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राधा अष्टमी व्रत का पारण कब करें? पूजा के बाद या अगले दिन, जानें सही नियम
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, September 19, 2026
Last Updated On: Saturday, September 19, 2026
Radha Ashtami 2026 Vrat Paran: राधा अष्टमी 2026 का व्रत रखने वाले भक्तों के मन में पारण को लेकर सवाल रहता है. क्या पूजा के बाद व्रत खोलना चाहिए या अगले दिन सूर्योदय के बाद? शास्त्रीय विधान, अष्टमी तिथि के समय और अलग-अलग परंपराओं के अनुसार पारण का सही समय और विधि यहां जानें.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, September 19, 2026
Radha Ashtami 2026 Vrat Paran: राधा अष्टमी का पर्व राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. इस दिन बड़ी संख्या में भक्त उपवास रखते हैं और मध्याह्न के समय राधा-कृष्ण की विशेष पूजा करते हैं. हालांकि व्रत रखने वालों के बीच एक सवाल अक्सर बना रहता है कि पूजा पूरी होने के बाद उसी दिन व्रत खोला जाए या अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाए.
इस बार कब मनाई जा रही है राधा अष्टमी?
साल 2026 में राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जा रहा है. पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि इस दिन दोपहर करीब 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी. राधा रानी की पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है. भक्त इस दौरान राधा रानी का अभिषेक, श्रृंगार और पूजन कर सकते हैं.
पूजा के बाद क्या करें?
व्रत रखने वाले भक्त स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को साफ करने के बाद राधा रानी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद शुद्ध जल या पंचामृत से अभिषेक करें. राधा रानी को नए वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है. पूजा के अंत में आरती कर राधा-कृष्ण का स्मरण करना शुभ माना जाता है.
क्या उसी दिन व्रत खोल सकते हैं?
राधा अष्टमी व्रत के पारण को लेकर अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं. बृहन्नारदीय पुराण में बताए गए व्रत-विधान के अनुसार पूरे दिन उपवास रखने और अगले दिन व्रत समाप्त करने का उल्लेख मिलता है. इस परंपरा में अगले दिन विवाहित महिलाओं को भोजन कराने और ब्राह्मण को दान देने के बाद व्रत पूर्ण करने की बात कही गई है.
हालांकि कुछ परिवारों और संप्रदायों में अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद उसी दिन पारण करने की परंपरा भी है. इस वर्ष अष्टमी तिथि 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे समाप्त होगी. इसलिए जो भक्त अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा के अनुसार तिथि समाप्ति के बाद पारण करते हैं, वे इसके बाद व्रत खोल सकते हैं.
अगले दिन पारण करने वालों के लिए समय
जो लोग शास्त्रीय परंपरा के अनुसार अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलते हैं, वे 20 सितंबर 2026 को सुबह 6:08 बजे के बाद पारण कर सकते हैं. व्रत की पद्धति अलग-अलग होने के कारण अपने परिवार की परंपरा और मान्यताओं को ध्यान में रखना उचित माना जाता है.
सात्विक तरीके से करें व्रत का पारण
पारण से पहले राधा-कृष्ण को सात्विक भोजन का भोग लगाएं. इसके बाद भगवान को अर्पित किए गए प्रसाद से व्रत खोलना शुभ माना जाता है. जरूरतमंदों और ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान भी किया जा सकता है. पारण के भोजन में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल न करने की परंपरा भी कई घरों में अपनाई जाती है.
इस तरह राधा अष्टमी व्रत का पारण केवल समय से जुड़ा नियम नहीं है, बल्कि इसमें श्रद्धा, परिवार की परंपरा और पूजा-विधि का भी महत्व माना जाता है. यदि आपके घर में कोई विशेष व्रत-पद्धति चली आ रही है, तो उसी के अनुसार पारण करना उचित रहेगा.














