शिव नवरात्रि 2026: उज्जैन में आस्था, परंपरा और विवाह उत्सव का महापर्व, 9 दिनों में कब क्या होगा, देखें पूरा शेड्यूल

Authored By: Nishant Singh

Published On: Tuesday, February 10, 2026

Last Updated On: Tuesday, February 10, 2026

Shiv Navratri 2026 में उज्जैन में आयोजित आस्था, परंपरा और विवाह उत्सव, 9 दिनों के कार्यक्रमों की जानकारी.
Shiv Navratri 2026 में उज्जैन में आयोजित आस्था, परंपरा और विवाह उत्सव, 9 दिनों के कार्यक्रमों की जानकारी.

Shiv Navratri 2026: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि 2026 का पर्व 6 फरवरी से शुरू होकर 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक मनाया जाएगा. नौ दिनों तक भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक और वैदिक अनुष्ठान होंगे. इसे महाकाल के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसका समापन भव्य महाशिवरात्रि दर्शन के साथ होगा.

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Shiv Navratri 2026: उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का जीवंत केंद्र है. देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान पर विराजमान बाबा महाकाल के दरबार में साल भर भक्तों की भीड़ रहती है, लेकिन महाशिवरात्रि से पहले मनाई जाने वाली शिव नवरात्रि का महत्व सबसे अलग होता है. उज्जैन में यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसे भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो पूरे नौ दिनों तक चलता है और दसवें दिन महाशिवरात्रि के साथ चरम पर पहुंचता है.

कब शुरू होगी शिव नवरात्रि 2026 और कब मनाई जाएगी महाशिवरात्रि

वर्ष 2026 में शिव नवरात्रि की शुरुआत 6 फरवरी से होगी. यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से प्रारंभ होकर 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के साथ संपन्न होगा. इन नौ दिनों में प्रतिदिन बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक, वैदिक पाठ और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. खास बात यह है कि भारत में शिव नवरात्रि केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही मनाई जाती है, जो इसे और भी विशेष बना देती है.

पहला दिन: रुद्राभिषेक से होती है पर्व की शुरुआत

6 फरवरी 2026 को शिव नवरात्रि की विधिवत शुरुआत होगी. इस दिन बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाएगा और 11 ब्राह्मणों द्वारा रुद्राभिषेक तथा वैदिक पाठ आरंभ होंगे. यह दिन पूरे उत्सव की नींव माना जाता है, जब मंदिर परिसर में भक्ति और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती है.

दूसरा और तीसरा दिन: नए वस्त्र और शेषनाग श्रृंगार

7 फरवरी को बाबा महाकाल को नए वस्त्र धारण कराए जाएंगे और आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा. वहीं 8 फरवरी को महाकाल का शेषनाग पर श्रृंगार होता है, जो भक्तों के लिए अत्यंत दुर्लभ और मनोहारी दर्शन होता है. इसी दिन एकादश-एकादशनी रुद्रापाठ भी किया जाता है.

चौथा दिन: घटाटोप श्रृंगार का दिव्य स्वरूप

9 फरवरी को शिव नवरात्रि का चौथा दिन होता है, जिसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन बाबा महाकाल का भव्य घटाटोप श्रृंगार किया जाता है. उन्हें कटरा, मेखला, टुपट्टा, मुकुट, मुंडमाल, छत्र और फूलों की मालाओं से सजाया जाता है, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य दिखाई देता है.

पांचवां और छठा दिन: छबीना और होलकर श्रृंगार

10 फरवरी को बाबा महाकाल का छबीना श्रृंगार होता है, जिसमें वे पीले वस्त्र, मुकुट, मुंडमाल और फलों की माला धारण करते हैं. इसके अगले दिन यानी 11 फरवरी को महाकाल का प्रसिद्ध होलकर श्रृंगार किया जाता है, जो ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है.

सातवां और आठवां दिन: उमा-महेश और लाल वस्त्र श्रृंगार

12 फरवरी को बाबा महाकाल का उमा-महेश स्वरूप दर्शन के लिए प्रस्तुत किया जाता है. इस दिन भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती दोनों का संयुक्त स्वरूप देखने को मिलता है. बाबा को कत्थई रंग का वस्त्र पहनाया जाता है. वहीं 13 फरवरी को बाबा महाकाल को लाल वस्त्र धारण कराकर सजाया जाता है, जो शक्ति और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है.

नौवां दिन और महाशिवरात्रि: तांडव और सेहरा धारण

14 फरवरी को शिव नवरात्रि के अंतिम दिन बाबा महाकाल शिव तांडव रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं. इसके बाद 15 फरवरी 2026, महाशिवरात्रि के दिन भगवान महाकाल को सप्तधान मुखौटा पहनाया जाएगा. इस पावन अवसर पर मंदिर लगातार 44 घंटे तक खुला रहेगा, ताकि देश-विदेश से आए भक्त निर्बाध दर्शन कर सकें.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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