, तो सही तिथि और विधि के साथ पूजा कर माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करें.
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