वाह श्रीजेश वाह!

Authored By: अनुराग श्रीवास्तव

Published On: Monday, August 5, 2024

Last Updated On: Sunday, April 27, 2025

performance of indian hocky team in paris olympics
performance of indian hocky team in paris olympics

यूं तो एक खिलाड़ी के हर मैच ही अहम होता है, लेकिन जब आप ओलंपिक के मंच पर हों तो खेल का महत्व चरम पर होता है। जाहिर है कि दबाव भी बहुत होता है। पूरी दुनिया देख रही होती है और देश के करोड़ों खेल प्रेमियों की उम्मीदों का दबाव भी होता है, किंतु अपने हाकी स्टार पी श्रीजेश इस दबाव को भी प्रेरणा मानते हैं।

Authored By: अनुराग श्रीवास्तव

Last Updated On: Sunday, April 27, 2025

फिलहाल पेरिस ओलंपिक चल रहे हैं, लेकिन अभी बात शुरू करते हैं टोक्यो ओलंपिक से। लंबे समय से हाशिए पर चल रही भारतीय हाकी टीम वहां से कांसा लेकर लौटी थी। कभी ओलंपिक हाकी की सिरमौर रही भारतीय टीम के लिए यह कांसा भी किसी सोने से कम नहीं था। बहुत साल बाद भारत ओलंपिक में हाकी का पदक लेकर लौटा था। जीत के साथ ही यह भारतीय हाकी के पुनर्जीवन जैसा पल था और इस पल के सबस बड़े हीरो बनकर सामने आए थे गोलकीपर पी श्रीजेश। आमतौर पर हाकी के खेल में फारवर्ड खिलाड़ी ही हीरो बनते हैं जो गोल दागते हैं, लेकिन श्रीजेश गोलपोस्ट पर खड़े रहकर भी प्रशसंकों के दिलों की सैर कर आते हैं।

टोक्यो के बाद पेरिस ओलंपिक में भी श्रीजेश ने फिर कमाल कर दिया है। ब्रिटेन की मजबूत टीम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में मुकाबला जब पेनाल्टी शूटआउट तक पहुंचा तो सारी निगाहें एक बार फिर श्रीजेश की तरफ थीं। कोई और होता तो 140 करोड़ आशाओं, अपेक्षाओं का बोझ, दबाव महसूस करता, लेकिन सदैव चेहरे पर मुस्कुराहट रखने वाले श्रीजेश के लिए यह देश की सेवा का एक और अवसर था। भला वह कैसे चूकते…ब्रिटेन के धुरंधरों की दो पेनाल्टी श्रीजेश ने रोक दीं और मैच भारत के पक्ष में 4-2 से हो गया। एक और अहम बात, भारत इस मैच में अधिकांश समय दस खिलाड़ियों के साथ खेला क्योंकि दूसरे ही क्वार्टर में अमित रोहिदास को रेड कार्ड मिल गया था और वह बाकी मैच नहीं खेल सके। इससे भारतीय टीम के उत्साह और साहस पर कोई फर्क नहीं पड़ा और टीम ने शानदार खेल से अंग्रेजों को लगान चुकाने पर विवश कर दिया।

जरा मैच के रोमांच और श्रीजेश के साहस-समझ का मुजाहिरा कीजिए। नियमित समय में स्कोर 1-1 से बराबर रहा तो फैसला पेनाल्टी शूटआउट से करने का लिया गया। पहला पेनाल्टी शूट ब्रिटेन की तरफ से लगना था। एलबरी जेम्स आए और आसानी से गोल दाग दिया। अब बारी भारत की थी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने जिम्मेदारी संभाली और गेंद गोल के अंदर व स्कोर 1-1 से बराबर। अब ब्रिटेन की ओर से सामने थे वालेस जिन्होंने गोल कर स्कोर अंग्रेजों के पक्ष में 2-1 कर लिया। सुखजीत ने भारत के लिए दूसरा पेनाल्टी शूट कर मैच 2-2 की बराबरी पर ला दिया। अब यहां से बारी थी श्रीजेश की। सामने थे ब्रिटेन के क्रोनन जो गोल करने में सफल नहीं हो सके। जबकि भारत के लिए ललित ने गोल कर स्कोर 3-2 कर दिया। उम्मीदें बढ़ चलीं। ब्रिटेन के लिए चौथा पेनाल्टी शू लेने आया खिलाड़ी श्रीजेश की चुस्ती, फुर्ती और अनुमान के आगे टिक नहीं सका, नतीजा अंग्रेज गोल नहीं कर सके। अब भारत के लिए राजकुमार आए औऱ प्रिंस के शाही अंदाज में गोलकर भारत को 4-2 के स्कोर के साथ सेमीफाइनल में पहुंचा दिया।

indian hockey star p sreejesh

इससे पहले जब पिछले मैच में भारत ने मजबूत आस्ट्रेलिया के खिलाफ 52 साल में पहली ओलंपिक जीत दर्ज की थी तो भी स्टार गोलकीपर श्रीजेश का अहम योगदान रहा था। अगर उन्होंने आस्ट्रेलिया के दो गोल शानदार तरीके से बचाए न होते तो स्कोरलाइन कुछ और भी हो सकती थी। श्रीजेश भारतीय हाकी के लिए एक धरोहर सरीखे हैं, उन्हें संजोकर रखना चाहिए। पिछले ओलंपिक के बाद वह देश के नए खेल सितारे के रूप में सामने आए थे। अब फिर उसी अंदाज में खेल रहे हैं। पेरिस ओलंपिक में भारतीय हाकी टीम ने पुराने स्वर्णिम युग की याद दिला दी है। अभी पदक नहीं जीता है, लेकिन धुरंधर आस्ट्रेलिया को पटखनी देने के बाद ब्रिटेन के हराकर लगातार दूसरे ओलंपिक में सेमीफाइनल में जगह बनाकर बता दिया है कि वी हैव अराइव्ड।

ओलंपिक की बात करें तो भारतीय हाकी का स्वर्णिम इतिहास रहा है। सबसे अधिक आठ स्वर्ण पदक हमारी हाकी टीम ने ओलंपिक में जीते हैं। देश के लिए जब व्यक्तिगत स्पर्घाओं में पदक नहीं आते थे तो हमें हमारी हाकी टीम ही पदक दिलाया करती थी। वह भी एक के बाद एक लगातार। हरमनप्रीत का तेज खेल उन्हें बाकी खिलाड़ियो से अलग बनाता है। वह रणनीति बनाने के साथ स्वयं आगे आकर खेलते हैं यानी लीडिंग फ्राम द फ्रंट वाली परफेक्ट स्थिति में कप्तानी करते हैं। इसका बाकी खिलाड़ियों के मनोबल पर भी स्पष्ट प्रभाव दिखता है। टोक्यो में भारतीय पुरुष हाकी टीम ने कांस्य पदक जीता था जिसकी चमक किसी सोने से कम नहीं थी। इस बार पदक का रंग बदलने की आस है।

अनुराग श्रीवास्तव ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर करते हुए अपने करियर में उल्लेखनीय योगदान दिया है। क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, और अन्य खेलों पर उनके लेख और रिपोर्ट्स न केवल तथ्यपूर्ण होती हैं, बल्कि पाठकों को खेल की दुनिया में गहराई तक ले जाती हैं। उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता और घटनाओं को रोचक अंदाज में प्रस्तुत करने का कौशल उन्हें खेल पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट बनाता है। उनकी लेखनी खेलप्रेमियों को सूचनात्मक और प्रेरक अनुभव प्रदान करती है।
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